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वकीलों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नाराज, CJI से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

TCN Desk TCN Desk | 52m ago · 4 min read
वकीलों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नाराज, CJI से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

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SCBA ने कहा कि हिरासत का कोई वैध आधार नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के आसपास शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे वकीलों को हिरासत में लिए जाने और उनके खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने चिंता जताई है। एसोसिएशन ने शनिवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उसने विशेष रूप से महिला वकीलों की सुरक्षा का सवाल उठाते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए प्रत्येक अधिवक्ता का पता लगाया जाए और उनकी सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित की जाए।


SCBA ने अपने बयान में कहा कि उसे कई वकीलों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली है। एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से संबंधित अधिकारियों के साथ मामला उठाने का अनुरोध किया, ताकि सभी हिरासत में लिए गए वकीलों के ठिकाने और उनकी सुरक्षा की जानकारी मिल सके। साथ ही उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए और जिनके खिलाफ हिरासत का कोई वैध आधार नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

SCBA, Social Media


एसोसिएशन की मांग है कि हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं की स्थिति स्पष्ट की जाए। उसके बयान में वरिष्ठ और युवा वकीलों, खासकर महिला अधिवक्ताओं के साथ कथित बल प्रयोग को लेकर नाराजगी जताई गई है। हालांकि, बल प्रयोग और हिरासत की परिस्थितियों संबंधी ये आरोप एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं।

लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी शनिवार को वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं की हिरासत की निंदा की। संगठन के अनुसार, इनमें महिला वकील और उसके सदस्य भी शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए थे। उसने मुख्य न्यायाधीश से संबंधित अधिकारियों के समक्ष हस्तक्षेप कर उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित कराने की अपील की।

LAFC ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के पक्ष में आवाज उठाने से वकीलों के संवैधानिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। संगठन के मुताबिक, शांतिपूर्ण सभा पर किसी भी पाबंदी का स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए। ऐसी कार्रवाई आवश्यक, परिस्थितियों के अनुपात में और मानवीय गरिमा का सम्मान करने वाली होनी चाहिए।

संगठन ने यह भी कहा कि किसी अधिवक्ता को हिरासत का कारण और स्थान तुरंत बताए बिना रोकना, या उसे कानूनी सहायता से वंचित रखना, बुनियादी संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करता है। दोनों संगठनों की मांगों के केंद्र में हिरासत की वैधता, सुरक्षा और कानूनी सहायता तक पहुंच का सवाल है। वकीलों की हिरासत का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका गया।

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शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के भीतर ही हिरासत में लिया गया। दीपके की ओर से साझा वीडियो में पुलिसकर्मी विमान में प्रवेश करते दिखाई दिए।

सीजेपी ने इस कार्रवाई को पूर्वनियोजित बताया और आरोप लगाया कि उसका उद्देश्य प्रदर्शन के नेतृत्व को आयोजन स्थल तक पहुंचने से रोकना था। पार्टी ने तीनों नेताओं की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।

प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था। सीजेपी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में गड़बड़ियों और मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों का विरोध कर रही है। इससे पहले शनिवार सुबह यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, उन्हें दिल्ली में निषेधाज्ञा और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण वहां न जाने के लिए समझाया गया था। पुलिस ने कहा कि उनके नहीं मानने पर कार्रवाई की गई। सीजेपी की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।

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माकपा ने बताया कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और पूर्व मंत्री के.एन. बालगोपाल को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम पहुंचाया। पार्टी के अनुसार, एम.ए. बेबी, वृंदा करात, ई.पी. जयराजन, एम.वी. गोविंदन, के.के. शैलजा और पी.के. श्रीमति को भी हिरासत में लिया गया। वाम दलों ने सीजेपी के प्रदर्शन को समर्थन दिया था। प्रदर्शनकारियों को रोकने की कार्रवाई शुक्रवार से पहले ही शुरू हो गई थी। मध्य प्रदेश के भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में दिल्ली जा रहे यात्रियों को ट्रेनों से उतारा गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अपने राज्यों में लौटने के लिए समझाया जा रहा था।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में रातभर के दौरान कम से कम एक हजार लोगों को हिरासत में लिया गया। इन कार्रवाइयों के बीच अब वकील संगठनों ने भी हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं की सुरक्षा, कानूनी सहायता और वैध आधार के बिना रोके गए लोगों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई है।