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क्या अब एनर्जी ड्रिक Red Bull पर भी लगेगा बैन?

TCN Desk TCN Desk | 07 Aug, 2026 · 5 min read
क्या अब एनर्जी ड्रिक Red Bull पर भी लगेगा बैन?

एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर भारत समेत दुनिया के कुछ नियामकों ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई हैं।

एनर्जी ड्रिंक उद्योग पर बहुत जल्द गाज गिरने वाली है। संभव है युवाओं में लोकप्रिय हो चुके एनर्जी ड्रिक Red Bull पर भी कहीं बैन न लग जाए। दरअसल खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI वैश्विक पेय कंपनियों की उस मांग को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें "एनर्जी ड्रिंक" लेबल हटाने के लिए दी गई 90 दिनों की समय सीमा को बढ़ाकर एक साल करने की मांग की गई है। एक सरकारी सूत्र ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस फैसले से एनर्जी ड्रिंक उद्योग के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।


Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार,

शराब, पेय और खाद्य कंपनियां अपने उत्पादों पर किस तरह के लेबल लगाती हैं इसे लेकर सख्त कार्रवाई की जा रही है। कहा जा रहा है कि पेप्सिको, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेज और मुकेश अंबानी की रिलायंस का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खाद्य नियामक के साथ टकराव चल रहा है।

सरकारी सूत्र के मुताबिक, FSSAI समय सीमा बढ़ाने पर सहमत नहीं होगा, क्योंकि कई राज्यों ने बताया है कि इन पेय पदार्थों का मौजूदा स्टॉक 60 से 90 दिनों में बेचा जा सकता है। सूत्र ने नाम जाहिर करने से इनकार किया क्योंकि यह फैसला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। उद्योग से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, पेय कंपनियों ने इस फैसले को लागू करने के लिए कम से कम एक साल का समय मांगा है, क्योंकि बाजार में उनके लाखों कैन और बोतलें मौजूद हैं या आयातित कैन के ऑर्डर अभी लंबित हैं।

सरकारी अधिकारी ने कहा,

"कंपनियों ने इन्हें एनर्जी ड्रिंक बताकर नियमों का उल्लंघन किया है। उन्हें खुश होना चाहिए कि भारत उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चला रहा है।"

अधिकारी ने आगे कहा, "उन्होंने FSSAI को यह नहीं बताया है कि किस राज्य में उनका कितना स्टॉक पड़ा है, जबकि उत्पादों की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए उन्हें इसका रिकॉर्ड रखना चाहिए।" उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बहुत बड़ी मात्रा में स्टॉक होने के कारण विभिन्न राज्यों में मौजूद माल का हिसाब लगाना मुश्किल है।

FSSAI के साथ ही रेड बुल, मॉन्स्टर और अंबानी की रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया। पेप्सिको ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर दुनिया के कुछ नियामकों ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई हैं। उनकी चिंता है कि,

इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन नामक अमीनो एसिड की मात्रा अधिक होती है। इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए इनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बड़ी पेय कंपनियां भारत सरकार से कुछ राज्य सरकारों द्वारा एनर्जी ड्रिंक्स की जब्ती रोकने की भी मांग कर रही हैं।

पिछले महीने राजस्थान में कार्रवाई के दौरान पेप्सी के स्टिंग, रिलायंस के कैम्पा एनर्जी और रेड बुल के हजारों उत्पाद जब्त किए गए थे। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के खाद्य सुरक्षा कार्यालय ने रॉयटर्स को दिए बयान में कहा कि वहां भी ऐसे उत्पादों का स्टॉक जब्त किया जाएगा। कार्यालय ने कहा, "जिला स्तर पर पहले से चल रहे निरीक्षण अभियान में जब्ती की कार्रवाई स्पष्ट रूप से शामिल है।" साथ ही बताया गया कि खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के पास मौजूद पेय पदार्थों के लेबल की जांच की जा रही है।

यूरोमॉनिटर के मुताबिक, 2017 में पेप्सी द्वारा स्टिंग लॉन्च किए जाने के बाद भारत में इस बाजार ने तेजी से विस्तार किया। 20 रुपये की प्लास्टिक बोतल में मिलने वाला स्टिंग 15 से 19 साल के युवाओं और ग्रामीण इलाकों में खासा लोकप्रिय हुआ।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार,

पेप्सिको, रेड बुल और मॉन्स्टर के अधिकारियों ने मंगलवार को एनर्जी ड्रिंक्स की लेबलिंग को लेकर अपनी चिंताएं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान के सामने रखीं और उनसे समर्थन मांगा। पासवान ने एक्स पर लिखा कि मंत्रालय इस क्षेत्र में "निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन" को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि उन्होंने इस बारे में और विस्तार से जानकारी नहीं दी।

बता दें कि इससे पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने शराब के कई लोकप्रिय ब्रांडों के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई है। इनमें ओल्ड मॉन्क पसंद करने वालों से लेकर मैकडॉवेल्स व्हिस्की के ग्राहकों तक के पसंदीदा ब्रांड शामिल हैं। ओल्ड मॉन्क, मैकडॉवेल्स और रॉयल चैलेंज व्हिस्की के कुछ वैरिएंट समेत रम और व्हिस्की के कई लोकप्रिय ब्रांड FSSAI के जांच के दायरे में आए हैं। इन शराब निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने मौजूदा नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में शुरू की है।

कई कंपनियों के रम और व्हिस्की ब्रांडों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। लैब जांच में इन उत्पादों में बाहरी कृत्रिम या 'नेचर आइडेंटिकल' फ्लेवर पाए जाने के कारण इन्हें निर्धारित मानकों से कम यानी 'सब-स्टैंडर्ड' बताया गया। हालांकि, विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि शराब से संबंधित लागू खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों के तहत प्राकृतिक और प्रकृति के समान यानी 'नेचर आइडेंटिकल' फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति होने की स्थिति निर्विवाद है।