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अमेरिका की ट्रेजरी ने यूरो बेचकर 5 से 10 अरब डॉलर का जापानी येन खरीदा

TCN News Desk TCN News Desk | 2h ago
अमेरिका की ट्रेजरी ने यूरो बेचकर 5 से 10 अरब डॉलर का जापानी येन खरीदा

फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क ने अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से यूरो बेचकर येन खरीदा

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट बैठक के दौरान एक ऐसी टू-डू लिस्ट कैमरे में कैद हो गई, जिससे संकेत मिलता है कि वह 5 से 10 अरब डॉलर के जापानी येन खरीदने पर विचार कर रहे थे। कैंप डेविड में हुई बैठक के दौरान ली गई रॉयटर्स की एक तस्वीर में यह नोट साफ दिखाई दिया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बैठक के उस हिस्से के दौरान, जिसे मीडिया के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा था, बेसेंट के कंधे के ऊपर से ली गई तस्वीर में कैंप डेविड का एक नोटपैड दिखाई देता है।

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इस पर रेखांकित शब्दों में “To Do” लिखा था और उसके नीचे लिखा था— “Buy Japanese Yen (JPY) $5-10 bil.” यानी 5 से 10 अरब डॉलर के जापानी येन खरीदें नोटपैड पर इसके अलावा कुछ और लिखा हुआ दिखाई नहीं देता। कैंप डेविड की कॉन्फ्रेंस टेबल पर बेसेंट के नाम का कार्ड भी नोटपैड के ठीक ऊपर दिखाई दे रहा है। यह तस्वीर सुबह 11:33 बजे अमेरिकी समय (15:33 GMT) पर ली गई थी।

बता दें कि अमेरिकी ट्रेजरी ने शुक्रवार को कमजोर पड़ती जापानी मुद्रा येन को सहारा देने के लिए येन की खरीदारी की फाइनेंशियल टाइम्स (FT) ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। एक दशक से भी ज्यादा समय बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने जापान के साथ मिलकर येन को मजबूत करने के लिए इस तरह का हस्तक्षेप किया है। येन फिलहाल करीब 40 साल के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है।


FT ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क ने अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से यूरो बेचकर येन खरीदा। यह लेन-देन Goldman Sachs और Morgan Stanley के जरिए किया गया। हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि कुल कितनी रकम के येन खरीदे गए। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी ने कई बैंकों को सूचित किया था कि वह येन के बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है और बैंकों को"भविष्य की कार्रवाई के लिए तैयार रहने" को कहा गया था। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने Reuters को यह जानकारी दी। इसी बीच Camp David में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के नोटपैड की Reuters द्वारा ली गई तस्वीर भी चर्चा में आ गई।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने नोटपैड में लिखी बातों पर टिप्पणी के लिए रॉयटर्स के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले येन की कीमत को सहारा देने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बाजार में हस्तक्षेप किया था। इससे पहले शुक्रवार सुबह, तस्वीर लिए जाने से करीब दो घंटे पहले, रॉयटर्स ने मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से बताया था कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कई बैंकों को सूचित किया था कि वह शुक्रवार को येन के बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

शुक्रवार को इससे पहले टोक्यो में जापानी अधिकारियों ने भी येन को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया था। इसके बाद सुबह के कारोबार के दौरान जापानी मुद्रा में डॉलर के मुकाबले काफी मजबूती देखने को मिली। शुक्रवार देर दोपहर भी डॉलर के मुकाबले येन में एक और बड़ी मजबूती दिखाई दी। LSEG के आंकड़ों के मुताबिक,

शाम करीब 4:14 बजे एक डॉलर की कीमत लगभग 158.9 येन थी, जो शाम 5 बजे से ठीक पहले गिरकर करीब 157.6 येन रह गई। यानी डॉलर में येन के मुकाबले लगभग 0.8 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 2011 के बाद से येन को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप नहीं किया है।

2011 में जापान में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के बाद अमेरिका ने अन्य G7 देशों के साथ मिलकर जापानी मुद्रा को स्थिर करने के लिए संयुक्त कार्रवाई की थी। अमेरिकी ट्रेजरी ने FT की रिपोर्ट और Bessent के नोटपैड की तस्वीर पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। न्यूयॉर्क फेड और Morgan Stanley की ओर से भी तुरंत कोई जवाब नहीं आया, जबकि Goldman Sachs ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इस बीच Kyodo News ने शनिवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि जापान और अमेरिका अगले सप्ताह की शुरुआत में येन की कमजोरी से निपटने के लिए एक संयुक्त नीति की घोषणा कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोषणा का मकसद जापानी मुद्रा पर दबाव डालने वाली सट्टेबाजी के खिलाफ बाजार को चेतावनी देना और मुद्रा बाजार में स्थिरता लाना होगा। इससे पहले अमेरिका ने आखिरी बार 2011 में सीधे तौर पर येन को समर्थन दिया था उस समय जापान में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के बाद बाजारों को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने G7 देशों के साथ मिलकर हस्तक्षेप किया था