Politics

पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च पांच गुना बढ़ा: विदेश मंत्रालय

TCN Desk TCN Desk | 2h ago
पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च पांच गुना बढ़ा: विदेश मंत्रालय

2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च 550 करोड़ रुपये को पार कर चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च 2021 के बाद से पांच गुना बढ़ गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि इन यात्राओं का सालाना खर्च 2021 में 36 करोड़ रुपये से अधिक था, जो 2025 में बढ़कर 180 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।

Business Standard की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने एक लिखित जवाब में बताया कि 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कुल खर्च 550 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। 2026 में अब तक इन यात्राओं पर 74.58 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। हालांकि, कुछ आंकड़े अभी अस्थायी हैं और जून में हुई फ्रांस यात्रा का खर्च अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। मार्गेरिटा ने बताया कि इस साल जिन यात्राओं के खर्च का हिसाब तैयार किया गया है, उनमें मई में प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे दौरे पर सबसे ज्यादा 17.46 करोड़ रुपये खर्च हुए।


विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार,

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर 2021 में 36 करोड़ रुपये से अधिक, 2022 में 55 करोड़ रुपये, 2023 में 93 करोड़ रुपये, 2024 में 109 करोड़ रुपये और 2025 में 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ।

इस खर्च का बचाव करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि जुलाई 2021 से अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान 316 समझौता ज्ञापनों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये समझौते रक्षा, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष सहयोग, आवागमन और प्रवासन, जलवायु कार्रवाई तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2026 में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर अब तक कुल करीब ₹74.59 करोड़ खर्च हुए हैं। इसमें इस साल फरवरी से जुलाई के बीच की गई यात्राएं शामिल हैं। सरकार ने बताया कि फ्रांस समेत कुछ यात्राओं और मई में कई देशों की यात्रा पर हुए खर्च के आंकड़े अभी अस्थायी हैं। सभी बिलों का निपटारा होने के बाद अंतिम खर्च तय किया जाएगा।


2025 में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर सबसे ज्यादा खर्च हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जवाब में शामिल अवधि के दौरान प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सबसे ज्यादा सालाना खर्च 2025 में हुआ। इस साल कुल करीब ₹187.83 करोड़ खर्च किए गए। 2025 में प्रधानमंत्री ने फ्रांस, अमेरिका, मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, सऊदी अरब, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया, ब्रिटेन, मालदीव, चीन, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया की यात्राएं कीं।

2024 में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकार ने करीब ₹109.51 करोड़ खर्च किए। इस दौरान मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, भूटान, इटली, रूस, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, यूक्रेन, ब्रुनेई, सिंगापुर, अमेरिका, लाओस, नाइजीरिया, ब्राजील, गुयाना और कुवैत समेत कई देशों की यात्रा की।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की उच्चस्तरीय विदेश यात्राएं द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत के संबंधों को मजबूत करने में मदद करती हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इन यात्राओं से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा सहयोग और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला।

वहीं The Wire की एक रिपोर्ट के अनुसार, 13 फरवरी,2026 को लोकसभा में केंद्रीय विदेश मंत्रालय की ओर से दाखिल जानकारी से सामने आया था कि,

2015 से 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर सरकारी खजाने से 762 करोड़ रुपये खर्च हुए। 13 फरवरी 2026 को विदेश मंत्रालय ने एक लिखित जवाब में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च के साथ-साथ उनके साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों से जुड़ी जानकारी भी दी। जवाब के मुताबिक, 2024 में इन विदेश यात्राओं पर सालाना खर्च 100 करोड़ रुपये से अधिक था, जबकि 2025 में यह 175 करोड़ रुपये को पार कर गया। इस दौरान मोदी ने यूरोपीय देशों, अमेरिका महाद्वीप, अफ्रीका और पूर्वी एशिया की यात्राएं कीं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन यात्राओं के दौरान मेजबान देश आतिथ्य से जुड़े ज्यादातर खर्च वहन करता है, जबकि भारत सरकार मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्था, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल, मीडिया दल और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं पर खर्च करती है। मई 2014 से प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में जरूरत के अनुसार 27 से 72 सदस्य शामिल रहे हैं। मंत्रालय के जवाब के मुताबिक, 2025 में पांच देशों की एक यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल में 95 सदस्य थे। दस्तावेजों से यह भी पता चला कि महामारी के बाद के दौर में सरकार ने इन यात्राओं पर सबसे कम खर्च किया था, लेकिन इसके बाद द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों तथा गतिविधियों के बढ़ने के कारण खर्च में तेजी आई।

विदेश मंत्रालय के जवाब में यह भी बताया गया कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान इन देशों की यात्राओं पर इससे काफी कम खर्च हुआ था। 2011 में अमेरिका यात्रा पर 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस यात्रा पर 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस यात्रा पर 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी यात्रा पर 6.02 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।