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SIR और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर BJP पड़ रही अकेली, सहयोगी पार्टियाँ छोड़ने लगी साथ

Md. Tousif Md. Tousif | 1h ago · 4 min read
SIR और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर BJP पड़ रही अकेली, सहयोगी पार्टियाँ छोड़ने लगी साथ

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जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSR कांग्रेस ने 2020 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादित कृषि कानूनों का समर्थन किया था।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और वे पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं। कांग्रेस समेत देश की विपक्षी पार्टियां इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं, मगर अब कई मुद्दों पर NDA का साथ देने वाले आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के रुख भी बदले-बदले से नज़र आ रहे हैं। संसद में कई मुद्दों पर NDA गठबंधन का साथ देने वाले जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयोग को लेकर किए गए फैसले पर दुख जताया है और CJP का समर्थन किया है। उनके इस समर्थन के बाद माना जा रहा है कि इसके पीछे वामपंथी पार्टियों के साथ उनका तालमेल हो सकता है। हालांकि, अभी तक इस पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री जगमोहन रेड्डी ने कहा था कि-

"हमें इस बात का एहसास हो गया है कि हमें उस प्रक्रिया से सहमत नहीं होना चाहिए था, जिसमें चुनाव आयुक्त को तीन सदस्यीय समिति चुनती है।" रेड्डी ने आगे कहा कि, "आंध्र प्रदेश में विपक्षी पार्टी होने के नाते हमें लगता है कि हमें उनका साथ देना चाहिए, जो उन लोगों के हितों की रक्षा कर रहे हैं जिनके वोट गैरकानूनी तरीके से काटे गए हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश की TDP की सरकार चुनाव आयोग की मिलीभगत से अपने इशारों पर चलने वाले इस आयोग की कार्रवाई का फायदा उठा रही है।

जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSR कांग्रेस ने 2020 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादित कृषि कानूनों का समर्थन किया था। साल 2023 में जब संसद की नई इमारत का उद्घाटन हो रहा था, तब पार्टी के नेता कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसका बहिष्कार किया था। नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA और अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर भी पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन किया था। साल 2025 में जगन की पार्टी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन का साथ दिया था।

इसके पहले INDIA गठबंधन से बाहर और NDA की सहयोगी मानी जाने वाली ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) भी राहुल गांधी के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित मार्च में हिस्सा ले चुकी है। विरोध मार्च में शामिल होने को लेकर BJD सांसद सुलता देव ने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि पार्टी के नेता और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि BJD न तो INDIA गठबंधन का हिस्सा है और न ही NDA का। BJD सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्रवाई लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान ओडिशा में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुलता देव ने दावा किया कि ओडिशा में करीब 27.50 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए और पूरे देश में यह संख्या करीब 13 करोड़ है। सुलता देव ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्रवाई से ऐसा लगता है कि उसे BJP कार्यालय से निर्देश मिल रहे थे और उन पर अमल किया जा रहा था। उन्होंने ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संथाना गोपालन को लेकर भी दावा किया कि उन पर काफी दबाव था और वे VRS के लिए आवेदन कर रहे हैं।

सुलता देव ने यह भी कहा कि BJD प्रमुख नवीन पटनायक पहले से ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि BJD का विरोध किसी गठबंधन में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए है। BJD जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।

इसी तरह तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने भी पिछले दिनों SIR को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बैठक की। DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक चेन्नई स्थित DMK मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' में हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR को पूरी तरह रद्द करने और EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की गई। बैठक में चुनावी अनियमितताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रपति को याचिका सौंपने का फैसला भी लिया गया।


राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा थी कि केंद्र सरकार अपने बहुप्रतीक्षित परिसीमन विधेयक पर समर्थन जुटाने के लिए DMK से बातचीत कर रही है। लेकिन इस बैठक के बाद मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैठक में कहा गया कि अगर मोदी सरकार परिसीमन विधेयक को लेकर कोई विशेष सत्र बुलाती है, तो पार्टी विधेयक का मसौदा देखने के बाद ही अपना रुख स्पष्ट करेगी। इससे पहले DMK संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्र की BJP सरकार संवैधानिक मूल्यों को नष्ट कर रही है। कनिमोझी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।

Md. Tousif

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मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।