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ईरान ने ओमान का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- होर्मुज पर पूरा नियंत्रण हमारा होगा

TCN News Desk TCN News Desk | 1h ago
ईरान ने ओमान का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- होर्मुज पर पूरा नियंत्रण हमारा होगा

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संयुक्त प्रबंधन को लेकर ओमान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के संयुक्त प्रबंधन को लेकर ओमान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने उसकी जगह अपना नया प्रस्ताव पेश किया है। ईरान के विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि इस जलमार्ग पर पूरा नियंत्रण हमारा होगा। हालांकि दोनों देशों के बीच इस जलमार्ग के भविष्य को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम समझौते की शर्तों पर सहमति नहीं बन सकी है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने मंगलवार को सरकारी टीवी पर कहा कि ओमान का प्रस्ताव ईरान की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को संबोधित नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान के नए प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तेहरान की निगरानी और नियंत्रण पहले से कहीं अधिक होगा।

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गौरतलब है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का केंद्र बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद यह क्षेत्र युद्ध का प्रमुख मोर्चा बन गया था। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर होती थी।

युद्ध शुरू होने के कुछ समय बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ा। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी लागू कर दी थी।

बाद में 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कम से कम 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क के दोबारा खोलने की बात कही गई थी। लेकिन इस समझौते की मंशा स्पष्ट नहीं होने के कारण यह विवाद पैदा हो गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का अंतिम नियंत्रण किसके पास रहेगा। बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान दोनों के क्षेत्रीय समुद्री जल से होकर गुजरता है, इसलिए जहाज किस मार्ग से गुजरेंगे और निगरानी कौन करेगा, इस पर मतभेद बढ़ गए।

इन्हीं मतभेदों के चलते अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया। अमेरिका ने दोबारा ईरान पर हमले किए, जबकि ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की। हालांकि पिछले सप्ताह दोनों पक्षों के बीच संघर्ष फिलहाल थम गया, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नियंत्रण को लेकर कूटनीतिक बातचीत अब भी जारी है।

ग़रीबाबादी ने बताया कि ओमान ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया था,

जिसके तहत होर्मुज का संचालन दोनों देशों के बीच 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी में किया जाता। प्रस्ताव के अनुसार, ईरान अपनी सीमा वाले हिस्से में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करता, जबकि ओमान अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले मार्ग की जिम्मेदारी संभालता।

उन्होंने कहा कि ओमान की योजना के अनुसार, जहाज ईरान के समुद्री क्षेत्र से प्रवेश कर सकते थे और ओमान के जलक्षेत्र से बाहर निकल सकते थे। इसके अलावा इस प्रस्ताव में गुजरने वाले जहाज़ों से स्वैच्छिक सेवा शुल्क (Voluntary Service Fees) लेने की भी बात थी, जिसे दोनों देशों के बीच साझा किया जाता। यह मॉडल दक्षिण-पूर्व एशिया के स्ट्रेट ऑफ मलक्का (Strait of Malacca) से प्रेरित माना जा रहा है। वहां इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर जहाज़ों से स्वैच्छिक योगदान लेते हैं, जिसका उपयोग नौवहन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और खोज एवं बचाव अभियानों पर किया जाता है।

बताया जा रहा है कि ओमान के इस प्रस्ताव को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का भी समर्थन प्राप्त है। मंगलवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज़ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक भी की।

हालांकि ईरान ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। ग़रीबाबादी ने कहा कि,

ईरान के नए प्रस्ताव के तहत एक प्रमुख समुद्री मार्ग पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय जल में रहेगा, जबकि दूसरी लेन का कुछ हिस्सा भी ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा। उनका कहना था कि इससे ईरान आने-जाने वाले दोनों दिशाओं के जहाज़ों की प्रभावी निगरानी कर सकेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ओमान ने ईरान का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद ही रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जहाज़ों को गुजरने देने की व्यवस्था अब दोबारा लागू नहीं होगी।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान अब एक नए विकल्प पर विचार कर रहा है, जिसमें तीन अलग-अलग समुद्री मार्ग बनाए जा सकते हैं। इनमें एक मार्ग ईरान के समुद्री क्षेत्र से, दूसरा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से और तीसरा ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजर सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान कुछ मामलों में लचीलापन दिखाने के संकेत दे रहा है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इनमें जहाज़ों के गुजरने की दिशा, समुद्री मार्गों की रूपरेखा, शुल्क की व्यवस्था, अंतिम नियम कौन तय करेगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों (माइंस) को हटाने जैसे विषय शामिल हैं।

अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री माइंस बिछाई थीं। हालांकि ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिर भी अप्रैल में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अधिकृत जहाजों के लिए एक नया समुद्री मार्ग जारी किया था और दावा किया था कि यह मार्ग जहाज़ों को संभावित माइंस से सुरक्षित रखेगा। यह मार्ग पहले की तुलना में ईरान के तट के काफी अधिक करीब से गुजरता था। एक अन्य बड़ा विवाद जहाज़ों से वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर भी है।

क़तर स्थित जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल मस्ग्रेव के अनुसार, मलक्का जलडमरूमध्य की स्वैच्छिक शुल्क प्रणाली से हर साल लगभग 7 करोड़ डॉलर की आय होती है। इसके विपरीत, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज़ पर लगभग 10 लाख डॉलर का "सेवा शुल्क" लगाने की मांग कर रहा है। ईरान पहले भी कह चुका है कि इस शुल्क से मिलने वाली राशि का उपयोग अमेरिका और इज़राइल के हमलों में क्षतिग्रस्त हुई सड़कों, बंदरगाहों, ऊर्जा ढांचे और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के पुनर्निर्माण में किया जाएगा। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक समुद्री व्यापार मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।