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अमेरिका में RSS प्रमुख मोहन भागवत पर लगेगा प्रतिबंध?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
अमेरिका में RSS प्रमुख मोहन भागवत पर लगेगा प्रतिबंध?

USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS प्रमुख भागवत के कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है।

अगर आप भूले नहीं हों तो याद दिलाना जरूरी है कि 2002 के गुजरात दंगे के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को मार्च 2005 में अमेरिका ने राजनयिक वीजा देने से इनकार कर दिया था। इतना ही नहीं 2002 के गुजरात दंगों के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन से जुड़े प्रावधानों के तहत उनका पहले से मौजूद पर्यटक/व्यावसायिक वीजा भी रद्द कर दिया गया था। हालांकि ये बात अलग है कि 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री चुने गए और फिर न जाने वो कितनी बार अमेरिका की राजनयिक यात्रा कर चुके हैं। लेकिन उस दौरान भारत के किसी राजनेता के विदेश जाने पर प्रतिबंध लगाने का यह मामला लगातार सुर्खियों में रहा था और यह एक बदनुमा धब्बा बन गया था।

यह सच है कि इतिहास दोहराता है। अब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में होने वाले कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की अपील की गई है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से RSS प्रमुख भागवत के कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। बता दें कि USCIRF का यह बयान ऐसे समय आया है, जब RSS प्रमुख भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अध्यक्ष और पाकिस्तानी-अमेरिकी चिकित्सक आसिफ महमूद तथा आयुक्त जीन मिल्स की टिप्पणियां साझा कीं।


महमूद ने,

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वैचारिक मूल संगठन RSS को एक ‘अम्ब्रेला ऑर्गेनाइजेशन’ बताते हुए आरोप लगाया कि उससे जुड़े संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।

वहीं, जीन मिल्स ने कहा कि,

RSS नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों या कूटनीतिक सुविधाओं का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से उन RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें धर्म या आस्था की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया गया हो।


ये टिप्पणियां USCIRF की मार्च में जारी वार्षिक रिपोर्ट के बाद आई हैं। उस रिपोर्ट में आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को लेकर आलोचना की थी और RSS और भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।

USCIRF की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में,

अमेरिका से भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों को लेकर “Country of Particular Concern” यानी “विशेष चिंता वाला देश” घोषित करने की भी सिफारिश की गई थी। इसके साथ ही आयोग ने RSS और RAW जैसी संस्थाओं के खिलाफ संपत्ति फ्रीज करने और अमेरिका में प्रवेश पर रोक जैसे प्रतिबंधों की बात कही थी।

भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को सख्ती से खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने आयोग पर भारत की “पक्षपातपूर्ण” तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। मंत्रालय का कहना था कि USCIRF लगातार “संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक आख्यानों” के आधार पर भारत की “विकृत और चुनिंदा” तस्वीर पेश करता रहा है।

भारत ने आयोग से अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमलों और तोड़फोड़ के साथ-साथ भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर भी ध्यान देने को कहा था। इस साल 16 मार्च को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा था कि,

भारत की आलोचना जारी रखने के बजाय USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले और तोड़फोड़, भारत को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाए जाने तथा अमेरिका में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाओं पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ये घटनाएं गंभीर ध्यान देने योग्य हैं।

USCIRF अमेरिकी संघीय सरकार की एक एजेंसी है, लेकिन इसकी भूमिका पूरी तरह सलाहकारी है। आयोग की सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं।

इस बीच, मोहन भागवत RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा करने वाले हैं। यह दौरा 25 अगस्त से शुरू होने की संभावना है। उन्हें भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े विभिन्न स्थानीय संघों और संगठनों ने आमंत्रित किया है। अपनी तीन देशों की यात्रा के दौरान भागवत के भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात और संवाद करने की उम्मीद है।