17 महीनों में CRPF के 78 जवानों ने की आत्महत्या, NHRC ने अमित शाह से मांगा जवाब
क्या जवानों में आत्मबल कम हो रहा है या वो किसी मानसिक दबाव में हैं?
इतनी बड़ी संख्या में स्वंय को हानि पहुंचाना या आत्महत्या करना जवानों के लिए न तो कभी सुना गया था और न कभी देखा गया था। क्या जवानों में आत्मबल कम हो रहा है या वो किसी मानसिक दबाव में है। आखिर क्या वजह है 2025 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 59 कर्मियों ने आत्महत्या कर ली और हैरानी की बात ये है कि इस साल अभी 30 मई तक आत्महत्या के 19 मामले सामने आ चुके हैं। यह आंकड़े जवानों के आत्मबल में कमी को लेकर काफी चिंताजनक हैं।
पिछले सप्ताह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और CRPF के महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी थी।
Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, CRPF में आत्महत्या के बढ़ते मामलों से चिंतित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने ऐसे मामलों की हर महीने समीक्षा करने और संस्थागत स्तर पर रोकथाम के उपायों को मजबूत करने के लिए एक उच्चस्तरीय कोर ग्रुप का गठन किया है। यह फैसला इसी महीने की शुरुआत में CRPF मुख्यालय में हुई एक बैठक के बाद लिया गया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने आत्महत्या के मामलों की व्यवस्थित तरीके से समीक्षा करने, बार-बार सामने आने वाले जोखिम के कारणों की पहचान करने और जवानों के लिए सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत पर चर्चा की थी।
CRPF कर्मियों में आत्महत्या से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2025 में पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक,
पिछले साल आत्महत्या से 59 CRPF कर्मियों की मौत हुई। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 CRPF कर्मियों ने आत्महत्या की। इस साल 30 मई तक ऐसे 19 मामले सामने आ चुके हैं। 2021 से मई 2026 तक के आंकड़े यह भी बताते हैं कि इनमें से कई घटनाएं उस समय हुईं, जब जवान ड्यूटी पर तैनात थे।
एक अधिकारी के मुताबिक, इस कोर ग्रुप की अध्यक्षता CRPF के महानिदेशक जीपी सिंह करेंगे। अधिकारी ने बताया,
यह समूह हर महीने, संभवतः तीसरे सप्ताह में बैठक करेगा और पिछली अवधि में सामने आए आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के मामलों की समीक्षा करेगा। प्रत्येक मामले में घटना के कारणों और परिस्थितियों, कल्याणकारी या मनोवैज्ञानिक सहायता की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल, संबंधित यूनिट द्वारा उठाए गए रोकथाम के कदमों तथा सुधार की जरूरत वाले व्यवस्थागत मुद्दों की जांच की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक मामले में संबंधित कार्यालय प्रमुख या बटालियन के कमांडेंट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोर ग्रुप के सामने चार से पांच स्लाइड की एक व्यवस्थित प्रस्तुति देनी होगी। इसमें संबंधित जवान की पृष्ठभूमि, घटना से पहले की परिस्थितियां, यूनिट द्वारा उठाए गए कदम, उपलब्ध कराई गई कल्याणकारी और चिकित्सकीय सहायता, प्रारंभिक जांच या जांच-पड़ताल के निष्कर्ष तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए गए विशेष उपायों की जानकारी शामिल होगी।
संबंधित यूनिट के पर्यवेक्षी और ऑपरेशनल अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए समीक्षा में शामिल होंगे। इनमें संबंधित DIG, IG और ऑपरेशनल नियंत्रण रखने वाले ADG या SDG शामिल होंगे। अधिकारी के मुताबिक,
कोर ग्रुप को हर मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने और जरूरत के अनुसार रोकथाम, कल्याण, प्रशासनिक और चिकित्सकीय उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समूह समीक्षा किए गए मामलों में सामने आने वाले समान रुझानों और बार-बार दिखाई देने वाले जोखिम के कारणों की भी पहचान करेगा तथा पूरे बल के स्तर पर संस्थागत सुधार के सुझाव देगा।
योजना के अनुसार, हर महीने होने वाली इस समीक्षा का उद्देश्य लगातार निगरानी सुनिश्चित करना, समय पर हस्तक्षेप करना, जवाबदेही तय करना और CRPF कर्मियों में आत्महत्या तथा खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को कम करने के लिए रोकथाम के उपायों को मजबूत करना है।
CRPF अधिकारियों ने पहले भी कहा है कि अर्धसैनिक बल ने अपने जवानों के अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
अधिकारियों के अनुसार,
अब तक यह पाया गया है कि आत्महत्या के ज्यादातर मामले घर-परिवार से जुड़ी समस्याओं से संबंधित होते हैं। इसके साथ ही सेवा की कठिन परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी भी जवानों पर दबाव बढ़ाती हैं।
गौरतलब है कि CRPF देश का प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समय CRPF की लगभग 95 से 97 प्रतिशत ऑपरेशनल फोर्स ड्यूटी पर तैनात रहती है। ये जवान आतंकवादियों और उग्रवादियों से निपटने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।