पेपर लीक के खिलाफ संसद मार्च में तनाव, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में; सोनम वांगचुक ने रखीं तीन शर्तें,CJP प्रतिनिधि जेपी नड्डा से मिलने रवाना
CJP प्रोटेस्ट जंतर-मंतर नई दिल्ली
नई दिल्ली: पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को संसद मार्च के दौरान तनावपूर्ण हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक संसद की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने मार्च की अनुमति न होने का हवाला देकर उन्हें रोक दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बैरिकेडिंग के पास पुलिस ने बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं और कुछ प्रदर्शनकारियों के सिर भी फट गए। हालांकि दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज की बात से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को केवल प्रतिबंधित क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोका गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
सुबह से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जुटने लगे थे। भीड़ बढ़ने के बाद कई प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर संसद मार्ग की ओर जाने की कोशिश की। कुछ लोग संसद मार्ग थाने के पास तक पहुंच गए, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
आंदोलन का असर दिल्ली मेट्रो पर भी दिखाई दिया। सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार कुछ समय के लिए बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों के मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने और अलग-अलग रास्तों से संसद की ओर बढ़ने के कारण मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
मौके पर दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी तैनात किए गए। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संसद मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाना था और आंदोलन को पुलिस कार्रवाई से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और युवा बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा।
CJP की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक के मामलों में जिम्मेदारी तय करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन अब तक किसी बड़े अधिकारी या मंत्री की जवाबदेही तय नहीं हुई।
दूसरी ओर, पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं। पहली, सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी, CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद में जाकर अपनी बात रखने की अनुमति मिले और सांसद इन मुद्दों को सदन में उठाने का भरोसा दें। तीसरी, यदि उनके स्वास्थ्य के कारण प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात संभव न हो, तो सांसद सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यह आश्वासन दें।
इसी बीच, सोनम वांगचुक के साथ भूख हड़ताल कर रहे AISA के तीन छात्र नेताओं ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। अभिनेता शबाना आजमी, प्रकाश राज और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने उन्हें पानी पिलाकर अनशन खत्म कराया। हालांकि आंदोलन से जुड़े संगठनों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा।
सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया
आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के बीच सरकार की ओर से बातचीत की पहल भी सामने आई। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सुबह 11 बजकर 52 मिनट पर X पर बताया कि सरकार ने संगठन से बातचीत के लिए संपर्क किया है।
उन्होंने लिखा कि वे आशुतोष रांका के साथ CJP की ओर से जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। सौरव दास ने कहा, “हमारी मांगें स्पष्ट हैं और युवा बड़ी संख्या में जुटे हैं। हम जीतेंगे।”
अब आंदोलन की आगे की दिशा काफी हद तक इस बैठक के नतीजे पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने CJP की किन मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है और बैठक में कोई ठोस फैसला हुआ है या नहीं।