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सरकार सोशल मीडिया पर हर 68 सेकेंड में एक कंटेंट कर रही ब्लॉक

TCN Desk TCN Desk | 5h ago · 6 min read
सरकार सोशल मीडिया पर हर 68 सेकेंड में एक कंटेंट कर रही ब्लॉक

महज पांच महीनों में लगभग 1.95 लाख कंटेंट को ब्लाक करने का आदेश दिया गया है।

यह सेंसरशिप से भी खतरनाक है। मोदी सरकार के मंत्री, समर्थक को जब कभी कांग्रेस पर हमला बोलना होता है तो इमरजेंसी की बात करते हैं। लेकिन वर्तमान दौर इमरजेंसी से भी भयावह है। गौरी लंकेश, भीमा कोरेगांव से लेकर उमर खालिद तक हम मोदी सरकार में तानाशाही का वीभत्स रूप देखते आ रहे हैं। और अब जंतर-मंतर के विरोध-प्रदर्शन के बाद मोदी सरकार ने जिस तरह आम नागरिकों का भरोसा खोया है, उसके बाद पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तिलमिलाहट और बढ़ गई है और इसी का परिणाम है कि,

सरकार और सरकारी एजेंसिया औसतन हर 68 सेकंड में एक कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश Meta, X और You Tube को दे रही है। हर दिन करीब 1,275 आदेश। और महज पांच महीनों में लगभग 1.95 लाख कंटेंट को ब्लाक करने का आदेश।

Indian Express को मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मार्च से जुलाई के बीच Instagram, Facebook और YouTube पर ऑनलाइन कंटेंट को प्रतिबंधित करने के लिए सरकारी एजेंसियों की ओर से भेजे गए निर्देशों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।


खास बात यह है कि इसी अवधि में दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन भी हुआ। यह प्रदर्शन जून की शुरुआत में शुरू हुआ था और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को समाप्त कर दिया गया।

दरअसल, Meta और सरकार के बीच जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो रिस्ट्रिक्ट कर देने के बाद जो विवाद बढ़ा उसका असर अब दिखने लगा है। हांलाकि Meta ने इस मामले में माफी मांग ली है, लेकिन कंपनी पर सरकार का इतना दबाव है कि Meta और X पर पत्रकारों, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और मीडिया संस्थानों के पोस्ट लगातार हटाए जा रहे हैं, अकाउंट सस्पेंड किए जा रहे हैं। लेकिन पोस्ट हटाने या फ्लैग किए जाने के बाद क्या लोगों ने दमन, अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखना-बोलना बंद कर दिया है। अगर सरकार के दबाव में Meta और X इस तरह की कार्रवाई कर रही है तो उन्हें ये अंदाजा हो गया होगा कि दमन के बाद विरोध की आवाज और दोगुने ताकत से बुलंद होती है।

कंटेंट ब्लाक करने में इस तेज बढ़ोतरी को समझने के लिए पिछले साल के आंकड़ों से इसकी तुलना की जा सकती है। द इंडियन एक्सप्रेस को RTI के जरिए मिले रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच Sahyog पोर्टल के माध्यम से 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कुल 2,312 ब्लॉकिंग आदेश भेजे गए थे। यानी उस समय औसतन हर दिन केवल छह आदेश जारी किए जा रहे थे।

हालांकि महीनेवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि ब्लॉकिंग आदेशों का एक “बड़ा हिस्सा” छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान जारी किया गया, खासकर तब जब आंदोलन ने जोर पकड़ना शुरू किया। इनमें विशेष रूप से Instagram से संबंधित आदेश शामिल थे। तीनों प्लेटफॉर्म में Instagram को सबसे ज्यादा सरकारी निर्देश मिले। पांच महीनों के दौरान उसे करीब 1 लाख ब्लॉकिंग आदेश मिले, जो कुल आदेशों के आधे से थोड़ा अधिक हैं।

Facebook को करीब 80,000 ब्लॉकिंग के आदेश मिले, जबकि YouTube को लगभग 15,000 आदेश मिले। इस तरह Meta के स्वामित्व वाले Facebook और Instagram को इन तीनों कंपनियों के लिए जारी किए गए हर 10 में से करीब 9 आदेश ब्लॉकिंग के मिले। ये आंकड़े ब्लॉकिंग आदेशों की संख्या बताते हैं। एक ब्लॉकिंग आदेश में सैकड़ों अलग-अलग पोस्ट, कंटेंट या अकाउंट शामिल हो सकते हैं। इनमें से ज्यादातर आदेश गृह मंत्रालय के Sahyog पोर्टल के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए। यह पोर्टल ब्लॉकिंग नोटिस भेजने के लिए विकसित किया गया है।

गृह मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक पूरे एक साल में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत 1.11 लाख से कुछ अधिक “संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट” को ब्लॉक किया गया था। इसमें Sahyog पोर्टल के जरिए ब्लॉक किया गया कंटेंट भी शामिल था।

ब्लॉकिंग आदेशों की भारी संख्या इस कहानी का केवल एक हिस्सा है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इन आदेशों पर Meta की प्रतिक्रिया है।

द इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि सरकार द्वारा निर्धारित तीन घंटे के भीतर कंटेंट हटाने की समय-सीमा का पालन करने के लिए Meta ने अपने API (Application Programming Interface) को Sahyog पोर्टल के साथ जोड़ दिया है। इसके जरिए सरकारी निर्देशों में फ्लैग किया गया और Sahyog पोर्टल पर अपलोड किया गया कंटेंट Meta के प्लेटफॉर्म से अपने-आप हटाया जा सकता है। इसके लिए कंपनी की ओर से अलग से मानवीय समीक्षा की जरूरत नहीं होती। इस ऑटोमेशन का मतलब है कि Meta के पास आदेश का पालन करने से पहले संबंधित कंटेंट हटाने के निर्देश की समीक्षा करने या उसे चुनौती देने की गुंजाइश नहीं रहती।

सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, Instagram पर चली इस सेंसरशिप कार्रवाई में छात्रों के आंदोलन के समर्थन वाली कई पोस्ट, सरकार की एथेनॉल फ्यूल ब्लेंडिंग नीति की आलोचना करने वाला कंटेंट और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी सामग्री निशाने पर दिखाई दी। इसके अलावा डीपफेक समेत अन्य तरह के कंटेंट पर भी कार्रवाई हुई।

डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि Meta द्वारा अपनाया गया ऑटोमैटिक टेकडाउन सिस्टम चिंताजनक है, क्योंकि कानून के तहत कंपनियों को किसी वैध आदेश की “वास्तविक जानकारी” मिलने के बाद ही कंटेंट हटाना होता है।

दिल्ली स्थित Internet Freedom Foundation के संस्थापक निदेशक और अधिवक्ता अपार गुप्ता ने कहा कि,

अपने-आप टेकडाउन करने वाले API के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं होती। Meta में कोई व्यक्ति आदेश को पढ़ता नहीं है और न ही यह जांचता है कि आदेश निर्धारित रैंक के अधिकारी की ओर से आया है या उसमें संशोधित नियमों के तहत जरूरी कारण दिए गए हैं। उनके मुताबिक, मशीन से मशीन के बीच होने वाली यह प्रक्रिया एक सशर्त कानूनी जिम्मेदारी को बिना किसी शर्त के पालन में बदल देती है।

इनमें से कई आदेश गृह मंत्रालय के Sahyog पोर्टल के जरिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत जारी किए जाते हैं। तीनों सोशल मीडिया कंपनियां इस पोर्टल से जुड़ी हुई हैं। इस प्रावधान के तहत विभिन्न सरकारी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गैरकानूनी मानी गई पोस्ट को प्लेटफॉर्म को हटाना पड़ता है, ताकि यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के संबंध में उन्हें मिलने वाली कानूनी सुरक्षा बनी रहे।

भारत में 60 करोड़ से ज्यादा सोशल मीडिया यूजर हैं। अनुमान है कि देश में हर दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़ से 10 करोड़ तक पोस्ट किए जाते हैं। शीर्ष टेक कंपनियों के लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूजर-बेस वाला बाजार है। हालांकि सोशल मीडिया पर पोस्ट की संख्या और सरकारों की ओर से जारी टेकडाउन नोटिस की संख्या हमेशा एक-दूसरे के अनुपात में हो, यह जरूरी नहीं है।

उदाहरण के लिए,

Meta की नवीनतम ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई-दिसंबर 2025 के बीच कंपनी ने इंडोनेशिया में 2.3 करोड़ से अधिक कंटेंट हटाए, जबकि वहां का यूजर बेस भारत के एक-तिहाई से भी कम है। इसी अवधि में भारत में कंपनी ने 41,000 से अधिक कंटेंट हटाए। हालांकि यह संख्या जनवरी-जून 2025 के बीच ब्लॉक किए गए करीब 28,000 कंटेंट के मुकाबले काफी अधिक थी।

Meta का यह भी कहना है कि जब वह सरकारों और अदालतों से मिले कानूनी अनुरोधों के आधार पर कंटेंट ब्लॉक करता है, तो ज्यादातर मामलों में यूजर्स को यह जानकारी दी जाती है कि किस सरकारी अथॉरिटी के अनुरोध के कारण प्रतिबंध लगाया गया। इस मुद्दे पर Meta और Google को भेजे गए सवालों का खबर प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला। गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी सवालों का जवाब नहीं दिया।

इन संशोधनों में एक विवादास्पद प्रावधान के तहत कंटेंट हटाने की समय-सीमा पहले के 24-36 घंटे से घटाकर महज 2-3 घंटे कर दी गई।