मुंबई पुलिस क्यों छात्रों और प्रदर्शनकारियों से मांग रही है लाइव लोकेशन?
मुंबई में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस कई हथकंडे अपना रही है।
मुंबई में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस कई हथकंडे अपना रही है। हैरानी की बात है कि कई छात्रों को मुंबई पुलिस सर्विलांस पर रखी हुई है।
The Scroll की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद, 12वीं की छात्रा प्रीति कांबले शिवाजी पार्क पहुंचीं। प्रीति ने बताया कि वह अपने मित्रों के समर्थन में एकजुटता दिखाने आई थीं, जिनमें से एक NEET की तैयारी कर रही है। उस दोस्त के परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए अपनी सारी बचत लगा दी है।
हालांकि, प्रीति को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें कालाचौकी पुलिस स्टेशन ले जाकर कुछ व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की गई, और बाद में छोड़ दिया गया। अगले दिन अंबोली पुलिस स्टेशन से उन्हें फिर बुलाया गया और विभिन्न धाराओं के तहत नोटिस दिया गया। प्रीति ने आरोप लगाया कि अगर उनकी मां बीच में नहीं आतीं, तो पुलिस बल प्रयोग कर सकती थी।
प्रीति के अलावा, कई अन्य छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस की कार्रवाई की शिकायत की है। कुछ को व्हाट्सऐप पर नोटिस भेजे गए, जबकि अन्य को बार-बार थाने बुलाया गया। कई छात्रों को लाइव GPS लोकेशन साझा करने के लिए कहा गया और कुछ के घरों पर पुलिस का दबाव बढ़ा। पुलिस के अनुसार, 16 जुलाई से अब तक 1,400 लोगों को विभिन्न प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना एक अधिकार है, लेकिन यह आवश्यक है कि कानून और सार्वजनिक व्यवस्था का पालन किया जाए।
लेखक रोहन शेलार ने आरोप लगाया कि
पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के दौरान बदसलूकी की। रिहाई के बाद भी, पुलिस उनके लाइव लोकेशन की मांग लगातार कर रही है।
छात्रा नंदिनी गौतम ने बताया कि
एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें घर पर रहने की सलाह दी और मना करने पर उठाने की धमकी दी।
प्रदर्शनकारी अन्नपूर्णा सोनी ने भी बिना किसी प्रदर्शन के ही हिरासत में लिए जाने की बात कही। उनका कहना है कि पुलिस की यह कार्रवाई लोगों को डराने के लिए है, लेकिन वे इससे पीछे नहीं हटेंगी।
इस मामले पर मानवाधिकार वकीलों और कानूनी सहायता देने वाले अधिवक्ताओं ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि
बिना वारंट लोगों को उठाना, वकीलों से मिलने नहीं देना और GPS लोकेशन की मांग करना नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।
फिर भी, कई छात्रों ने यह स्पष्ट किया है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। NEET की तैयारी कर रही छात्रा सांची भोवर ने कहा कि वह बेहतर शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार, यदि छात्र केवल बेहतर व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई क्यों की जा रही है, यह एक बड़ा सवाल है।