ज्ञानेश कुमार ने बढ़ाई मोदी की मुश्किल, खड़गे बोले -सभी सरकारें भंग की जाएं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि पूरे देश का शासन ऐसी चुनाव प्रक्रिया के आधार पर चल रहा है, जो अवैध है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं को भंग करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में चुनावों की वैधता पर सवाल हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी इसी आधार पर निशाना बनाया। खड़गे ने कहा कि नए चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों यानी ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होने चाहिए।
समाचार एजेंसी यूएनआई के पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने दावा किया कि,
पूरे देश का शासन ऐसी चुनाव प्रक्रिया के आधार पर चल रहा है, जिसे वह अवैध मानते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्रियों के निर्वाचन को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए निर्वाचित सदनों को भंग करने की मांग दोहराई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने ईवीएम के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि इस संबंध में सवाल केवल विपक्ष नहीं उठा रहा, बल्कि “उनके अपने लोग” भी ऐसी बातें कह रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किन लोगों का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने को अपनी प्रमुख मांग बताया।
खड़गे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में भी कई अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में हो रही गलतियां लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं और गरीबों, मजदूरों, कम पढ़े-लिखे लोगों तथा विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के खिलाफ देशभर में आंदोलन जारी रखेगा।
उन्होंने 30 सितंबर को हुई INDIA गठबंधन की बैठक का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 20 दलों और उनके कानूनी प्रकोष्ठों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। खड़गे के अनुसार, बैठक में शामिल सभी पक्षों ने माना कि एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया देश और कमजोर तबकों के हित में नहीं जा रही है। इसी के मद्देनजर साझा आंदोलन आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के सवाल पर खड़गे ने कहा कि,
यदि किसी बूथ से 500 मतदाताओं के नाम निकाल दिए जाएं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे सुनिश्चित होंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अब नाम जोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। उनके मुताबिक, भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग वार्डों, पंचायतों और गांवों में जाकर उन मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए फॉर्म भर रहे हैं, जिनके वोट वे नहीं चाहते।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूची में किसी गलती का सबसे अधिक बोझ गरीब व्यक्ति पर पड़ता है। संपन्न व्यक्ति अपना काम किसी तरह करा सकता है, लेकिन मजदूर या गरीब को दस्तावेज ठीक कराने और नाम दोबारा जुड़वाने के लिए काम छोड़कर दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया का कथित दुरुपयोग युवाओं, दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों को प्रभावित कर रहा है।

खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर एक केंद्रीय मंत्री को शामिल करने से सरकार का प्रभाव बढ़ा है। उनके मुताबिक, पहले प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के साथ मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी चयन प्रक्रिया में संतुलन प्रदान करती थी। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कामकाज से संबंधित कानूनी कार्रवाई से संरक्षण दिए जाने वाले प्रावधान की भी आलोचना की। खड़गे ने दावा किया कि इससे उनकी जवाबदेही कमजोर होती है। हालांकि, उनके बयान में इस संरक्षण के दायरे को लेकर व्यापक आरोप लगाए गए हैं; इन्हें कानून की स्वतंत्र व्याख्या या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
एसआईआर से संबंधित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को क्रमशः 10 और 14 बार पत्र लिखे, लेकिन उनकी आपत्तियों का प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि अधिकारी बाहर खुलकर नहीं बोल सकते, मगर पत्रों के जरिए अपनी चिंताएं स्पष्ट कर चुके हैं।
आंदोलन की अगली कड़ी में खड़गे ने 6 अक्टूबर को नई दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की बात कही। उन्होंने बताया कि,
विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे और राज्यों में भी प्रदर्शन जारी रहेंगे। आगामी चुनावों के बहिष्कार के सवाल पर उन्होंने कोई घोषणा नहीं की। कानूनी रास्ते के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष का काम लोगों को जागरूक करना तथा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाना है।