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SIR को लेकर EC के अंदर ही मचा घमासान, दो आयुक्तों की आपत्तियों के बाद विपक्ष हमलावर

TCN Desk TCN Desk | 2h ago · 5 min read
SIR को लेकर EC के अंदर ही मचा घमासान, दो आयुक्तों की आपत्तियों के बाद विपक्ष हमलावर

तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है।

बिहार में जून 2025 में शुरू हुआ चुनाव आयोग (ECI) का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरुआत में मतदाता सूची की नियमित समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया के तौर पर देखा गया था। लेकिन अब यह प्रक्रिया बड़े राजनीतिक और सार्वजनिक विवाद के केंद्र में है। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के भीतर भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा मतदाता डेटा तक पहुंच को लेकर सवाल उठे। Indian Express की एक जांच के अनुसार,

तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर आयोग के भीतर लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।

रिपोर्ट के मुताबिक,

पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। दोनों अधिकारियों का कहना था कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना लिए गए।
चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाए। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया भी शामिल थी।

दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं को जोड़ने से जुड़े कुछ कदमों को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताया। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि मतदाता डेटाबेस तक पहुंच को दिल्ली में केंद्रीकृत करने से राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका दरकिनार हो सकती है। मतदाता डेटा से जुड़े सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में दोनों असहमत चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव से भी संपर्क किया था।

Indian Express की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में लिए जा रहे महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में दो अन्य चुनाव आयुक्तों को भी जानकारी नहीं दी जा रही थी। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में काम करने और ‘वोट चोरी’ में शामिल होने का आरोप लगाया।


कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘पसंदीदा’ बताते हुए कहा कि,

रिपोर्ट में सामने आई शिकायतों से पता चलता है कि दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी गई।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव आयोग पर नियंत्रण कर लिया है और कहा कि Indian Express की रिपोर्ट ने इन आरोपों को साबित किया है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए।


उन्होंने कहा कि,

यदि रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं तो ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग के कामकाज के पीछे कोई ‘अदृश्य हाथ’ काम कर रहा है। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया और ऐसे फैसले लिए गए जो सर्वसम्मत या बहुमत से नहीं थे, तो इससे चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

तिवारी ने आगे कहा कि,

इस मामले में CEC के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दोबारा कैसे कायम होगी।

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को जेल जाना पड़ेगा।


रिपोर्ट के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने X पर कहा कि,

करीब पांच महीने पहले 60 से अधिक राज्यसभा सांसदों ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि अब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से CEC के कई फैसलों पर आपत्ति जताए जाने की खबर सामने आने के बाद उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाना चाहिए

ओ’ब्रायन ने अपने पत्र में राष्ट्रपति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘सिद्ध कदाचार’ के आधार पर पद से हटाने की मांग की।


समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि चुनाव आयोग के सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि,

अगर किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को निष्पक्ष तरीके से काम करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

CPM सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग को ‘एक व्यक्ति की निरंकुश व्यवस्था’ बताया और आयोग तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि,

संसद को मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। ब्रिटास ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने 24 अप्रैल 2026 को ही ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया था और करीब 70 सांसदों के हस्ताक्षर इसमें शामिल थे।

ब्रिटास ने सुप्रीम कोर्ट से पूरी SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि,

जब तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी प्रक्रिया को अवैध और मतदाता सूची की विश्वसनीयता के लिए नुकसानदायक बता रहे हों, तो अदालत की चुप्पी पर भी सवाल उठते हैं।

Indian Express की जांच में,

सामने आए दावों ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया, मतदाता डेटा तक पहुंच और SIR जैसे बड़े चुनावी अभ्यास की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए आरोपों और विपक्षी दलों के बयानों के अलावा संबंधित पक्षों का पूरा जवाब और इन दावों पर अंतिम कानूनी या संवैधानिक निष्कर्ष अलग-अलग स्तरों पर निर्भर करेंगे। मामले में चुनाव आयोग और न्यायपालिका की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।