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क्या अब Old Monk भी नहीं पी पाएंगे लोग?

TCN Desk TCN Desk | 2h ago
क्या अब Old Monk भी नहीं पी पाएंगे लोग?

FSSAI ने शराब के कई लोकप्रिय ब्रांडों के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है।

खाने-पीने के सामान, फिर दवा और अब तो शराब पर भी भरोसा नहीं रहा। मिलावटखोरों ने तो शराब को भी नहीं बख्शा और वो भी उन ब्रांड में जो मेहनतकश सर्वहारा समाज का सबसे लोकप्रिय ब्रांड है- ओल्ड मॉन्क ट्रिपल एक्स रम और मैकडॉवेल्स की नंबर वन व्हिस्की।

शराब उद्योग से आई एक इस खबर ने नियमित रूप से शराब पीने वालों और इसके शौकीनों को चौंका दिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने शराब के कई लोकप्रिय ब्रांडों के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इनमें ओल्ड मॉन्क पसंद करने वालों से लेकर मैकडॉवेल्स व्हिस्की के ग्राहकों तक के पसंदीदा ब्रांड शामिल हैं। ओल्ड मॉन्क, मैकडॉवेल्स और रॉयल चैलेंज व्हिस्की के कुछ वैरिएंट समेत रम और व्हिस्की के कई लोकप्रिय ब्रांड FSSAI के जांच के दायरे में आए हैं। इन शराब निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने मौजूदा नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में शुरू की है।


FSSAI के एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया,

"कुछ निर्माता उत्पाद में बाहर से फ्लेवर मिलाते पाए गए हैं, जो उस उत्पाद की प्राकृतिक खुशबू और स्वाद जैसा अहसास देता है। इसके बावजूद वे इसे मानक उत्पाद के रूप में बेचते हैं, जिससे उपभोक्ता गुमराह होते हैं।" बताया गया है कि भ्रामक दावों और अनुमति नहीं दिए गए फ्लेवर के इस्तेमाल के कारण इन उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है।

कई कंपनियों के रम और व्हिस्की ब्रांडों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। लैब जांच में इन उत्पादों में बाहरी कृत्रिम या 'नेचर आइडेंटिकल' फ्लेवर पाए जाने के कारण इन्हें निर्धारित मानकों से कम यानी 'सब-स्टैंडर्ड' बताया गया। हालांकि, विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि शराब से संबंधित लागू खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों के तहत प्राकृतिक और प्रकृति के समान यानी 'नेचर आइडेंटिकल' फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति होने की स्थिति निर्विवाद है।

जिन कंपनियों और उत्पादों पर कार्रवाई हुई है उनमें मेसर्स मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर, खोपोली यूनिट के ओल्ड मॉन्क रम के तीन वैरिएंट द लीजेंड, गोल्ड रिजर्व और XXX मैच्योर्ड रम, मेसर्स यूनाइटेड स्पिरिट्स, बारामती के ब्रांड मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, मेसर्स INBREW बेवरेजेज, मध्य प्रदेश के ब्रांड बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम शामिल हैं। इसके अलावा मेसर्स एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज, मध्य प्रदेश के ब्रांड सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम और मेसर्स यूनाइटेड स्पिरिट्स, मध्य प्रदेश के ब्राडं एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की शामिल हैं।

पेय पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर प्राधिकरण ने ओल्ड मॉन्क XXX रम के एक वैरिएंट पर लिखे "7 Years Old Blended" दावे को भी भ्रामक बताया है। FSSAI के मुताबिक,

इस रम का मुख्य घटक न्यूट्रल स्पिरिट है, जो मैच्योर्ड या एज्ड नहीं है। वहीं, मैच्योर्ड रम स्पिरिट इसमें बहुत कम मात्रा में मौजूद है। जांच में इसकी मात्रा 5 प्रतिशत से भी कम पाई गई।

नियामक संस्था ने कहा, "यह मौजूदा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा और मानक (अल्कोहलिक बेवरेजेज) विनियम, 2018 के मुताबिक किसी ब्लेंडेड स्पिरिट की उम्र का दावा उसमें शामिल सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर किया जाना चाहिए।"

गौरतलब है कि इससे पहले FSSAI ने डाबर इंडिया के कई उत्पादों के खिलाफ एक दिन पहले यानी मंगलवार को प्रतिबंध आदेश जारी किया था। कंपनी को शहद, गाय का घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावों का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। खाद्य नियामक का कहना है कि इस तरह की लेबलिंग भ्रामक है और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करती है।

FSSAI ने डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाद्य तेल समेत कई उत्पादों को ‘100 प्रतिशत’ के दावे के साथ बेचने से प्रतिबंधित कर दिया है। FSSAI के मुताबिक, इस तरह की लेबलिंग कानून के खिलाफ है। सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में FSSAI ने बताया था कि उसने,

डाबर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ उन खाद्य उत्पादों की बिक्री को लेकर प्रतिबंध आदेश जारी किया है, जिन पर भ्रामक तरीके से ‘100 प्रतिशत’ होने का दावा किया गया है। इनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी, नारियल दूध और अन्य उत्पाद शामिल हैं।

उल्लंघनों की जानकारी देते हुए FSSAI ने कहा कि कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे कई खाद्य उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत प्राकृतिक’, ‘100 प्रतिशत शुद्ध’, ‘100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी’, ‘100 प्रतिशत ऑर्गेनिक’ और ‘100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावे पाए गए। खाद्य नियामक ने स्पष्ट किया कि ‘100 प्रतिशत’ जैसे दावों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन है। FSSAI के अनुसार, ऐसे दावे अस्पष्ट हैं, उनकी सत्यता की पुष्टि करना संभव नहीं है और वे उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकते हैं।