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सीएम मोहन यादव के आवास का घेराव करने भोपाल पहुंचे 2000 से ज्यादा किसान

TCN News Desk TCN News Desk | 2h ago
सीएम मोहन यादव के आवास का घेराव करने भोपाल पहुंचे 2000 से ज्यादा किसान

मध्य प्रदेश में 2000 से ज्यादा किसानों ने बुधवार को सीएम मोहन यादव का घेराव करने के लिए राजधानी भोपाल कूच किया।

मध्य प्रदेश में 2000 से ज्यादा किसानों ने बुधवार को सीएम मोहन यादव का घेराव करने के लिए राजधानी भोपाल कूच किया। सीएम के सरकारी आवास से सिर्फ 7 किलोमीटर दूर किसानों को पुलिस बल ने रोक लिया। प्रदेश के किसान एमएसपी पर मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग कर रहे थे।

ANI के अनुसार, बुधवार को नर्मदापुरम, रायसेन और आसपास के जिलों सहित कई जगहों से आए लगभग 2000 किसान भोपाल पहुंचे। उन्होंने राजधानी के अंदर कम से कम तीन बार पुलिस बैरिकेड तोड़े और फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव के सरकारी आवास से सिर्फ़ 7 किलोमीटर दूर वीर सावरकर सेतु के पास तैनात पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। भोपाल में बैरिकेड तोड़ते समय कई जगहों पर किसानों और पुलिस के बीच टकराव भी हुई।

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गौरतलब है कि 'किसान क्रांति यात्रा' नाम से हो रहे इस विरोध मार्च का नेतृत्व 'संयुक्त किसान मोर्चा' कर रहा है, जिसमें 19 किसान संगठनों से जुड़े किसान शामिल हैं। इस प्रदर्शन में किसान पैदल मार्च कर रहे हैं और उनके साथ मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर पर सवार अन्य किसान भी हैं। इन ट्रैक्टरों में अनाज और खाने-पीने का सामान है ताकि वे अगले कुछ दिनों तक भोपाल में अपना आंदोलन जारी रख सकें।

प्रदर्शनकारी किसानों की मुख्य रूप से दो मांगे हैं, पहला एमएसपी पर मूंग की फसल की 100% सरकारी खरीद और दूसरी, किसानों को खाद बांटने के लिए बने 'ई-टोकन सिस्टम' को खत्म किया जाए। किसानों की मांग है कि ई-टोकन सिस्टम के बजाय जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर खाद बांटी जाए।

किसान संगठनों में से एक, 'क्रांतिकारी किसान मज़दूर संगठन' की युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पटेल ने कहा कि,

किसान अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मार्च कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को मुख्यमंत्री से मुलाकात का भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्हें गुमराह किया गया।


पटेल ने आरोप लगाया,

"हम मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मार्च कर रहे हैं। हमें भरोसा दिलाया गया था कि मुख्यमंत्री हमसे मिलेंगे, लेकिन बाद में हमें बताया गया कि वे दिल्ली चले गए हैं। जबकि वे चुनाव प्रचार के लिए दतिया में थे। किसान नाराज हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है और उनके आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं।

इस बीच, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को बीजेपी सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की खरीद में तेजी लाने की अपील की। प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा,

"मध्य प्रदेश देश में मूंग का सबसे बड़ा उत्पादक है। केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए राज्य से लगभग 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंज़ूरी दी है, जो पूरे देश में मंज़ूर की गई कुल मात्रा का लगभग 87 प्रतिशत है। मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कमलनाथ ने कहा कि 16 जुलाई तक राज्य में मंज़ूर की गई मात्रा का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया था। यह स्थिति लाखों किसानों के लिए बेहद चिंताजनक है। मूंग उत्पादक अपनी उपज को MSP पर बेचने का इंतज़ार कर रहे हैं। खरीद की धीमी गति के कारण, उन्हें अपनी उपज बहुत कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।"


बता दें कि किसान पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार को पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद उन्होंने भोपाल-नर्मदापुरम हाईवे पर धरना दिया। मूंग की खरीद और खाद वितरण के मुद्दों पर केंद्रित यह आंदोलन अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले और लगभग 19 किसान संगठनों की भागीदारी के साथ प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को नर्मदापुरम ज़िले के सेठानीघाट से अपना मार्च शुरू किया था। तिरंगा लेकर और "जय जवान-जय किसान" के नारे लगाते हुए पैदल ही भोपाल की ओर चल पड़े। मंगलवार शाम तक, लगभग 2,000 किसान राज्य की राजधानी के बाहरी इलाके तक पहुँच गए थे। इस दौरान उन्होंने रास्ते में कई पुलिस बैरिकेड्स को पार किया, जिनमें ओबैदुल्लागंज और 11-मील बाईपास के पास लगे बैरिकेड्स भी शामिल थे।


बुधवार को, जब यह समूह मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था, तो पुलिस ने उन्हें भोपाल-नर्मदापुरम हाईवे पर CSIR-AMPRI इंस्टीट्यूट के पास रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद, किसानों ने सड़क के किनारे डेरा डाल दिया, खाना पकाया और घोषणा की कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे वहाँ से नहीं हटेंगे। एक प्रदर्शनकारी, दीपक जाट ने ANI को बताया कि “हमने CM हाउस का घेराव करने के लिए बुधनी और नर्मदापुरम से मार्च शुरू किया। आज हमारे मार्च का तीसरा दिन है। किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से भोपाल की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशासन ने हमें रोक दिया... अगर सरकार हमारी मांगें मानने में एक महीना भी लगाती है, तो भी किसान एक महीने तक इसी सड़क पर डटे रहेंगे।”

बता दें कि इस सीज़न में मध्य प्रदेश में बंपर पैदावार हुई है। अनुमान है कि 14.30 लाख हेक्टेयर ज़मीन से 20 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा पैदावार होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' के तहत सिर्फ़ 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद को मंज़ूरी दी है। किसानों को डर है कि अगर पूरी फसल MSP पर नहीं खरीदी गई तो उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा।