क्यों तेज हो रही है राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को खत्म करने की आवाज?
UGC-NET जून 2026 की अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षाएं दोबारा आयोजित करेगी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पूरी तरह या तो फेल हो चुकी है या फिर इस एजेंसी में परीक्षा माफिया ने अपना पूरा वर्चस्व कायम कर लिया है। अभी NEET पेपर लीक के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के कारण इस एजेंसी की विश्वसनीयता और क्षमता पर गंभीर सवाल उठे थे और अब UGC-NET जून 2026 के प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
NTA ने रविवार को घोषणा की है कि वह,
UGC-NET जून 2026 की अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षाएं दोबारा आयोजित करेगी। यह फैसला एक समिति की जांच के बाद लिया गया, जिसमें पाया गया कि इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों में बड़ी संख्या में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी गलतियां थीं। इसके अलावा पिछले वर्षों की परीक्षाओं के कई सवाल भी दोहराए गए थे।
समिति ने निष्कर्ष निकाला कि ये प्रश्नपत्र “निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा” के मानकों पर खरे नहीं उतरते।
अपने नोटिस में NTA ने स्पष्ट किया कि दोबारा परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर को आयोजित की जाएंगी। इन तीन विषयों की परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। अंग्रेजी की परीक्षा 9 सितंबर को पहली शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। कॉमर्स की परीक्षा उसी दिन दूसरी शिफ्ट में दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को पहली शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी।
NTA के अनुसार, समिति की जांच में इन तीनों प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी गलतियां दर्ज की गईं। इनमें प्रमुख विद्वानों के नामों की गलत स्पेलिंग, किताबों के गलत या बिगड़े हुए शीर्षक, सवालों की भाषा में त्रुटियां, व्याकरण संबंधी गलतियां, लिंग और वचन संबंधी त्रुटियां, विराम चिह्नों की गलतियां और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों का इस्तेमाल शामिल था। समिति ने यह भी पाया कि पिछले वर्षों की परीक्षाओं से बड़ी संख्या में सवाल दोहराए गए थे। यह फैसला उम्मीदवारों की शिकायतों के बाद लिया गया है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ने अपनी जांच में स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के विषय विशेषज्ञों ने ही गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए और फिर बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए बड़ी रकम के बदले अभ्यर्थियों तक पहुंचाया था। NEET-UG 2026 पेपर लीक एक सुनियोजित और कई राज्यों में फैली आपराधिक साजिश का नतीजा था। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत में दाखिल चार्जशीट में एजेंसी ने 13 आरोपियों के नाम शामिल किए हैं। इनमें NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों तक अवैध रूप से पहुंच बनाई और फिर उन्हें बिचौलियों के जरिए आगे पहुंचाया था।
NTA को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, आलोचना हो रही है और केंद्र सरकार इस मामले में चुप है। अब यह UGC-NET जून 2026 के प्रश्नपत्रों में गड़बड़ी का घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर Gen Z के विरोध प्रदर्शनों ने नरेंद्र मोदी सरकार को अभूतपूर्व दबाव में ला दिया था।
बता दें कि NTA ने 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों के लिए UGC-NET आयोजित किया था। इस परीक्षा के आधार पर PhD में दाखिला, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता निर्धारित होती है। इससे पहले NTA ने मई में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG आयोजित की थी, लेकिन पेपर लीक के कारण उसे रद्द करना पड़ा और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई।
परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई थीं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दबाव के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।
रविवार को NTA ने जून में आयोजित 87 में से 84 विषयों की प्रोविजनल आंसर-की जारी की, जबकि अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्र रद्द कर दिए। एजेंसी ने कहा कि अभ्यर्थी 18 अगस्त रात 11:59 बजे तक किसी भी प्रश्न को चुनौती दे सकते हैं। इसके लिए प्रति प्रश्न 200 रुपये का भुगतान करना होगा। अगर विशेषज्ञ समिति चुनौती को सही मानती है तो यह राशि वापस कर दी जाएगी। UGC-NET साल में दो बार आयोजित किया जाता है। परीक्षा में कुल 150 प्रश्न होते हैं, जिनमें 100 सवाल संबंधित विषय से और 50 सवाल सामान्य योग्यता यानी जनरल एप्टीट्यूड से होते हैं।
JNU छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि,
इन गड़बड़ियों के अलावा आंसर-की जारी करने में रिकॉर्ड 47 दिनों की देरी हुई है, जिससे PhD दाखिले की प्रक्रिया और ज्यादा देर से पूरी होगी। आमतौर पर NTA करीब 15 दिनों में NET का परिणाम घोषित कर देता है। इस बार सिर्फ आंसर-की जारी करने में ही इतना समय लग गया। अब नतीजे घोषित होने में कुछ और दिन लगेंगे ये समस्याएं बताती हैं कि NTA देशभर में प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है।
नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक अभ्यर्थी ने NTA पर खराब तरीके से परीक्षाएं आयोजित करके और महत्वपूर्ण फैसलों में देरी कर “छात्रों के करियर से खेलने” का आरोप लगाया।
छात्र ने कहा,
सवाल दोहराए जाने और दूसरी गड़बड़ियों की शिकायतें परीक्षा खत्म होते ही दे दी गई थीं। लेकिन NTA ने 45 दिनों तक उन पर कोई फैसला नहीं लिया। “अब तीन पेपर रद्द कर दिए गए हैं और दोबारा परीक्षा की तैयारी के लिए हमें मुश्किल से तीन हफ्ते का समय मिला है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों के लिए NTA और केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं की सिफारिश करने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि,
NTA को खत्म किया जाना चाहिए और NEP को रद्द किया जाना चाहिए।
2024 में NET देने वाले और अब PhD कर रहे एक छात्र ने कहा कि उस साल भी पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। हमने उस समय भी विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन कुछ नहीं बदला। कई छात्र NET पास नहीं कर पाने के कारण आज भी PhD में दाखिले से वंचित हैं, जबकि प्रोफेसर उनके रिसर्च प्रपोजल के आधार पर उन्हें अपने निर्देशन में लेने के इच्छुक हैं।