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जंतर-मंतर पर कहां से आया था पत्थरों से भरा ट्रक?

TCN News Desk TCN News Desk | 1h ago
जंतर-मंतर पर कहां से आया था पत्थरों से भरा ट्रक?

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जंतर-मंतर पर पत्थरों से भरा ट्रक दिल्ली पुलिस के कब्जे में था।

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक स्वतंत्र न्यूज वेबसाइट Newslaundry के अनुसार, प्रदर्शन से चार दिन पहले ही रजिस्ट्रेशन नंबर HR63 E 6865 वाले इस ट्रक को सड़क हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने जब्त किया था। Newslaundry की जांच में पाया गया कि इसी रजिस्ट्रेशन नंबर के ट्रक में पत्थर भरा हुआ जंतर-मंतर पर देखा गया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस आरोप को निराधार बताया है।

रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद दिल्ली पुलिस ने X पर सफाई जारी की। पुलिस ने कहा कि 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ट्रक को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। पुलिस ने यह भी कहा कि ट्रक को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी कथित साजिश से जोड़ने वाले सभी दावे पूरी तरह निराधार हैं।

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बता दें कि 20 जुलाई की सुबह करीब 6:30 बजे अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया था "जंतर-मंतर पर पत्थरों से भरे ट्रक खड़े किए गए हैं। पुलिस आखिर क्या करने की तैयारी कर रही है? क्या शांतिपूर्ण CJP प्रदर्शनकारियों पर पत्थरबाजी करवाने की साजिश रची जा रही है?"


न्यूजलॉन्ड्री की की जांच के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सड़क हादसे के मामले में जिस ट्रक को जब्त किया था उससे संबंधित एफआईआर भी दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार, 16 जुलाई सुबह 4:15 बजे फिरोजशाह रोड-कस्तूरबा गांधी मार्ग चौराहे पर इस ट्रक ने लापरवाही से चलते हुए एक मारुति ईको (HR43 D 9778) को टक्कर मार दी थी। हादसे में वैन में सवार सात लोग घायल हुए थे। इसके बाद दोनों वाहनों को संसद मार्ग थाने ले जाया गया, जहां उन्हें मलकाना (जब्त सामान रखने वाला विभाग) की निगरानी में रखा गया।

रिपोर्ट के अनुसार,

अगले कुछ दिनों में इस ट्रक को कम से कम चार बार अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। पहले इसे प्रदर्शन स्थल के पास लाया गया, फिर भलस्वा ले जाकर खाली किया गया। इसके बाद इसे रायसीना रोड स्थित भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) कार्यालय के बाहर खड़ा किया गया और फिर वहां से भी हटा दिया गया।

हालांकि संसद मार्ग थाने के अधिकारियों ने ट्रक को लेकर अलग-अलग दावे किए। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ट्रक पहले थाने के बाहर खड़ा था। लेकिन 20 जुलाई की सुबह इसका वीडियो वायरल होने के बाद इसे भलस्वा ले जाकर खाली कराया गया और फिर वापस लाकर खड़ा कर दिया गया।

वहीं, मामले के जांच अधिकारी मोहित भाटी ने कहा कि प्रदर्शन के कारण थाने में जगह कम थी, इसलिए ट्रक को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। लेकिन वह यह नहीं बता सके कि ट्रक युवा कांग्रेस कार्यालय के बाहर कैसे पहुंचा।

जबकि संसद मार्ग थाना प्रभारी (SHO) नीरज कुमार ने इससे अलग दावा किया। उन्होंने कहा कि ट्रक को 19 जुलाई, यानी प्रदर्शन से एक दिन पहले ही खाली कर दिया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पुराने हैं।पुलिस अधिकारियों के इन तीनों बयानों में विरोधाभास है। अगर ट्रक 19 जुलाई को ही खाली हो गया था, तो 20 जुलाई की सुबह वह पत्थरों से भरा कैसे दिखाई दिया? और अगर उसे 20 जुलाई को वीडियो वायरल होने के बाद खाली किया गया, तो SHO का दावा सही कैसे माना जाए?

25 जुलाई को भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें यही ट्रक रायसीना रोड स्थित उनके कार्यालय के बाहर खड़ा दिखाई दिया। बाद में शिकायतों और पुलिस से बहस के बाद दोपहर में उसे वहां से हटाया गया।

दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा,

यह ट्रक पिछले चार दिनों से हमारे कार्यालय के बाहर खड़ा था। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन तीन दिन बाद जाकर इसे हटाया गया।" उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध वाले इलाके में यह वाहन आखिर कैसे पहुंचा और कई दिनों तक वहीं क्यों खड़ा रहा।

हालांकि संसद मार्ग थाने के कर्मचारियों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उस वैन समेत कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया था। लेकिन पुलिस की अपनी एफआईआर कुछ और कहानी बताती है। उसमें दर्ज है कि यह वही मारुति ईको थी, जो 16 जुलाई के सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हुई थी।

वैन के मालिक के रिश्तेदार चरण सिंह ने कहा, "मैंने अपनी गाड़ी जहां खड़ी की थी, वहां और भी कई क्षतिग्रस्त वाहन थे। अभी यह जिस जगह खड़ी है, वहां हमने इसे नहीं रखा था।" इस बीच मलकाना में तैनात एक पुलिसकर्मी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ट्रक फिलहाल कालीबाड़ी मार्ग स्थित ट्रैफिक पिट में है। लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री जब वहां पहुंची, तो ट्रक वहां मौजूद नहीं था।