Politics

TCN Exclusive: सात दिन बीत गए, झारखंड में जमीन धँसने से प्रभावित परिवारों को नहीं मिली राहत

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 4 min read
TCN Exclusive: सात दिन बीत गए, झारखंड में जमीन धँसने से प्रभावित परिवारों को नहीं मिली राहत

सात दिन पहले धँसी थी ज़मीन, झारखंड सरकार से अब तक राहत नहीं

धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र स्थित छाताबाद में 7 अगस्त को जमीन धँसने के सात दिन बाद भी प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बरकरार हैं। करीब 20 घर जमींदोज होने के बाद इलाके में अब भी दहशत का माहौल है। कई परिवार अपने घरों में ताला लगाकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन ने अभी तक किसी तरह की राहत नहीं पहुंचाई है और आम लोगों में भारी आक्रोश है।


इस घटना में 15 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद इलाके में कई स्थानों पर जमीन फट गई है और घरों का मलबा बिखरा पड़ा है। जमीन धँसने से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके मजबूत मकान पल भर में धरती में समा गए, जिससे उनका घरेलू सामान और वर्षों की जमा पूंजी भी बर्बाद हो गई, लेकिन सरकार किसी तरह की मदद करने की जगह मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने स्थानीय अवैध खनन को इस घटना का प्रमुख कारण बताया है। उनका कहना है कि इसमें सत्ता और प्रशासन से जुड़े लोगों की मिलीभगत है, इसीलिए सरकार चुप है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के सात दिन बीत जाने के बावजूद बीसीसीएल और जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए अब तक कोई स्थायी राहत व्यवस्था नहीं की गई है। न तो पर्याप्त राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और न ही परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाया गया है। लोगों का कहना है कि वे अपने घरों में लौटने की स्थिति में नहीं हैं और खुले में रहने के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, घटनास्थल पर बीसीसीएल द्वारा लगाई गई लाइटें भी अब हटा ली गई हैं। रात में अंधेरा होने के कारण लोगों का डर और बढ़ गया है। लोगों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर छाताबाद में भू-धंसान की यह दूसरी घटना है। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को अब तक स्थायी सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं मिल सकी है। लोगों में प्रशासन और बीसीसीएल के प्रति गहरी नाराजगी है। प्रभावित परिवारों ने सरकार से जल्द राहत और सुरक्षित पुनर्वास की गुहार लगाई है।

गौरतलब है कि धनबाद जिले के कतरास थाना इलाके के छाताबाद में अचानक जमीन धंसने से भारी तबाही मच गई थी। इस भयानक हादसे में 20 से ज्यादा घर मलबे में तब्दील हो गए, जबकि एक दो मंजिला मकान तो देखते ही देखते पूरी तरह जमीन के अंदर समा गया। इस घटना में 15 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर आई थी। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई थी। इस घटना के बाद से लोगों में प्रशासन के खिलाफ जमकर गुस्सा देखने को मिल रहा है।


यह घटना 7 अगस्त यानी शुक्रवार शाम की है। दरअसल छाताबाद इलाके में अचानक तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक देखते ही देखते एक के बाद 20 से अधिक घर धराशायी हो चुके थे। कई अन्य मकानों में बड़ी-बड़ी और खतरनाक दरारें पड़ गईं। ज़मीन फटने की इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे। चूंकि हादसा अचानक हुआ, इसलिए कई लोग उस वक्त अपने घरों के अंदर ही मौजूद थे। गनीमत यह रही कि आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हादसे का कारण क्षेत्र की कोयला खदानों में अवैध खुदाई है, इस खुदाई की वजह से जमीन खोखली हो गई है और मकान धंस रहे हैं। ज्ञातव्य है कि यह क्षेत्र कोयले के लिए जाना जाता है और अवैध खनन यहाँ आम है।

प्रदेश की झामुमो सरकार की तरफ़ से न इस पर अब तक कोई बयान आया है और न ही पीड़ितों को किसी तरह की राहत का ऐलान हुआ है। स्थानीय मीडिया के बाहर भी इस मामले की कहीं रिपोर्टिंग नहीं हुई। स्थानीय निवासी मोहम्मद वारिस अनवर ने टीसीएन को भेजे मेल में बताया है कि पीड़ित परिवार बेहद परेशान हैं। लोगों की मांग है कि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए और साथ में मामले की जांच कराके दोषियों को उचित सजा भी दी जाए। इलाके में अवैध खनन पर जब तक रोक नहीं लगेगी, इस तरह की परेशानी लगातार आती ही रहेगी।

छात्र आंदोलन पर लाठीचार्ज के बाद से ही मुश्किल में फँसी हेमंत सोरेन की सरकार के लिए यह मामला और दिक्कतें बढ़ा सकता है।