हिंदू धर्म पर रब्बी की आपत्तिजनक टिप्पणी, इजरायली राजदूत ने मांगी माफी
रब्बी योसी मिजराही ने भारतीयों और हिंदू धर्म की मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। विवाद बढ़ने पर इजरायली महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने उनकी निंदा करते हुए भारतीयों से माफी मांगी।
हिंदू धर्म और भारतीयों को लेकर इजरायली मूल के यहूदी धर्मगुरु रब्बी योसी मिजराही की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर विवाद बढ़ने के बाद भारत में इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने माफी मांगी है। उन्होंने मिजराही की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए साफ कहा कि उनकी बातें न तो यहूदी समुदाय की सोच का प्रतिनिधित्व करती हैं और न ही इजरायल का।
30 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में रेवाच ने भारतीयों और हिंदुओं से माफी मांगी। उन्होंने मिजराही की टिप्पणियों को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि उन्हें इन बातों से घिन आती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल और ब्रिटेन के मुख्यधारा के यहूदी समुदायों ने मिजराही से दूरी बना रखी है और उन्हें अपने बीच स्वीकार नहीं किया है। हालांकि, यह रेवाच का दावा है और उपलब्ध खबरों में संबंधित यहूदी संगठनों की ओर से इसकी अलग से पुष्टि नहीं की गई है।
अपने संदेश में रेवाच ने भारत और इजरायल के पुराने रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहूदी और इजरायली समुदाय भारत तथा उसके धार्मिक विश्वासों का सम्मान करते हैं। मिजराही की टिप्पणियां दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसीलिए उन्होंने भारतीयों से माफी मांगते हुए इन बयानों को खारिज किया।

गाय और हिंदू आस्था को लेकर क्या बोले थे मिजराही?
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रसारित रब्बी योसी मिजराही के एक वीडियो से हुई। इसमें उन्होंने हिंदुओं की गाय के प्रति आस्था को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उन्होंने दावा किया कि भारत में कुछ लोग गाय का मूत्र पीते हैं और यहां तक कि उसे जमीन पर गिरने के बाद चाटते भी हैं।
मिजराही ने कुछ भारतीय डॉक्टरों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वे भी ऐसा करते हैं। हालांकि, ये उनके अपने दावे हैं। इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
वीडियो में उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर घूमने वाली गायों का भी उल्लेख किया। उनकी टिप्पणियों में भारतीयों की धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति आस्था को उपहास का विषय बनाया गया। वीडियो सामने आने के बाद भारत के सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। इजरायल में भी उनकी बातों की आलोचना की गई।
ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी धर्म की मान्यताओं पर असहमति या आलोचना व्यक्त करना अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय की आस्था को लेकर अपमानजनक और उपहासपूर्ण टिप्पणियां करना अलग। मिजराही की टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद का एक बड़ा कारण यही है।
कौन हैं रब्बी योसी मिजराही?
योसी मिजराही इजरायली मूल के यहूदी धर्मगुरु हैं और अमेरिका में रहते हैं। वे ऑर्थोडॉक्स यहूदी धर्म के प्रचारक हैं और 'डिवाइन इन्फॉर्मेशन' नाम से एक सोशल मीडिया पेज भी चलाते हैं।
इजरायली महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने अपने बयान में मिजराही को कट्टरपंथी और होलोकॉस्ट से इनकार करने वाला बताया है। ये रेवाच की ओर से लगाए गए आरोप हैं। मिजराही की मौजूदा टिप्पणियों पर उनकी अपनी प्रतिक्रिया उपलब्ध खबरों में सामने नहीं आई है
मिजराही इससे पहले भी होलोकॉस्ट को लेकर दिए गए बयानों के कारण विवादों में रहे हैं। होलोकॉस्ट नाजी जर्मनी और उसके सहयोगियों द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यूरोप के करीब 60 लाख यहूदियों की सुनियोजित हत्या को कहा जाता है।
होलोकॉस्ट पर भी विवादित बयान दे चुके हैं मिजराही
दिसंबर 2015 में मिजराही ने होलोकॉस्ट में मारे गए यहूदियों की संख्या को लेकर गलत दावा किया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि इस नरसंहार में मरने वाले यहूदियों की संख्या 10 लाख से कम थी, जबकि ऐतिहासिक शोध और दस्तावेजों के अनुसार नाजी जर्मनी और उसके सहयोगियों ने करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या की थी।
उनके इस बयान की आलोचना हुई थी और बाद में उन्होंने माफी भी मांगी थी। होलोकॉस्ट से जुड़े तथ्यों को लेकर इस तरह के दावे इतिहासकारों और यहूदी समुदाय के बीच गंभीर आपत्ति का विषय रहे हैं।
दिसंबर 2016 में 16 ऑर्थोडॉक्स यहूदी रब्बियों ने भी मिजराही के प्रचार करने के तरीकों की आलोचना की थी। इसके बाद मार्च 2019 में ब्रिटेन में उनके प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भी विवाद हुआ था।
नरेंद्र मोदी के शासनकाल में इजरायल और भारत के बीच सम्बन्ध मज़बूत करने की कोशिशें हुई हैं, नेतन्याहू भारत आए और नरेंद्र मोदी भी इजरायल गए। खासतौर पर ग़ज़ा में नरसंहार के दौरान जहाँ दुनिया भर में इजरायल की निंदा हुई भारत में एक आधिकारिक चुप्पी बनाकर रखी गई और सरकार समर्थक संगठनों और समूहों ने खुलेआम इजरायल का समर्थन किया। यहाँ तक कि कई समूहों ने इजरायल जाकर फलस्तीनीयों के खिलाफ़ लड़ने की भी पेशकश की। अभी हाल में संघ के दशहरा आयोजन में भी इज़रायली राजदूत मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे।
ऐसे में मिजराही का यह बयान याद दिलाता है कि जायनिस्ट यहूदी सिर्फ़ ईसाइयों और मुसलमानों ही नहीं बल्कि हिन्दू धर्म को भी अपने से कमतर मानते हैं, मज़बूरियों के चलते राजनैतिक रिश्ते भले बन गए हों लेकिन जायनिज़्म की खुद को सर्वोच्च मानने की प्रवृत्तियों के चलते ऐसे विरोधाभाष आगे भी आएंगे।
