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होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेव पर बढ़ी टेंशन, शुल्क वसूलने की तैयारी में हूती

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Md. Tousif | 1h ago
होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेव पर बढ़ी टेंशन, शुल्क वसूलने की तैयारी में हूती

यमन के हूती संगठन ने लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाज़ों पर शुल्क लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

यमन के हूती संगठन ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री मोर्चा खोलने के बाद अब लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाज़ों पर शुल्क लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में क्षेत्रीय सूत्रों ने Reuters को बताया कि हूती नेतृत्व बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजरने वाले अधिकांश जहाज़ों पर शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब लागू किया जाएगा।

20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। हूतियों का कहना है कि यह कदम यमन पर सऊदी "घेराबंदी" के जवाब में उठाया गया है, जबकि सऊदी अरब ने इस आरोप को खारिज किया है। इस घोषणा के बाद लाल सागर में तनाव तेजी से बढ़ गया और हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी जहाज़ों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

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बाब अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक, इस महीने शुरुआत पूर्व ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई के जनाज़े में शामिल होने आए हूती अधिकारियों ने यात्रा के दौरान वहां के अधिकारियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी। उसी दौरान यह विचार सामने आया कि बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाज़ों पर शुल्क लगाने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाए। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि ईरानी सलाहकार हूती अधिकारियों को ऐसी संभावित व्यवस्था तैयार करने में तकनीकी और प्रशासनिक सलाह भी दे रहे हैं। हालांकि इस पर ईरान या हूतियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Reuters से बात करने वाले सूत्रों का कहना है कि इस योजना का एक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था को सामान्य बनाना और दूसरा अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाना है। एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस प्रस्ताव के तहत चीनी जहाज़ों को शुल्क से छूट दी जा सकती है। इससे पहले भी Reuters ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चीन और हूतियों के बीच लगातार बातचीत चल रही जिनका उद्देश्य चीनी जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना था। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की प्रस्तावित विदेश मंत्री अफराह अल-जौबा ने Reuters से कहा कि,

यदि हूती लाल सागर पर अपना प्रभाव बढ़ाने में सफल होते हैं तो वे जहाज़ों से शुल्क वसूलने की कोशिश जरूर करेंगे। वहीं पश्चिमी राजनयिकों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ तो खाड़ी देशों और यूरोप की ओर से इसका कड़ा विरोध होगा।

Reuters की एक और रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब लाल सागर में जहाज़ों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। इस प्रस्ताव पर कई देशों के साथ बातचीत चल रही है, हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इस गठबंधन में कौन-कौन से देश शामिल होंगे।

लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब अल-मंदेब का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यदि यह मार्ग बाधित होता है तो सऊदी अरब के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का एक महत्वपूर्ण विकल्प भी कमजोर पड़ जाएगा। लंबे समय से होर्मुज़ में तनाव बना हुआ है और यदि दोनों समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इसी बीच, कल सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। अमेरिकी न्यूज वेबसाईट Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर संयुक्त अमेरिकी-सऊदी हमलों के बाद सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद ने कहा कि,

हालिया सैन्य कार्रवाई के बावजूद सऊदी अरब अब भी ईरान के साथ तनाव कम करने का पक्षधर है और क्षेत्र में व्यापक युद्ध से बचना चाहता है।

लाल सागर में समुद्री व्यापार पहले ही पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। नवंबर 2023 में गाज़ा युद्ध के दौरान हूतियों ने फिलिस्तीन के समर्थन का हवाला देते हुए व्यापारी जहाज़ों पर हमले शुरू किए थे। ये हमले पिछले वर्ष गाज़ा युद्धविराम के बाद कुछ समय के लिए रुके थे, लेकिन अब सऊदी अरब के खिलाफ घोषित नई समुद्री नाकेबंदी के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। पिछले सप्ताह सऊदी अरब के जिज़ान बंदरगाह के पास एक सऊदी तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिसकी जिम्मेदारी हूतियों ने ली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाब अल-मंदेब में नया शुल्क लागू होता है या जहाज़ों की आवाजाही और अधिक प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार, बीमा लागत और समुद्री परिवहन की कीमतों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।