बिहार में छात्रों को टारगेट कर AK 47 से चलाई गई थीं गोलियां ?
वीडियो में दिख रहा है कि कास्टेबल ने जो गोलियां दागी थीं वो हवाई फायरिंग बिल्कुल नहीं है। यह सीधे छात्रों को टारगेट करके चलाई गई गोली है।
क्या सीवान में सचमुच आत्मरक्षा के लिए कांस्टेबल ने एके 47 से हवाई फायरिंग की थी, या बिहार सरकार अपने अफसरों को बचा रही है? बिहार के एक सीनियर जर्नलिस्ट पुष्यमित्र ने दावा किया है कि एके 47 से कांस्टेबल ने छात्रों को टारगेट करके गोलियां चलाई थी। पुष्यमित्र ने वो वीडियो भी साझा किया है जो हर जगह सर्कुलेट भी हो रहा है। इस वीडियो से साफ है कि कांस्टेबल ने चार नहीं आठ गोलियां चलाई थी। इस बात को बीबीसी हिंदी ने भी रिपोर्ट भी किया था, जिसका बिहार सरकार और बिहार पुलिस ने अभी तक खंडन नहीं किया है।
मंगलवार को बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया कि सीवान में एके 47 गोलीकांड की वजह कांस्टेबल का प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंस जाना था। उसने आत्मरक्षार्थ एके 47 से चार गोलियां हवा में चलाई थी। हालांकि उस पर कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया गया है। मगर अदालत में दिया गया यह हलफनामा क्या सचमुच सही है?
पुष्यमित्र ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा है कि,
दूसरी बात कास्टेबल ने जो गोलियां दागी थीं वो हवाई फायरिंग बिल्कुल नहीं है। यह सीधे छात्रों को टारगेट करके चलाई गई गोली है। वीडियो में साफ नजर आ रहा है और आत्मरक्षा का कितना मामला है, यह भी देखिये। फिर सरकार सुप्रीम कोर्ट में झूठ क्यों बोल रही है?
बता दें कि इस पूरे मामले में पुलिस मैनुअल का घोर उल्लंघन हुआ है और प्रदर्शनकारी भीड़ से निपटने का तरीका भी गलत है। हालांकि सरकार ने इस बात को स्वीकार किया और डीजीपी ने नए हिदायत जारी किए हैं। सीवान के एसपी पूरन कुमार झा को लाइन हाजिर भी किया गया है। मगर सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्यों झूठ बोल रही है।
एक तथ्य जो सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया कि एके 47 से चली गोली से कोई घायल नहीं हुआ। मगर एक घायल बुलेट कुमार गौंड के परिजन कहते हैं कि बुलेट को एके 47 की गोली लगी है। उसके जांघ को चीरती हुई गोली निकली और उसकी जांघ की हड्डी फ्रैक्चर हो गई। बता दें कि इसी मुद्दे पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद राजभवन मार्च निकाल रहा है, वह जांच की मांग कर रहा है। देखिये, आगे सरकार क्या फैसला करती है।
बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जिला खुफिया इकाई (DIU) में तैनात एक कांस्टेबल ने 25 जुलाई को सीवान में प्रदर्शनकारियों की भीड़ में फंसने के बाद अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए थे। विभिन्न दलों द्वारा बुलाए गए बंद के बाद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। राज्य में ‘जंतर-मंतर’ आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के बीच यह घटना हुई। हालांकि, पुलिस के मुताबिक इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) के. सुहिता अनुपम ने कहा,
25 जुलाई 2026 को सीवान में AISA और RYA (CPI-ML की छात्र और युवा इकाई) के प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में जमा हुए और जेपी चौक की ओर मार्च करने लगे। दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। मैरवा रोड और गोपालगंज रोड से आए उपद्रवी भी पथराव करने वालों में शामिल हो गए।”
हलफनामे के मुताबिक, पथराव में सीवान के पुलिस अधीक्षक समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें दो अनुमंडल पुलिस अधिकारी, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल शामिल थे। हिंसा के दौरान पुलिस की दो गाड़ियों और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचा। कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। इन घटनाओं को लेकर 82 लोगों के खिलाफ छह FIR दर्ज की गईं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
11 अगस्त को दाखिल हलफनामे में आगे कहा गया कि मौके पर तैनात पुलिस बल पर्याप्त नहीं था, इसलिए अलग-अलग शाखाओं और पुलिस लाइन में तैनात अधिकारियों एवं कर्मियों को अतिरिक्त बल के रूप में बुलाया गया। जेपी चौक के पास जिला खुफिया इकाई (DIU) में कार्यरत एक कांस्टेबल भीड़ में फंस गया और उसने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। पुलिस के अनुसार, इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि जेपी चौक से करीब 1.5 से 2 किलोमीटर दूर हाथी चौक पर एक अन्य असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्तौल से दो राउंड फायर किए। घटनास्थल से .315 बोर के दो खाली कारतूस और 7.65 mm का एक खाली कारतूस बरामद किया गया।
इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं। हलफनामे के अनुसार, उन्हें सीवान के सदर अस्पताल में इलाज दिया गया और बेहतर उपचार के लिए तुरंत पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। चोटें ठीक होने के बाद सभी घायलों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राज्य पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को लगी चोटें AK-47 से नहीं हुई थीं और घायल प्रदर्शनकारी उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे, जहां कांस्टेबल ने AK-47 से फायरिंग की थी। पुलिस के मुताबिक, गोली किस हथियार से चली, कितनी दूरी से और किस कोण से फायर की गई, यह पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच की जा रही है।
हलफनामे में कहा गया कि,
AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को “अनुचित आचरण” के लिए निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि “AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों में किया जाना चाहिए, कानून-व्यवस्था की सामान्य परिस्थितियों में नहीं।” पुलिस महानिदेशक ने 1 अगस्त को AK-47 के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया कि इस तरह के आदेश पहले भी जारी किए जा चुके हैं।