Politics

PM CARES Fund में जमा 8,452 करोड़, खर्च हुए सिर्फ 87.85 लाख

Md. Tousif Md. Tousif | 1h ago · 6 min read
PM CARES Fund में जमा 8,452 करोड़, खर्च हुए सिर्फ 87.85 लाख

इस साल फंड से सिर्फ ₹87.85 लाख खर्च किए गए, यानी उस साल की कुल आय का करीब 0.1%।

पीएम केयर्स फंड ने दो साल की देरी के बाद अपनी वेबसाइट पर वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण अपलोड किए हैं। ये दस्तावेज 17 अगस्त को वेबसाइट पर डाले गए। इस विवरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य ये है कि पीएम केयर्स फंड में अब दान देने वाले लोगों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। घरेलू और विदेशी दान में काफी गिरावट आई है। इतना ही नहीं जिस अनुपात से फंड में दान किए गए उस अनुपात में खर्च नहीं किए जा रहे हैं।

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक,

2024-25 में PM CARES Fund की कुल आय ₹1,279.9 करोड़ रही। इसमें चंदे के अलावा बैंक और FD से मिला ब्याज तथा विभिन्न एजेंसियों से वापस आया पैसा भी शामिल है। लेकिन इस साल फंड से सिर्फ ₹87.85 लाख खर्च किए गए, यानी उस साल की कुल आय का करीब 0.1%।

2025 में पीएम केयर्स फंड में घरेलू दान 30% घटकर करीब 479 करोड़ रुपए रहा। विदेशी दान में भी कमी आई है। यह 18% घटकर 92.8 लाख रुपए रह गया है। 2023 में घरेलू दान 681 करोड़ और विदेशी दान 1.13 करोड़ रुपए था। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में फंड में टोटल रकम 7,173 करोड़ रुपए थी। इस फंड में फॉरेन फंडिंग 2020-21 में 495 करोड़ रुपए थी, जो अगले दो वित्त वर्षों में घटकर 40 करोड़ रुपए और 2.57 करोड़ रुपए रह गई है।

2023-24 में विदेशी दान से 1.13 करोड़ रुपए मिले थे। 2024-25 में विदेशी योगदान 92.8 लाख रुपए रहा। यह 2019-20 में मिले 39.7 लाख रुपए के बाद यह सबसे कम डोनेशन रहा। 2023 में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम पर पिछले साल 15.37 करोड़ रुपए खर्च हुए। 2024 में यह रकम 15.6 करोड़ रुपए थी

मार्च 2020 में फंड बनने से लेकर 31 मार्च 2025 तक, फंड ने अपनी कुल आय का सिर्फ 18.7% खर्च किया है।

NCPRI की सह-संयोजक अंजलि भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब फंड में इतनी बड़ी रकम मौजूद है, तो उसका इतना कम इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। कम खर्च के कारण PM CARES Fund का कुल जमा पैसा लगातार बढ़ता गया। 2024-25 के अंत में फंड का बैलेंस 8,452.06 करोड़ था, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 17.8% ज्यादा है।


अंजलि भारद्वाज ने यह भी सवाल उठाया कि,

2024-25 में विभिन्न एजेंसियों ने ₹324 करोड़ वापस किए, लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पैसा किस काम के लिए दिया गया था, किस वजह से वापस आया और किस एजेंसी ने उसे लौटाया।

बता दें कि पीएम केयर्स फंड की स्थापना मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के फैलने के दौरान आपात स्थिति और आपदाओं से निपटने के लिए की गई थी। पहले तीन वर्षों में इस फंड में करीब 13,000 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इनमें से लगभग 3,000 करोड़ रुपये अकेले पहले सप्ताह में जुटाए गए थे। फंड के लिए धन जुटाए जाने के समय सरकार ने कहा था कि इस फंड को कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत मिलने वाली राशि स्वीकार करने की अनुमति है, क्योंकि इसे केंद्र सरकार ने स्थापित किया था। मंत्रियों ने सरकारी कर्मचारियों से वेतन दान करने की ‘अपील’ भी की थी। कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए हर स्कूल जाने वाले बच्चे को सालाना ₹20,000 देने का वादा केंद्र सरकार ने PM CARES Fund की प्रमुख योजनाओं में किया था। लेकिन वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना के लिए सिर्फ 88 लाख जारी किए गए।

सरकार ने इस योजना के 3,383 बच्चों को लाभार्थी बताया है। अगर 88 लाख को इन सभी बच्चों में बांटा जाए तो हर बच्चे के हिस्से में सिर्फ 2,596 रुपये आते हैं, जबकि घोषित सहायता ₹20,000 सालाना है। दरअसल, ये 88 लाख ही 2024-25 में PM CARES Fund से किया गया कुल खर्च था। उस समय फंड में कुल 8,452 करोड़ रुपये मौजूद थे।

इसमें से करीब 93% पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया था। हाल ही में CAG की एक रिपोर्ट में सामने आया कि केंद्र सरकार ने NDRF के तहत भी स्वीकृत पूरी रकम राज्यों को नहीं दी। गंभीर आपदाओं के लिए NDRF से कुल 11,474 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की गई थी, लेकिन राज्यों को सिर्फ 5,356 करोड़ रुपये दिए गए। हालांकि PM CARES और NDRF में अंतर है।

2020 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें मांग की गई थी कि PM CARES की रकम को NDRF में ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि NDRF का CAG ऑडिट होता है। केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि PM CARES का पैसा NDRF में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं है। PM CARES से पहले से ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) मौजूद था, जिसे देश के विभाजन के बाद बनाया गया था। PMNRF भी RTI के दायरे से बाहर है। इसलिए आलोचक सवाल उठाते रहे हैं कि जब PMNRF पहले से मौजूद था तो PM CARES बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। PM CARES Fund की स्थापना के बाद भारत-चीन सीमा पर LAC में तनाव बढ़ने से ठीक पहले कई चीनी कंपनियों ने इस फंड में बड़ी रकम दान की थी।

National Herald की जून 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक TikTok ने 30 करोड़, Xiaomi ने 10 करोड़, Huawei ने 7 करोड़, OnePlus ने 1 करोड़ और Oppo ने 1 करोड़ रुपये चन्दा दिया था(OPPO ने बाद में ये चन्दा PMNRF में देने की बात कही थी)

कर्नाटक के गृहमंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने लिखा है कि,


पीएम केयर्स योजना प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गए सबसे बड़े संस्थागत घोटालों और जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात में से एक है। मोदी सरकार आपातकालीन राहत के नाम पर घरेलू और विदेशी दानदाताओं से पैसा क्यों इकट्ठा कर रही है, जबकि जरूरत के समय इसका इस्तेमाल करने का उसका कोई इरादा नहीं है। इस पोस्ट में उन्होंने कम खर्च पर सवाल उठाए।

वरिष्ठ पत्रकार राजू पारुलेकर ने सवाल उठाए कि,


2019-20 से 2022-23 तक के पहले चार वर्षों के Receipts & Payments (R&P) Accounts पर भी हस्ताक्षर नहीं थे, लेकिन उन दस्तावेजों पर UDIN मौजूद था। तो सवाल है कि 2023-24 और 2024-25 के नए दो खातों में UDIN क्यों नहीं है? जबकि चार्टड अकाउंटेंट के पास UDIN जारी करने के लिए 60 दिन का समय होता है, तो इतने महत्वपूर्ण और चर्चित मामले में CA ने UDIN को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत क्यों जारी नहीं किया? एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और निर्मला सीतारमण व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से यह दावा या समर्थन करते हैं कि PM CARES एक निजी संस्था है, तो फिर सरकारी खजाने से वेतन पाने वाले सचिव, निदेशक, अवर सचिव और यहां तक कि सेक्शन ऑफिसर PM CARES के Receipts & Payments Accounts पर हस्ताक्षर क्यों कर रहे हैं? सवाल यही है कि अगर PM CARES निजी संस्था है, तो उसके वित्तीय दस्तावेजों पर सरकारी अधिकारी किस हैसियत से हस्ताक्षर कर रहे हैं?

पीएम केयर्स फंड को सरकारी फंड नहीं माना गया है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि यह एक चैरिटेबल फंड है और यह सीधे RTI के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, इस फंड और RTI के दायरे पर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। पीएम केयर्स फंड का ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक CAG नहीं करता। एक इंडिपेंडेंट चार्टर्ड अकाउंटेंट इसका ऑडिट करता है। हाल में PMO ने लोकसभा सचिवालय को बताया कि पीएम केयर्स फंड से संबंधित प्रश्न और संसद में किए जाने वाले अन्य हस्तक्षेप लोकसभा की कार्यप्रणाली और कार्य संचालन के नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं।

Md. Tousif

Md. Tousif

मोहम्मद तौसिफ़ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर नजर रखते हैं और ‘द क्रेडिबल हिस्ट्री’ में रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।