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20 जुलाई को 10 प्रदर्शनकारियों को पैलेट गेन से लगी थी चोट, अस्पताल ने की पुष्टि

TCN Desk TCN Desk | 11 Aug, 2026 · 4 min read
20 जुलाई को 10 प्रदर्शनकारियों को पैलेट गेन से लगी थी चोट, अस्पताल ने की पुष्टि

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने पुष्ट किया है कि दस प्रदर्शनकारियों को पैलेट गन से चोटें आई थीं।

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने एक आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान दस प्रदर्शनकारियों को पैलेट गन से चोटें आई थीं। अस्पताल ने तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हासिल की गई जानकारी मांगने पर यह जवाब दिया है।

The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोखले ने सोमवार को कहा कि उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से जवाब मिला है, जिसमें बताया गया है कि प्रदर्शन के बाद पैलेट गन से घायल नौ लोगों को अस्पताल लाया गया था। सफदरजंग अस्पताल ने भी 20 जुलाई को पैलेट से घायल होने का एक मामला दर्ज होने की जानकारी दी।


गौरतलब है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ निकाले गए इस मार्च के एक दिन बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था। लेकिन द हिंदू ने रैपिड एक्शन फोर्स की जनरल डायरी में दर्ज एक प्रविष्टि का हवाला देते हुए 28 जुलाई को रिपोर्ट किया था कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के आदेश पर आरएएफ के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई थी। यह घटना दिल्ली में निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का पहला रिपोर्ट किया गया मामला था। फायरिंग में घायल हुए दो लोगों, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूर ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तरफ से दर्ज की गई एक डायरी एंट्री से भी पता चला था कि 20 जुलाई को पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) रैंक के अधिकारी के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन से दो राउंड फायरिंग की गई थी। The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को दोपहर 1:24 बजे जनरल डायरी में इस संबंध में एंट्री किया गया था। डायरी एंट्री से पता चला है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को काबू करने के लिए DCP के आदेश पर, RAF के डिप्टी कमांडेंट ने एंटी-रायट गन से 55 राउंड नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 राउंड इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड और प्लास्टिक पेलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस से दो राउंड फायरिंग की।

गोखले ने एक्स पोस्ट में कहा कि,

उन्हें अभी भी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और राम मनोहर लोहिया अस्पताल से जवाब का इंतजार है। “यह कैसी मजाक बन चुकी लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जहां पुलिस पैलेट गन का इस्तेमाल करती है, इसके बारे में झूठ बोलती है और फिर सवाल किए जाने पर पीड़ितों की संख्या बताने से भी इनकार कर देती है,”

गोखले ने सोशल मीडिया पर लिखा कि,

उन्होंने यह भी सवाल किया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए लोगों की पुष्ट संख्या अब तक क्यों जारी नहीं की है।

गोखले ने कहा,

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल अपने निजी माफिया की तरह करते रहे हैं। और अब वह संसद से छिप रहे हैं।” दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं।

विपक्षी दलों ने मांग की है कि गृह मंत्री अमित शाह युवा प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर संसद में बयान दें। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कहा कि शाह कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने के लिए तैयार हैं, बशर्ते विपक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा न डाले।

बता दे कि छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन 6 जून को जंतर-मतंर पर शुरू हुआ था। पहले यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले शुरू हुआ था। लेकिन बाद में यह एक स्वत स्फूर्त छात्रों और जेन जी के देशव्यापी आंदोलन में तब्दील हो गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित कुप्रबंधन को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। 20 जुलाई को हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इससे दो दिन पहले पुलिस ने तीन सप्ताह से भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल पहुंचाया था।

संसद की ओर बढ़ रहे मार्च पर पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के बाद कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस कार्रवाई के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन हुए। धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।