शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया... ठहरिए! हमारे यहां के नहीं ऑस्ट्रेलिया के
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी क्षेत्र की शिक्षा मंत्री यवेट बेरी (Yvette Berry) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी क्षेत्र (Australian Capital Territory - ACT) की शिक्षा मंत्री यवेट बेरी (Yvette Berry) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि जांच आयोग ने उन्हें इस मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी का दोषी नहीं माना था। इसके बावजूद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कैबिनेट छोड़ दी।
यह महज एक संयोग है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के बाद हजारों छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट बंद करने और सरकार की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यवेट बेरी साल 2016 से ACT की उपमुख्यमंत्री थीं और उन्हें भविष्य का संभावित मुख्यमंत्री भी माना जाता था। हालांकि जांच में उनके खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ, फिर भी उन्होंने राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन हमारे यहां के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शायद ही यवेट बेरी से कोई प्रेरणा ले पाएं!
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ABC की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला लगभग 18.2 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपये) के एक सरकारी स्कूल निर्माण ठेके से जुड़ा है। आरोप है कि शिक्षा विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने नियमों में हेरफेर कर एक रियल एस्टेट कंपनी लेंडलीज़ (Lendlease) को फायदा पहुंचाने की कोशिश की।
जांच में सामने आया कि ठेके का मूल्यांकन करने वाली दो अलग-अलग समितियों ने निर्माण कंपनी मैनटीना (Manteena) को सबसे बेहतर बोलीदाता माना था। मैनटीना ने यह काम लेंडलीज़ से लगभग 9 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कम कीमत में करने की पेशकश की थी। इसके बावजूद आखिर में ठेका लेंडलीज़ को दे दिया गया।
ACT इंटीग्रिटी कमीशन ने अपनी जांच में पाया कि शिक्षा विभाग की तत्कालीन महानिदेशक कैटी हेयर (Katy Haire) और शिक्षा मंत्री की पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ जोशुआ सेरामिडास (Joshua Ceramidas) ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया में एक तरह का "पिछला रास्ता" बनाया, जिससे कुछ खास हितों को फायदा पहुंचाया जा सके। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री यवेट बेरी की इस मामले में कोई भूमिका या दोष नहीं मिला।
ACT सरकार के अनुसार, यह जांच मार्च 2021 में शुरू की गई थी। जांच 2019-20 के दौरान कैंपबेल प्राइमरी स्कूल मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी थी।
यह मामला सामने आने के बाद कैनबरा में लोगों में नाराजगी बढ़ गई। लोगों का कहना था कि कम कीमत और बेहतर प्रस्ताव देने वाली स्थानीय कंपनी को बाहर कर दिया गया और महंगी बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका दे दिया गया। बाद में यह भी सामने आया कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों, जिनमें पूर्व शिक्षा महानिदेशक कैटी हेयर भी शामिल थीं, के कानूनी खर्च का भुगतान भी सरकारी पैसे यानी टैक्सपेयर्स के पैसे से किया जा रहा था। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।