क्या सच में संसद में बहस करना चाहते हैं अमित शाह?
किसके आदेश पर पुलिस ने छात्रों पर 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च के दौरान लाठियां चलाईं और पैलेट गन दागे?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के किन सवालों के जवाब के लिए लोकसभा में 24 घंटे तक बहस करना चाहते थे। या फिर वो कहीं इस फिराक में तो नहीं थे कि इस बहाने वो लोकसभा में बहस का कोई नया रिकार्ड रच देते। बता दें कि इससे पहले बहस का रिकार्ड राज्य सभा में बना था जब 3 अप्रैल 2025 को बजट सत्र के समापन के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर कुल 17 घंटे बहस हुई थी। उस समय जगदीश धनखड़ राज्य सभा में सभापति के पद पर आसीन थे। बहस 3 अप्रैल को सुबह 11 बजे शुरू हुई और अगले दिन सुबह 4:02 बजे तक चली थी।
लेकिन बड़ा सवाल है कि विपक्ष ने बस एक सवाल का जवाब मांगा है केंद्रीय गृह मंत्री शाह से। सवाल बिल्कुल सीधा है-
किसके आदेश पर पुलिस ने छात्रों पर 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च के दौरान लाठियां चलाईं, पैलेट गन दागे और लड़कियों के प्राइवेट पार्ट पर डंडे मारे। दिल्ली पुलिस किनके निर्देश पर काम करता है। क्या गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था या नहीं? अगर उन्होंने आदेश दिया था तो वे दोषी हैं और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और अगर नहीं दिया था तो वे अक्षम हैं। दिल्ली पुलिस उनका आदेश नहीं मानती।
जाहिर है बस इस एक-दो सवाल के जवाब के लिए लोकसभा में बहस करने का समय इसलिए मांगा गया कि इस बहाने उन्हें लंबे बहस का रिकार्ड रचने का मौका मिल जाता। क्योंकि बहस में तो सिर्फ इस बात पर चर्चा होती कि Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 क्या है। कदाचार रहित परीक्षा के लिए सरकार कैसे व्यापक सुधार करने जा रही है। मतलब फिर वही पुराना सरकारी राग।
दरअसल, शाह विपक्ष के सवालों से घिर गए हैं। खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जिस तरह उन पर लगातार हमलावर बने हुए हैं, उन्हें जवाब देते नहीं बन रहा है। और जब अब लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज ने भी कंफर्म कर दिया है कि 20 जुलाई को 10 प्रदर्शनकारी छात्रों को पैलेट गन से चोट लगी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था तो फिर अमित शाह संसद में किस बात का दूध का दूध और पानी का पानी करते।
इतना ही नहीं, नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तरफ से दर्ज की गई एक डायरी एंट्री से भी पता चल चुका है कि 20 जुलाई को पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) रैंक के अधिकारी के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन से दो राउंड फायरिंग की गई थी। जाहिर है अमित शाह विपक्ष के सवालों के आगे निरुत्तर हैं और संसद में 24 घंटे भाषण देकर बस देश के लोगों को गुमराह करने का काम करते।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष को संसद में विस्तृत चर्चा में भाग लेने के लिए 24 घंटे का समय देने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं और जरूरत पड़ी तो पूरी रात सदन में मौजूद रहेंगे। हालांकि राहत की बात यह रही कि विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संसद को गुरुवार दोपहर 11 बजे तक स्थगित कर दिया।
संसद के बाहर शाह ने जोर देकर कहा कि,
गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए संसदीय कार्यवाही में स्थापित नियम और प्रक्रियाएं हैं और ऐसे मामलों पर केवल एक संक्षिप्त बयान के जरिए पर्याप्त चर्चा नहीं की जा सकती। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुमति देते हैं तो वह चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह गुरुवार दोपहर 3 बजे तक पूरी बहस के दौरान सदन में बैठने, विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों को नोट करने और उनमें से प्रत्येक का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
शाह के मुताबिक, संसद में विस्तृत चर्चा से देश के सामने तथ्य रखने और इस मुद्दे से जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विपक्ष को यह तय करने की चुनौती भी दी थी कि वह संसद में सार्थक और विस्तृत बहस करना चाहता है या सदन में व्यवधान पैदा करना जारी रखना चाहता है।
20 जुलाई के बाद से लगातार चुप रहना और फिर संसद सत्र समाप्त होने के एक दिन पहले बहस की बात करना साफ़ बताता है कि नीयत चर्चा की नहीं बल्कि मीडिया में यह परसेप्शन बनाने की है कि सरकार तो बहस करना चाहती थी लेकिन विपक्ष तैयार नहीं था।