यह एनालॉग पनीर आखिर क्या बला है?
महाराष्ट्र, गुजरात में एनालॉग पनीर के बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा है।
अगर आपको पनीर टिक्का और पनीर बटर मसाला ऑर्डर करना पसंद है, तो जरा ठहर जाइए। कहीं आप पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर तो नहीं ऑर्डर कर रहे हैं। आखिर यह एनालॉग पनीर क्या बला है। आपको यह जानना जरूरी है कि महाराष्ट्र सरकार ने सभी होटलों और रेस्तरां में गैर-मानकीकृत एनालॉग पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाने का फैसला क्यों किया है।
The Telegraph के अनुसार, बता दें कि महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला देते हुए 30 जुलाई 2026 को इस संबंध में गजट आदेश जारी किया। यह कार्रवाई उन लैब रिपोर्टों के बाद की गई है, जिनमें सामने आया कि हाल में महाराष्ट्र से लिए गए पनीर के नमूनों में 35 प्रतिशत से अधिक गुणवत्ता जांच में फेल हो गए। इनमें वनस्पति वसा की मिलावट पाई गई थी।
इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर एनालॉग पनीर क्या होता है, क्या यह नकली पनीर जैसा ही है और क्या इसे खाने से स्वास्थ्य को कोई खतरा हो सकता है? IANS के अनुसार, गुजरात सरकार ने भी गैर-मानकीकृत एनालॉग पनीर, चीज़ और मक्खन के उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने इसके पीछे सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और राज्य के डेयरी क्षेत्र को बचाने का हवाला दिया है।
एनालॉग पनीर ताजा, घर में बने या डेयरी पनीर से काफी अलग होता है। ताजा पनीर दूध को नींबू के रस या सिरके से फाड़कर बनाया जाता है। वहीं एनालॉग पनीर तैयार करने के लिए पाम ऑयल या सस्ती वनस्पति वसा और फूड एडिटिव्स जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका टेक्सचर, रूप और स्वाद असली पनीर जैसा लग सकता है, लेकिन यह एक सस्ता और अस्वास्थ्यकर विकल्प है, जिसमें पोषण लगभग न के बराबर होता है।
हैरानी की बात है कि बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि एनालॉग पनीर बनाने में वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। ताजा पनीर की तुलना में इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और कैल्शियम भी कम मिलता है। एनालॉग पनीर एक कृत्रिम विकल्प है, जिसे असली दूध से बने पनीर जैसा दिखने, महसूस होने और स्वाद देने के लिए तैयार किया जाता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और उपभोक्ताओं को धोखे से बचाने के लिए भारत के कई राज्यों ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इस दिशा में कदम उठाने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बना, जिसके बाद महाराष्ट्र और गुजरात ने भी कार्रवाई की। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 1 अगस्त को राज्य के सभी बाजारों, होटलों और ढाबों में एनालॉग पनीर, क्रीम और मक्खन के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। यह प्रतिबंध एक साल तक या FSSAI की अंतिम गाइडलाइंस लागू होने तक प्रभावी रहेगा।
5 अगस्त को महाराष्ट्र ने एनालॉग पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, भंडारण, वितरण और खुदरा बिक्री पर एक साल के लिए सख्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इसी दिन गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने भी एनालॉग पनीर, एनालॉग चीज़ और एनालॉग मक्खन पर पूरे राज्य में व्यापक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। राज्य सरकारों का यह फैसला मुनाफे के लिए चल रहे एक व्यवस्थित और देशव्यापी खाद्य घोटाले की ओर इशारा करता है।
पारंपरिक पनीर एक मानकीकृत डेयरी उत्पाद है, जिसे केवल ताजे दूध को फाड़कर बनाया जाता है। इसके विपरीत, एनालॉग पनीर में महंगे दूध के फैट की जगह हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उत्पादन लागत आधे से भी कम हो जाती है।पिछले एक साल के दौरान खाद्य नियामकों की निगरानी और जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं। बड़े शहरों में जांचे गए पनीर के नमूनों में से एक-तिहाई से अधिक सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में दूध के फैट की जगह वनस्पति वसा और ऐसे बाइंडिंग एजेंट पाए गए, जिनके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी।
होटल, कैटरर्स और क्लाउड किचन लोकप्रिय व्यंजनों में नियमित रूप से सिंथेटिक पनीर का इस्तेमाल करते रहे, लेकिन मेन्यू या बिल में इसकी जानकारी नहीं दी गई। सबसे बड़ा डर यह रहता है कि ताजा पनीर और एनालॉग पनीर में फर्क करना मुश्किल होता है। बड़ी मात्रा में खुला और बिना लेबल वाला एनालॉग पनीर बिना बिल, बैच नंबर या निर्माता की जानकारी के एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया गया। इससे यह पता लगाना लगभग असंभव हो गया कि वह कहां और किसने बनाया था।
सस्ते नकली उत्पाद के लिए पूरी कीमत चुकाना केवल आर्थिक धोखाधड़ी का मामला नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खाद्य नियामकों ने चेतावनी दी है कि एनालॉग पनीर में प्राकृतिक डेयरी प्रोटीन लगभग नहीं के बराबर होता है। इसमें पाम ऑयल और हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ट्रांस फैट और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जुड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं। यह खतरा खास तौर पर उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो नियमित रूप से रेस्तरां में पनीर खाते हैं और मानते हैं कि वे एक सेहतमंद और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ खा रहे हैं। इसके अलावा, गैर-डेयरी वसा और स्टार्च को अनियमित इकाइयों में गलत तरीके से प्रोसेस करने से अक्सर बैक्टीरिया का संक्रमण हो सकता है, जिससे खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद इंसानों के खाने के लिए असुरक्षित हो सकते हैं।