Politics

भाजपा के 30 साल पुराने अभेद्य किले को प्रशांत किशोर ने 30 दिनों में किया ध्वस्त

TCN News Desk TCN News Desk | 1h ago
भाजपा के 30 साल पुराने अभेद्य किले को प्रशांत किशोर ने 30 दिनों में किया ध्वस्त

जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त दी है।

बिहार के बांकीपुर में 30 सालों से खड़ा भाजपा का अभेद्य किला महज 30 दिनों में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने ध्वस्त कर दिया। तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना के बाद अब नतीजे आ गए हैं। बिहार के बांकीपुर और मध्यप्रदेश के दतिया में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा झटका हालांकि बांकीपुर विधानसभा सीट से मिला है। बांकीपुर वही सीट है जिस पर भाजपा के नए-नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नवीन का 30 सालों से कब्जा था। यह वही नितीन नवीन हैं जिसे पीएम मोदी ने बॉस कहा था।

प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 वोटों से हराया। उन्हें 63,203 वोट मिले, जबकि नीरज कुमार सिन्हा को 44,250 वोट प्राप्त हुए। वहीं, राजद की रेखा गुप्ता 14,085 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

Advertisement


2006 से सीट के गठन के बाद से भाजपा हर चुनाव जीतती रही है। इस सीट पर भाजपा को कभी भी 59 प्रतिशत से कम वोट नहीं मिले थे, लेकिन अब उसका यह अजेय रिकॉर्ड टूट गया है। यह नतीजा ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब महज नौ महीने पहले हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर शानदार जीत हासिल की थी। दिलचस्प बात यह है कि उन्हीं विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थीवहीं, बांकीपुर उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) तीसरे स्थान पर रही है।

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव को बिहार की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का संदेश बताया उन्होंने BJP के नेतृत्व पर भी सवाल उठाएजीत हासिल करने के साथ ही जनसुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने इसे केवल एक विधायक चुनने का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार को किस तरह का नेतृत्व चाहिए, इस पर जनता का फैसला बताया।


प्रशांत किशोर ने कहा कि

मतदाताओं ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि " बांकीपुर की जनता जीत गई है। जैसा कि हमने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, यह सिर्फ विधायक बनाने का चुनाव नहीं है। यह बिहार की जनता का भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देने का प्रयास है कि बिहार में एक अच्छे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाइए।"

उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार और पलायन जैसे मुद्दों पर काम करे, ताकि राज्य के बच्चों को कम वेतन वाली नौकरियों के लिए अपने घर-परिवार से दूर दूसरे राज्यों में न जाना पड़े।

किशोर ने दावा किया कि बांकीपुर में जनसुराज और भाजपा की तीन दशक पुरानी राजनीतिक बढ़त के बीच का अंतर बहुत तेजी से खत्म हो गया है। उन्होंने कहा,

"30 साल का अंतर सिर्फ 30 दिनों में भर गया।" यह नतीजा बेहतर शासन और बच्चों के भविष्य के लिए अवसरों की जनता की मांग को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि इस चुनाव को सिर्फ इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए कि विधायक कौन जीता या हारा। "विधायक का जीतना-हारना राजनीतिक बात है, यह चलता रहता है," उन्होंने कहा। साथ ही उन्होंने उनका समर्थन करने वाले मतदाताओं का आभार जताया और भरोसा दिलाया कि जिन्होंने उनका साथ नहीं दिया, उनका विश्वास भी जीतने की कोशिश करेंगे।

प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि भाजपा और एनडीए की राजनीति से है। उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी नाम लेते हुए कहा कि उनकी आलोचना इस सवाल से जुड़ी है कि बिहार का नेतृत्व किसके हाथ में होना चाहिए।

किशोर ने कहा,

"अगर आप बिहार का मुख्यमंत्री किसी अपराधी को बनाएंगे तो बिहार आगे नहीं बढ़ सकता।" उन्होंने भाजपा नेतृत्व से अपील की कि वह "एक अच्छे और सक्षम व्यक्ति" को मुख्यमंत्री बनाए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किसी खास समुदाय से बाहर का होना जरूरी नहीं है। "सम्राट चौधरी की जगह किसी कुशवाहा को बना दीजिए। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। कुशवाहा को बनाइए, लेकिन कुशवाहा समाज का कोई अच्छा आदमी मुख्यमंत्री बनाइए।" उन्होंने दावा किया कि बिहार के एक करोड़ से अधिक बच्चे दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं और केंद्र व राज्य सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू करने की मांग की।

उन्होंने कहा, "कोई भी बच्चा अपने घर, परिवार और समाज को छोड़कर सिर्फ 10-15 हजार रुपये कमाने के लिए गुजरात, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, कोयंबटूर, तमिलनाडु या कर्नाटक जाने को मजबूर न हो।" किशोर ने गुजरात के विकास और बिहार की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि बिहार के लोगों को भी बेहतर अवसर और आधारभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा,

"अगर सारी सुविधाएं सिर्फ गुजरात के लोगों को ही मिलेंगी, तो बिहार के लोग कहां जाएंगे? बिहार के लोग सिर्फ मजदूरी करने के लिए पैदा नहीं हुए हैं।"

उन्होंने कहा कि भाजपा को पांच साल का जनादेश मिला है और उसे सक्षम लोगों को जिम्मेदारी देकर बिहार के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने लोगों की अपेक्षाओं को लेकर भी संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "अगर मैं विधायक बन भी जाऊं तो बांकीपुर बेंगलुरु नहीं बन जाएगा।" हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि अगले दो-तीन महीनों में लोगों को कुछ सकारात्मक बदलाव जरूर दिखाई देंगे उन्होंने कहा कि इस चुनाव का महत्व सिर्फ बांकीपुर तक सीमित नहीं है।