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राहुल गांधी की याचिका पर SC का एक्शन, चुनाव आयोग और तीनों आयुक्तों को नोटिस

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 6 min read
राहुल गांधी की याचिका पर SC का एक्शन, चुनाव आयोग और तीनों आयुक्तों को नोटिस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई फैसले एकतरफा लेने का आरोप लगाते हुए समयबद्ध जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और चुनावी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका पर गुरुवार को भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के 13 नेताओं ने यह याचिका दाखिल की है।


Bar and Bench की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई फैसले एकतरफा लेने का आरोप लगाते हुए समयबद्ध जांच की मांग की गई है। विपक्षी नेताओं ने जांच पूरी होने तक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया स्थगित करने की भी मांग की है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि, पीठ ने याचिका में सह-याचिकाकर्ता झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की नेता महुआ मांझी के संबंध में एक प्रारंभिक नोटिस जारी किया।

अदालत ने महुआ मांझी के कुछ बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें अपने बयानों और आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया, “प्रतिवादी संख्या 9 को अपने बयानों और आचरण की व्याख्या करनी होगी।”

यह याचिका राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य विपक्षी नेताओं ने दायर की है। इसमें निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और संवैधानिक प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय अकेले लिए, जबकि निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि आयोग के निर्णय लेने की सामूहिक प्रक्रिया में किसी एक सदस्य की प्रमुख भूमिका संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन पर सवाल खड़े करती है। याचिका में मांग की गई है कि इन आरोपों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आयोग के फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए या नहीं।

यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है, जब विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

याचिका दाखिल करने की पृष्ठभूमि में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की मांग भी शामिल है। दोनों नेताओं ने SIR प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर अपनी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए CJI से मिलने का अनुरोध किया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मुलाकात नहीं की और संकेत दिया कि इन मुद्दों को उचित न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से उठाया जा सकता है।

इसके बाद राहुल गांधी समेत सोमवार को व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचे और याचिका दाखिल की। इस दौरान खड़गे तथा इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे। बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया गठबंधन के नेताओं- कार्यकर्ताओं के इस मार्च में अपार संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लिया।

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सोमवार को दिल्ली की सडकों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा था। विपक्षी नेताओं की इस पहल को चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ साझा राजनीतिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरुआत में रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण अटक गई थी। रजिस्ट्री ने याचिका में 14 खामियां बताई थीं। इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी और नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे का उपलब्ध नहीं होना शामिल था।

याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले को दोबारा खुलवाने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग है कि अदालत यह जांच करे कि SIR लागू करने के दौरान लिए गए अलग-अलग फैसले संविधान और संबंधित कानूनों में निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप थे या नहीं।

याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त सूचना, सुनवाई और मतदाता सूची से हटाए गए पात्र लोगों के नाम बहाल करने की प्रभावी व्यवस्था के बिना मतदाताओं को बाहर किए जाने की आशंका है।

याचिका में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में 14 मौकों पर ज्ञानेश कुमार के एकतरफा निर्णय लेने पर आपत्ति जताई थी।

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि विवादित फैसलों से संबंधित पूरी फाइलें, बैठक के एजेंडे, आधिकारिक टिप्पणियां और दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियां पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसमें जून 2025 में SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित दस्तावेज भी शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि इन दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आयोग के भीतर निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और क्या सभी सदस्यों को अपनी राय रखने का पर्याप्त अवसर मिला।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग भी की गई है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के सदस्यों को शामिल करने की बात कही गई है।

यह समिति निर्वाचन आयोग के फैसलों, नीतियों, प्रक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से संबंधित तकनीकी व्यवस्था की जांच करे। इसके अलावा, याचिका में वैधानिक फॉर्म-6 में गैपकानूनी बदलाव पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना इस फॉर्म में बदलाव किया गया।

याचिका में ECINET और ERONET के जरिए मतदाता सूची से जुड़े डेटाबेस के केंद्रीकृत संचालन पर भी चिंता जताई गई है। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि मतदाता सूची से नाम हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था होनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने दलील दी है कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए अनिवार्य है। उनके अनुसार, ये सिद्धांत संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं। याचिका में चुनावी सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण से जुड़े संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

अधिवक्ता एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल इस याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। अब मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और निर्वाचन आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।