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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: नई SIT चोर पकड़ने के लिए या बचाने के लिए?

TCN News Desk TCN News Desk | 2h ago
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: नई SIT चोर पकड़ने के लिए या बचाने के लिए?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए गठित दूसरी विशेष जांच टीम अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए पहली एसआईटी रिपोर्ट में तो कुछ नहीं निकला। सारा ठीकरा ट्र्स्ट के स्टाफ पर फोड़ दिया गया और जो बड़े चोर थे वो बेदाग निकल गए या फिर निकाल दिए गए। अब सरकार कह रही है कि चोरी की जांच के लिए गठित दूसरी विशेष जांच टीम (SIT) अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाएगी। SIT मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े कई पहलुओं की भी जांच करेगी। लेकिन अभी भी यह सवाल मुंह बाए खड़ा है कि जो आरोपी पहली एसआईटी रिपोर्ट में बेदाग निकल गए क्या वो दूसरी एसआईटी रिपोर्ट में आरोपी बनाए जाएंगे।

The Deccan Herald की एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस के नेतृत्व वाली एसआईटी ट्र्स्ट से अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकती है और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की हेराफेरी से जुड़े सबूतों का नए सिरे से विश्लेषण करेगी। टीम के जल्द ही अयोध्या जाने की संभावना है। SIT में अयोध्या रेंज के DIG सोमेन बर्मा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं। जांच में एक फॉरेंसिक ऑडिटर और एक अन्य विशेषज्ञ को भी जोड़ा गया है। कहा जा रहा है कि,

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SIT अब तक दर्ज किए गए बयानों और जुटाए गए सबूतों के आधार पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अधिकारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों और चढ़ावे को इकट्ठा करने तथा उसकी गिनती से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी नए सिरे से जांच की जा रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि अपराध में इनमें से किसी की कोई भूमिका थी या नहीं। नई SIT ने पूछताछ के लिए 200 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की जा सकती है।

इस मामले में एफआईआर पहली SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी। पहली SIT का नेतृत्व लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने किया था। पुलिस ने चोरी के सिलसिले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए थे। सूत्रों ने आगे दावा किया कि जांच का दायरा अब मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों पर किए गए खर्च में वित्तीय अनियमितताओं तक बढ़ा दिया गया है।

ये नए घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब ट्रस्ट ने चढ़ावे के प्रबंधन पर निगरानी और कड़ी कर दी है। ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने शनिवार को कहा था कि सोने, चांदी और अन्य चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। 25 जुलाई से चढ़ावे को संभालने की पूरी प्रक्रिया के हर चरण को लगातार वीडियोग्राफी की निगरानी में रखा गया है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाए गए हैं और आठ सदस्यों की एक निगरानी टीम भी तैनात की गई है।

गौरतलब है कि एसआईटी की पहली रिपोर्ट में कहा गया था अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की है, लेकिन उनकी निगरानी करने वाले कुछ लोगों को भी इसके लिए जवाबदेह ठहराया गया है। यह रिपोर्ट 23 जून 2026 को राज्य सरकार के गृह विभाग के प्रभारी अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई थी। मंदिर का संचालन देखने वाले ट्रस्टियों की बैठक में भी इस रिपोर्ट पर चर्चा हुई। रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों और उनके सुपरवाइजरों को धोखाधड़ी के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में दान की गई कीमती वस्तुओं को सुरक्षित तरीके से नहीं रखा गया। केवल उन कुछ वस्तुओं का पता लगाया या उनकी पहचान की जा सकी, जिनका मामला मीडिया में सामने आया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि मंदिर ट्रस्टियों ने न तो चढ़ावे की गिनती की उचित निगरानी की और न ही उस परिसर की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिया, जहां गिनती की जाती थी।

दरअसल, एक समय मंदिर प्रशासन ने एक बैंक के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कुछ कदम उठाए थे, लेकिन उन उपायों को लागू नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बाद में सुरक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर दिया गया। SIT के मुताबिक, इसी लापरवाही के कारण चोरी संभव हुई। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है,

“यह महज तकनीकी या प्रक्रियागत गलती नहीं थी, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही थी, जिसके कारण चोरी/गबन हुआ।”

रिपोर्ट में गिनती करने वाले कर्मचारियों के वेतन का भी जिक्र किया गया है, जो लगभग 20,000 रुपये प्रति माह पर नियुक्त था। साथ ही, मौजूदा विवाद सामने आने से पहले ट्रस्ट द्वारा खुद की गई करीब 78 लाख रुपये की रिकवरी का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में एक जगह कहा गया है, “गिनती प्रबंधन प्रक्रिया को लागू करने, उसकी निगरानी और मॉनिटरिंग के लिए जवाबदेह ट्रस्ट के सभी कर्मचारी/अधिकारी इस गंभीर चूक के लिए जिम्मेदार हैं।इसे “श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में गिनती प्रक्रिया के दौरान उपहार/चढ़ावे की धनराशि की चोरी/गबन” से संबंधित एक “प्रारंभिक रिपोर्ट” के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट प्रारंभिक जांच से अलग कई अन्य मुद्दों और व्यक्तियों की जांच के आधार पर तैयार की जाएगी।