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ओमान के नए प्रस्ताव से खुल सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज!

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Md. Tousif | 1h ago
ओमान के नए प्रस्ताव से खुल सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज!

इस प्रस्ताव से ईरान को मिल सकती है स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से शुल्क वसूलने की अनुमति।

पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर नई कूटनीतिक पहल सामने आई है। खाड़ी देशों के समर्थन से ओमान ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत ईरान को इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज़ों से स्वैच्छिक सेवा शुल्क की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, इसके बदले ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर अकेले नियंत्रण का अधिकार नहीं होगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य जहाज़ों की आवाजाही को फिर से सामान्य बनाना और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति को स्थिर करना है।

गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी। लेकिन फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल के हमले के बाद ईरान ने अपने जहाज़ों को छोड़कर अन्य जहाज़ों की आवाजाही पर रोक लगा दी। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई और तेल की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के प्रस्ताव को कई खाड़ी देशों का समर्थन मिला है। इसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का संचालन किसी एक देश के बजाय एक संयुक्त क्षेत्रीय व्यवस्था के तहत किया जाएगा। ईरान जहाज़ों से कोई अनिवार्य शुल्क नहीं वसूलेगा, बल्कि केवल स्वैच्छिक योगदान स्वीकार करेगा। यह मॉडल स्ट्रेट ऑफ मलक्का से प्रेरित है, जहां इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर जहाज़ों से पर्यावरण संरक्षण, खोज एवं बचाव अभियान और समुद्री सुरक्षा के लिए स्वैच्छिक योगदान लेते हैं।

अल जज़ीरा के अनुसार, ओमान ने ईरान और खाड़ी देशों की भागीदारी वाला एक क्षेत्रीय समूह बनाने का भी सुझाव दिया है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाज़ों की सुरक्षा और आवाजाही का प्रबंधन करेगा।

प्रस्ताव में जहाज़ों के लिए तीन अलग-अलग मार्ग बनाने की बात कही गई है- एक ईरान के समुद्री क्षेत्र से, दूसरा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से और तीसरा ओमान के समुद्री क्षेत्र से। प्रस्ताव के तहत अंतरराष्ट्रीय मार्ग में बिछी समुद्री माइंस को हटाने की जिम्मेदारी भी ईरान को सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस योजना के तकनीकी पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है और अंतिम सहमति नहीं बनी है।

पिछले सप्ताह ईरान और ओमान के अधिकारियों के बीच तेहरान में इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत हुई।

इजराइली मीडिया Ynet global के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से भी अलग-अलग बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बैठकों में इस बात पर सहमति बनी कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग और बातचीत का रास्ता सबसे बेहतर विकल्प है।

इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत सफल होती है तो यह सभी के लिए अच्छा होगा, लेकिन विफल रहने पर अमेरिका फिर से पहले जैसी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि उसने अमेरिका से नई वार्ता की मांग नहीं की है और वॉशिंगटन पर पहले हुए समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

कतर स्थित जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल मुस्ग्रेव का मानना है कि,

ओमान का प्रस्ताव ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए राहत साबित हो सकता है। उन्होंने अल जज़ीरा से कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद रहने का सबसे बड़ा नुकसान आम ईरानियों को हो रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी धड़े इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

मुस्ग्रेव ने यह भी बताया कि स्ट्रेट ऑफ मलक्का में स्वैच्छिक योगदान से हर साल लगभग 7 करोड़ डॉलर जुटाए जाते हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ईरान पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज़ से करीब 10 लाख डॉलर तक सेवा शुल्क लेने का प्रस्ताव दे चुका था। ऐसे में ओमान का मॉडल दोनों पक्षों के बीच समझौते का एक रास्ता बन सकता है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम समेत कई विवादों पर अगस्त के अंत तक समाधान निकालने की कोशिश जारी है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ओमान की मध्यस्थता इस विवाद को सुलझाने में कितनी सफल साबित होती है।