पीएम मोदी को थी चुनाव आयोग में चल रही गड़बड़ियों की जानकारी? कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तक पहुंची थीं। यह विभाग प्रधानमंत्री के प्रभार में आता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी विभाग की ओर से निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की ECINet पोर्टल तक पहुंच सीमित किए जाने की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तक पहुंची थीं। यह विभाग प्रधानमंत्री के प्रभार में आता है। इसी आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि पहुंच सीमित करने का फैसला संभवतः मोदी की जानकारी और निर्देश पर लिया गया।
रमेश के इन आरोपों के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद में प्रधानमंत्री का नाम भी जुड़ गया है। कांग्रेस पहले से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रही है और उन्हें पद से हटाने की मांग कर रही है।
जयराम रमेश ने Hindustan Times में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के उस अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जिसके खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने जुलाई में कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी। कांग्रेस नेता का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारी आयोग के कामकाज में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर रमेश ने लिखा कि,
अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसे अब चुनाव आयोग के विवादित आईटी विभाग की निगरानी का जिम्मा सौंप दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र इसी अधिकारी के एक आदेश के कारण लिखा गया था।
रमेश के मुताबिक,
उस आदेश के जरिए आईटी विभाग के कामकाज पर निगरानी की व्यवस्था हटाई गई थी। उनका आरोप है कि ऐसा विभाग को बिना पारदर्शिता के काम करते रहने की अनुमति देने के लिए किया गया।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि,
अब सामने आया है कि अगस्त से उसी अधिकारी को आईटी विभाग की निगरानी का अधिकार दे दिया गया। इसी आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग की 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए स्पष्टीकरण पर सवाल उठाया। आयोग का स्पष्टीकरण भ्रामक था और उसका उद्देश्य वास्तविक घटनाक्रम को छिपाना था। उनके अनुसार, जिस अधिकारी के आदेश को लेकर शिकायत हुई थी, उसी को बाद में विभाग की निगरानी का अधिकार मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारी की भूमिका को आयोग के भीतर निर्णय लेने और निगरानी की व्यवस्था से जोड़ा। हालांकि, प्रधानमंत्री की जानकारी या निर्देश से निर्णय लिए जाने की बात रमेश का आरोप है। रमेश ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने आईटी विभाग की ओर से निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, यानी ERO, की ECINet मतदाता सूची पोर्टल तक पहुंच सीमित किए जाने का मुद्दा उठाया था। उनके मुताबिक, आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के मामलों में ERO के वैधानिक अधिकारों को दरकिनार किए जाने पर भी चिंता जताई थी।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि,
आईटी विभाग की यह व्यवस्था अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही थी। उन्होंने कहा कि शिकायत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, यानी DoPT, तक पहुंची थी और इस विभाग के जिम्मेदार मंत्री स्वयं प्रधानमंत्री हैं।
रमेश ने इसी आधार पर दावा किया कि,
प्रधानमंत्री को पूरे मामले की जानकारी है और संभवतः यह उनके निर्देश पर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारी को पद पर बनाए रखा है, ताकि पूरे तंत्र पर केंद्रीकृत नियंत्रण कायम रहे। इसे कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ आरोपों से जोड़ते हुए रमेश ने कहा कि SIR की तस्वीर लगातार स्पष्ट हो रही है।
चुनाव आयोग को लेकर यह विवाद उस समय तेज हुआ, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR, से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज की थी। दोनों आयुक्तों का कहना था कि ये निर्णय उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। इसके बाद कांग्रेस ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया और उसके भीतर सामूहिक विचार-विमर्श की व्यवस्था पर सवाल उठाए।
इन आपत्तियों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी समर्थन प्राप्त है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जारी किए गए हैं।