राहुल गांधी समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SC में दाखिल की याचिका
याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पार्टी बनाया गया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सोमवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया है।
Live Law की एक रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का शामिल होना दर्शाता है कि इस मामले को कई विपक्षी दल मिलकर अदालत तक ले गए हैं। खास बात यह है कि यह पहली बार है जब विपक्षी नेताओं ने किसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। करीब एक किमी लंबे मार्च में विपक्ष के नेता बस में, पैदल और वाहन में सवार हुए।
राहुल गांधी और खड़गे के अलावा सौगत रॉय, अखिलेश यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। विपक्षी नेताओं की ओर से याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस. प्रसन्ना के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पार्टी बनाया गया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहा है। अब इन आरोपों और प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों को विपक्ष ने न्यायिक मंच पर उठाया है।
याचिका दाखिल करने से पहले सोमवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च का नेतृत्व किया। इस मार्च के जरिए विपक्ष ने एसआईआर और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े अपने विरोध को आगे बढ़ाया।
इसके बाद राहुल गांधी सहित 11 विपक्षी नेताओं की ओर से शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की गई। मार्च में हजारों की संख्या में लोग उमड़े। दिल्ली की बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक जनसैलाब उमड़ गया।
यह घटनाक्रम मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात का अनुरोध अस्वीकार किए जाने के एक दिन बाद सामने आया है। दोनों नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय मांगा था।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस मुलाकात के दौरान एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। ज्ञापन के माध्यम से वे एसआईआर प्रक्रिया पर अपनी चिंताएं सामने रखना चाहते थे। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जानी थी।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि जिन मुद्दों को विपक्षी नेता उठाना चाहते हैं, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। इसी आधार पर उन्होंने इन विषयों पर अलग से मुलाकात करने के बजाय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के जरिए राहत मांगने का रास्ता स्पष्ट किया।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालत प्रशासनिक स्तर पर सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेता उचित राहत के लिए न्यायिक पक्ष में अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यानी अपनी मांगों और आपत्तियों को याचिका के माध्यम से अदालत के सामने रखने का विकल्प उनके लिए खुला है।
एसआईआर से संबंधित इसी तरह के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई निर्धारित है। सीजेआई ने संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की ओर से कोई याचिका दाखिल की जाती है, तो उस पर भी पहले से लंबित मामलों के साथ विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संकेत को नई याचिका पर किसी आदेश या राहत के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सोमवार को दाखिल याचिका का मुख्य विषय मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप हैं। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इसी राजनीतिक विरोध का हिस्सा है।
