राहुल गांधी के सात घंटे घंटे के धरने के बाद झुकी Delhi Police, पैलेट गन मामले में FIR दर्ज
राहुल गांधी ने पुलिस को चेतावनी दी थी कि, अगर FIR दर्ज नहीं की गई तो मैं 30 दिन या छह महीने तक भी पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठूंगा।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी जब लगातार सात घंटे तक संसद मार्ग थाने पर धरना पर बैठे रहे तब जाकर दिल्ली पुलिस नेआखिरकार 19 वर्षीय छात्र प्रदर्शनकारी साहिल लोचब के मामले में FIR दर्ज कर ली है।
साहिल को 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान पैलेट गन से चोटें लगी थीं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, साहिल के साथ दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर धरने पर बैठ गए थे और FIR दर्ज होने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया था।
राहुल गांधी ने पुलिस को चेतावनी दी थी कि,
अगर FIR दर्ज नहीं की गई तो मैं 30 दिन या छह महीने तक भी पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठूंगा।
पुलिस ने साहिल की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज इकट्ठे किए और उसकी शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। पुलिस ने यह जानकारी दी।
राहुल गांधी ने कहा,
यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। FIR दर्ज हो गई है। देखिए इसमें कितना समय लगा। पैलेट चलने को एक महीना हो चुका है। उसके शरीर में पैलेट फंसे हुए हैं, जिनमें से तीन उसकी आंख में हैं। यह स्पष्ट है कि साहिल के साथ अन्याय हुआ है।"
राहुल गांधी ने बताया कि वे सुबह करीब 11:30 बजे वहां पहुंचे थे और लगभग सात घंटे बाद FIR दर्ज की गई।
उन्होंने कहा,
"हम आज सुबह करीब 11:30 बजे यहां आए थे। और अब शाम के 6:30, लगभग 7 बज चुके हैं और तभी FIR दर्ज हुई है। यह नई दिल्ली के बिल्कुल बीचोंबीच स्थित एक पुलिस स्टेशन है और यहां न्याय नहीं मिल रहा है। अब सोचिए कि किसी गांव या छोटे शहर के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा। हमने कुछ गलत नहीं किया है। हमने केवल एक भारतीय नागरिक, उसकी मां और उसके पिता के लिए न्याय की मांग की है।"
साहिल ने पत्रकारों से कहा,
"मुझे विश्वास था कि अगर विपक्ष के नेता यहां हैं, तो उन्हें शिकायत दर्ज करनी ही पड़ेगी। आपको विश्वास बनाए रखना होगा। जब तक देश में उनके जैसे जननायक हैं, आपको चुप नहीं कराया जा सकता।"
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा अत्यधिक और असंगत बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए एक High-Powered Expert Committee (HPEC) गठित की है। इसी आधार पर पुलिस ने पहले FIR दर्ज करने से इनकार किया था।
धरने के दौरान राहुल गांधी ने X पर लिखा कि
20 जुलाई को पुलिस ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पैलेट गन से हमला किया था। इसके कारण साहिल की एक आंख की रोशनी खतरे में है।
पैलेट गन का इस्तेमाल पहली बार 2010 में कश्मीर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया गया था। इसके अलावा शॉक बैटन भी Rapid Action Force (RAF) के उपकरणों में शामिल हैं। RAF, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की दंगा-नियंत्रण इकाई है, जिसे जंतर-मंतर पर तैनात किया गया था। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान इनके इस्तेमाल को लेकर CRPF ने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। लेकिन The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की डायरी में 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों के संसद मार्च के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का रिकार्ड दर्ज है
बता दें कि पुलिस मैनुअल और SOP के अनुसार, ऐसी गन को कम से कम 500 फीट की दूरी से चलाया जाना चाहिए और इसका निशाना कमर के नीचे होना चाहिए।
गौरतलब है कि राहुल गांधी का धरना कई घंटों तक चलता रहा। इसी दौरान राहुल गांधी साहिल के साथ कैमरों और पत्रकारों के सामने आए और उन्होंने एक छोटी प्लास्टिक की डिब्बी हाथ में उठाई। डिब्बी खोलकर उन्होंने उसमें मौजूद चीजें अपनी हथेली पर निकालकर पत्रकारों को दिखाईं।
राहुल गांधी ने कहा,
"ये हैं पैलेट्स, देख लीजिए इनको, अच्छी तरह से देख लीजिए, ये हैं पैलेट्स।"
इसके बाद गांधी ने पूछा कि ये छर्रे कहां से आए और खुद ही जवाब दिया:
"ये इनके शरीर से आए हैं।"
उन्होंने साहिल से अपनी चोटें दिखाने को कहा। काले चश्मे पहने साहिल ने अपनी टी-शर्ट की आस्तीन ऊपर की और चोटों को दिखाया।
राहुल गांधी ने कहा,
"ये छर्रे इनके यहां लगे हैं। 200 छर्रे इनके शरीर के अंदर हैं और तीन छर्रे इनकी आंख में हैं।"
इसके बाद उन्होंने Lady Hardinge Medical College और AIIMS की रिपोर्टें दिखाईं और कहा कि इन रिपोर्टों में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की जानकारी दी गई है।
साहिल लोचब ने पत्रकारों से कहा कि घटना 20 जुलाई को हुई थी। उन्होंने कहा,
"20 जुलाई को मुझ पर पैलेट गन चलाई गई। मुझे Lady Hardinge में भर्ती कराया गया और वहां से AIIMS भेजा गया। AIIMS में मेरी सर्जरी हुई, लेकिन मेरी आंख की रोशनी अभी भी साफ नहीं है। 14 अगस्त को मैंने सात पन्नों की शिकायत लिखी और अपने वकील को दी, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई।"
उनके वकील ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने की कोशिश के दौरान उन्हें Connaught Place Police Station और Parliament Street Police Station के बीच बार-बार भेजा गया।
वकील ने बताया,
"14 अगस्त को हम Connaught Place पुलिस स्टेशन गए। वहां बताया गया कि जंतर-मंतर से जुड़े सभी मामले Parliament Street Police Station को ट्रांसफर कर दिए गए हैं। हम वहां गए, लेकिन उन्होंने कहा कि घटना की जगह Connaught Place क्षेत्र में आती है और हमें वहां जाना चाहिए। हम वापस वहां गए।"
वकील के अनुसार, पुलिस ने शिकायत पढ़ने के बाद उसे वापस कर दिया और उन्हें काफी देर तक इंतजार करवाया।
वकील ने आरोप लगाया,
"SHO ने मुझसे फोन पर व्यक्तिगत रूप से बात की और कहा कि वे इस मामले को नहीं लेंगे और उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं।"
इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए "बर्बर हमले" के लिए जवाबदेही की मांग की थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या युवाओं के खिलाफ पैलेट गन जैसी "घातक ताकत" के इस्तेमाल को उनकी मंजूरी थी।
बता दें कि जुलाई में राहुल गांधी ने पेपर लीक और छात्रों पर हुए हमले के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च किया था। कुछ घंटों बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया था। वह सड़क पर बैठ गए थे और वहां से हटने से इनकार कर दिया था।आखिरकार उन्हें पुलिस द्वारा वहां से ले जाया गया और उस समय उनकी नाक से खून निकलता हुआ भी दिखाई दिया।