झारखंड HC ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने पर लगाई रोक, अब आगे क्या ?
बता दें कि 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया था।
झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के 11वीं–13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी। साथ ही, अदालत ने इस परीक्षा के जरिए भर्ती हुए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचनाओं के अमल पर भी रोक लगा दी।
Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह रोक राज्य सरकार द्वारा 11वीं–13वीं JPSC समेत 22 भर्ती परीक्षाओं/प्रक्रियाओं को रद्द करने के कुछ दिनों बाद आई है। अनियमितताओं को लेकर सरकार ने 23 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को या तो रोक दिया था या जांच के दायरे में रखा था। यह फैसला 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद लिया गया था, जिसमें JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक था। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की 18 अगस्त की अधिसूचना के मुताबिक, सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं/प्रक्रियाओं को रद्द किया, छह को जांच लंबित रहने तक स्थगित किया और JPSC की 17 पुरानी भर्तियों की जांच CID को सौंप दी। इस तरह कुल 45 भर्ती प्रक्रियाएं इन फैसलों से प्रभावित हुईं।
सरकार की कार्रवाई का असर राज्य की लगभग हर तरह की विशेष भर्ती पर पड़ा है—सिविल सेवकों, न्यायाधीशों और सरकारी वकीलों से लेकर इंजीनियरों, डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, कृषि अधिकारियों, वन अधिकारियों, वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय शिक्षकों तक।
लेकिन इसका असर सभी पर एक जैसा नहीं है। जहां लाखों अभ्यर्थियों के सामने भर्ती प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होने की आशंका खड़ी हो गई, वहीं परीक्षा के कई चरण पार कर चुके उम्मीदवारों की अब तक की प्रगति भी खत्म हो गई। जो लोग पहले ही सरकारी सेवा में शामिल हो चुके हैं, उनके सामने और जटिल सवाल है—उनकी नियुक्तियों का क्या होगा और वे जिन पदों पर फिलहाल काम कर रहे हैं, उनका भविष्य क्या होगा?
सरकार द्वारा रद्द की गई 22 भर्ती परीक्षाओं/प्रक्रियाओं में चार ऐसी थीं, जिनमें नियुक्तियां हो चुकी थीं या प्रक्रिया नियुक्ति के चरण तक पहुंच चुकी थी। इनमें 11वीं–13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा शामिल है, जिसके जरिए 342 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) के जरिए 1,932 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी। इसके अलावा बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) भर्ती में 64 पद और खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती में 56 पद शामिल थे। बाकी रद्द भर्तियां चयन और नियुक्ति प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में थीं।
11वीं–13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में रैंक-1 हासिल करने वाले और राज्य पुलिस सेवा के लिए चुने गए आशीष अक्षत के लिए यह फैसला करीब एक साल की सेवा और प्रशिक्षण के बाद आया। उन्होंने बताया कि,
उन्हें और दूसरे चयनित उम्मीदवारों को सरकार की ओर से अब तक यह नहीं बताया गया है कि उनकी नियुक्तियों का क्या होगा। उन्होंने कहा, “हम भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर हो क्या रहा है। हमें इसकी उम्मीद नहीं थी।”
अक्षत के मुताबिक,
वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करने और फिर नई नौकरी के हिसाब से अपनी जिंदगी शुरू करने के बाद यह अनिश्चितता बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा, “स्थिति स्पष्ट नहीं है। हमें भी नहीं पता कि अब क्या करना है या आगे क्या होगा।”
इसी परीक्षा से चयनित एक राज्य कर अधिकारी ने बताया कि,
परीक्षा रद्द होने से पहले से सेवा में मौजूद अधिकारियों के भविष्य पर भी अनिश्चितता छा गई है। वह दिसंबर से झारखंड में सेवा दे रहे हैं और उनका प्रशिक्षण लगभग पूरा होने वाला है। उनके मुताबिक, परीक्षा रद्द करने के सरकारी आदेश के अलावा उन्हें या उनके सहकर्मियों को अलग से कोई सूचना या निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने कहा, “सब कुछ अधर में है।”
नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ने से पहले उन्होंने कोल इंडिया लिमिटेड में आठ साल काम किया था। उससे पहले वह निजी क्षेत्र में भी काम कर चुके थे। उन्होंने सवाल किया,
अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो यह व्यवस्था की विफलता है। लेकिन बिना किसी सबूत के परीक्षा पास करके नियुक्त हुए व्यक्ति को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है?”
छात्र आंदोलन की तात्कालिक वजह इस साल अप्रैल में JPSC द्वारा आयोजित 14वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा विवाद था। प्रारंभिक परीक्षा के बाद उम्मीदवारों ने परिणाम पर सवाल उठाए। उन्होंने श्रेणीवार कट-ऑफ जारी नहीं किए जाने और परिणाम पर JPSC सदस्यों के हस्ताक्षर न होने का मुद्दा उठाया। विवाद तब और बढ़ गया जब एक उम्मीदवार की OMR शीट सोशल मीडिया पर वायरल हुई। दावा किया गया कि उस उम्मीदवार ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, जबकि वायरल OMR शीट में दिखाई दे रहे अंक कट-ऑफ से कम लग रहे थे। हालांकि, वायरल OMR शीट की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसके बाद उम्मीदवारों ने परीक्षा की निष्पक्षता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
छात्र आंदोलन शुरू होने से पहले ही 22 जुलाई को राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी थी। CID ने बाद में SIT बनाई, JPSC कार्यालय और परीक्षा से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की और गिरफ्तारियां शुरू कीं। जांच के दायरे में परीक्षा एजेंसी TSR Data Processing and Technical Limited (TDPL) भी आई। TDPL को उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुकी थी और JSSC ने भी मई 2025 में उसे ब्लैकलिस्ट किया था। गिरफ्तार लोगों में कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी भी शामिल था, जो गोड्डा में प्रखंड आपूर्ति अधिकारी के रूप में भी काम कर रहा था। जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया और अब तक करीब 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाद में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते की भी गिरफ्तारी हुई।
JPSC मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ छात्र आंदोलन केवल 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। 25 जुलाई से छात्रों ने रांची में प्रदर्शन शुरू किया और कई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CBI जांच और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। दो प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन पाई—CBI जांच और JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को रद्द करना। सरकार शुरुआत में CGL परीक्षा रद्द करने के पक्ष में नहीं थी, खासकर इसलिए क्योंकि नियुक्तियां पहले ही हो चुकी थीं और मामला अदालतों से भी गुजर चुका था।
आंदोलन 26 दिनों तक जारी रहा। छात्रों द्वारा 18 अगस्त की समयसीमा दिए जाने के बाद सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया। इसके बाद छात्रों ने 19 अगस्त को आंदोलन खत्म कर दिया।
लेकिन अगले ही दिन, 20 अगस्त को झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों से निपटने और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की है।
कार्मिक विभाग के आदेश के मुताबिक, सरकार झारखंड हाई कोर्ट से अनुरोध करेगी कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं और कदाचार से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित की जाएं। दोनों आयोगों में आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ (Internal Vigilance Cell) भी बनाया जाएगा।
सरकार ने JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधारों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का फैसला किया है। समिति में प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसे दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। कार्मिक विभाग के आदेश के मुताबिक, पुरानी 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच CID करेगी। यह फैसला मौजूदा JPSC मामले की CID जांच के दौरान सरकार के सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है। ये परीक्षाएं कई वर्षों की अवधि से जुड़ी हैं। इनमें 2010 की कमर्शियल टैक्सेज लिमिटेड परीक्षा भी शामिल है। इनमें से ज्यादातर भर्तियां मौजूदा JMM सरकार से पहले की हैं, हालांकि कुछ वर्तमान सरकार के कार्यकाल की भी हैं।