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सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में घोटाला, अफसरों ने ठेकेदार बनकर किया करोड़ों का खेल?

TCN Desk TCN Desk | 52m ago · 4 min read
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में घोटाला, अफसरों ने ठेकेदार बनकर किया करोड़ों का खेल?

जांच में सामने आया कि कागजों पर दर्ज ठेकेदारों के बजाय बिजली कंपनी के अफसरों ने पेटी कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम किया।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसके लिए मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने लगभग 5,000 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की मंजूरी दी है। बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बड़ी राशि मंजूर की गई है। इसी बीच बिजली लाइन शिफ्टिंग के कामों में गड़बड़ी और घोटाले के कई आरोप भी सामने आए हैं।

सिंहस्थ क्षेत्र में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में 75 लाइनों की शिफ्टिंग का काम चल रहा है।

प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि इनमें से 3 लाइनों में गड़बड़ी सामने आई। जहां नए पोल लगाए जाने थे, वहां सिर्फ 20 प्रतिशत नए पोल लगाए गए। 80 प्रतिशत पुराने पोल को सिल्वर पेंट कर दोबारा इस्तेमाल किया गया। पुराने केबल, तार और कंडक्टर भी लगाए गए, जबकि नियमों के मुताबिक नई सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए था। इसके बावजूद संबंधित फर्म्स को 4.51 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कागजों पर दर्ज ठेकेदारों के बजाय बिजली कंपनी के अफसरों ने पेटी कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम किया। यानी काम का ठेका किसी और के नाम था, लेकिन काम कोई और कर रहा था।

कुछ अधिकारियों पर भी ऐसी व्यवस्था में भूमिका निभाने के आरोप हैं। हालांकि, इस मामले पर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

आरोप है कि कई जगह नई सामग्री लगाने के बजाय पुराने पोल, केबल और उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल किया गया है। वहीं कुछ मामलों में पुराने ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड भी नहीं मिलने की बात कही जा रही है। बता दें कि बिजली लाइन शिफ्टिंग के लए करीब 250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।

बिजली लाइन शिफ्ट करने के काम के लिए कुछ नियम तय हैं। इसमें योग्य ठेकेदार से काम कराना, काम शुरु करने से पहले मौके का सर्वे करना और पुरानी सामग्री को सुरक्षित रखना शामिल है। आरोप है कि कई जगह इन नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया।

नियमों के मुताबिक,

बिजली लाइन शिफ्ट करने से पहले GIS सर्वे (जमीन पर मौजूद पोल, तार और उपकरणों की जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) किया जाना चाहिए। इससे पुराने पोल, तार और दूसरे उपकरणों की स्थिति रिकॉर्ड में रहती है। जांच में दावा किया गया है कि कई जगह यह सर्वे किया ही नहीं गया। ऐसे में पुरानी सामग्री की सही स्थिति और उसकी जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सकी।

नियम के मुताबिक बिजली लाइन हटाने के बाद पुराने पोल, केबल और दूसरे सामान को बिजली विभाग के स्टोर में जमा करना होता है। आरोप है कि कई जगह रिकॉर्ड में जितनी सामग्री जमा दिखाई गई, मौके पर उतनी मिली ही नहीं। कुछ मामलों में पुरानी सामग्री को खराब बताकर दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।

उज्जैन के कुछ इलाकों में लाइन शिफ्टिंग के बाद भी पुराने पोल लगे होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ पोल पर किया गया सिल्वर पेंट आसानी से निकल रहा है। इससे इन पोलों के पुराने होने की आशंका जताई गई। कुछ स्थानों पर पोल की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई पोल में कंक्रीट बेस की व्यवस्था नहीं दिखी। शहर में बिजली की लाइनों को लेकर सुरक्षा के कुछ नियम तय हैं। घरों और दुकानों से लाइन की उचित दूरी रखना और पोल को मजबूत हालत में रखना जरूरी होता है।

जांच में दावा किया गया है कि कुछ जगहों पर 11 केवी की लाइन घरों और दुकानों के काफी करीब मिली। वहीं, कुछ पोल भी कमजोर हालत में मिले। सिंहस्थ के दौरान इन्हीं रास्तों से वीआईपी लोगों की आवाजाही प्रस्तावित है। ऐसे में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
सदावल हेलीपैड क्षेत्र के पास पुराने ट्रांसफॉर्मर से जुड़े कुछ पोल मिले हैं, लेकिन मौके पर ट्रांसफॉर्मर नहीं मिला। आरोप है कि सिंहस्थ क्षेत्र में लगे कई ट्रांसफॉर्मर का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कु उपकरणों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

गौरतलब है कि सिंहस्थ भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। यह उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे आयोजित किया जाता है। जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, तब इस मेले का आयोजन होता है। सिंहस्थ करीब 12 साल में एक बार आयोजित होता है। इसमें देशभर से साधु-संत, अखाड़े और लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण इस आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के काम चल रहे हैं।