NCERT ने पॉलिटिकल साइंस की किताबों के लिए बदली टीम, चार सदस्यों के RSS से संबंध
टीम के चार सदस्यों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध बताए गए हैं।
NCERT ने कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों के लिए टेक्स्टबुक डेवलपमेंट टीम (पाठ्यपुस्तक विकास दल) का पुनर्गठन किया है। इस टीम को पाठ्यपुस्तकों में सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समावेशिता को शामिल करने का दायित्व दिया गया है। लेकिन खबर ये नहीं है।
खबर ये है कि टीम के चार सदस्यों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध बताए गए हैं।
Telegraph की एक रिपोर्ट के अनुसार, टीम को कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक इस साल नवंबर तक और कक्षा 12 की पुस्तक अगले साल जुलाई तक तैयार करने को कहा गया है। इस पाठ्यपुस्तक विकास दल का नेतृत्व शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री करेंगे। शास्त्री कर्नाटक स्थित डीम्ड यूनिवर्सिटी निट्टे के उपाध्यक्ष हैं। पाठ्यपुस्तक विकास दल के सदस्यों में कम से कम चार ऐसे शिक्षाविद शामिल हैं, जिनकी पृष्ठभूमि RSS से जुड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भाजपा के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है।
यदुनाथ देशपांडे, जो फिलहाल शिक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं, लंबे समय तक ABVP से संगठनात्मक रूप से जुड़े रहे हैं। संगठन के अपने रिकॉर्ड के मुताबिक, वह पहले महाराष्ट्र में ABVP के संयुक्त प्रदेश संगठन मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने ABVP की मुंबई-कोंकण इकाई में संगठन मंत्री के रूप में भी काम किया।
उनकी LinkedIn प्रोफाइल में उन्हें भाजपा के लिए राजनीतिक सलाहकार भी बताया गया है।
प्रशांत दिवेकर लंबे समय से पुणे स्थित ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े रहे हैं, जिसे RSS से संबद्ध संस्था बताया जाता है। इसकी स्थापना 1962 में RSS के सदस्य और प्रचारक विनायक विश्वनाथ ने की थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल में दिवेकर ने अपने दृष्टिकोण को "भारतीय शैक्षिक दर्शन में निहित" बताया है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework) में योगदान दिया है। JNU के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज की प्रोफेसर वंदना मिश्रा ABVP की पूर्व राष्ट्रीय सचिव हैं।
JNU के सेंटर फॉर कम्पेरेटिव पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल थ्योरी के एसोसिएट प्रोफेसर रवि रमेशचंद्र शुक्ला, इंडियन जर्नल ऑफ डेमोक्रेटिक गवर्नेंस के संपादकीय बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। इस जर्नल का प्रकाशन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप-रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी द्वारा किया जाता है, जिसे RSS से संबद्ध संस्था बताया गया है। 2021 में देवेंद्र फडणवीस इसके अध्यक्ष बने थे।
शुक्ला ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राष्ट्रवाद पर केंद्रित शोध भी किया है। वह ICSSR द्वारा वित्तपोषित JNU के एक प्रोजेक्ट "भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आकार देने में मेलों की भूमिका: कुंभ और माघ मेले का अध्ययन" के प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) हैं।
टीम में JNU के प्रकाश कांडपाल, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की नीधि गुप्ता, चाणक्य यूनिवर्सिटी के चेतन सिंघई, दिल्ली यूनिवर्सिटी की सुकांशिका वत्स, IGNOU के सतीश कुमार, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ के दीवांशु श्रीवास्तव, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के प्रणव गुप्ता, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के नंदा किशोर और उत्कल यूनिवर्सिटी की स्वप्ना प्रभुभी शामिल हैं। अन्य सदस्यों में NCERT की सविता सागर, बेंगलुरु स्थित गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज के एम. एन. सुरेश कुमार, नवी मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन स्कूल की डायना इसाबेलऔर SHVNM गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर गर्ल्स की एन. भारानी शामिल हैं।
NCERT के वंथांगपुई खोबुंग और सुभाष सिंह क्रमशः सदस्य समन्वयक और सह-समन्वयक होंगे। NCERT की अधिसूचना के मुताबिक, यह टीम सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, पर्यावरण शिक्षा, नवाचारी शिक्षण पद्धति और शिक्षण-अधिगम सामग्री से जुड़े करिकुलर एरिया ग्रुप्स से मार्गदर्शन लेगी। इसके अलावा, टीम अन्य करिकुलर एरिया ग्रुप्स से भी विचार-विमर्श करेगी, ताकि अलग-अलग कक्षाओं के पाठ्यक्रमों के बीच तालमेल, विभिन्न विषयों के बीच अंतर्विषयक संबंध और बहुभाषी दृष्टिकोण को सुनिश्चित किया जा सके।
NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि,
प्रत्येक पाठ्यपुस्तक की समीक्षा की जाएगी, ताकि सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, समावेशिता, शैक्षिक प्रौद्योगिकी और मूल्यांकन जैसे विभिन्न व्यापक विषयों के समुचित समावेश की निगरानी की जा सके।