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दो आयुक्तों ने Form 6 में बदलाव को बताया था ‘गैरकानूनी’, फिर भी CEC ज्ञानेश कुमार नहीं माने

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
दो आयुक्तों ने Form 6 में बदलाव को बताया था ‘गैरकानूनी’, फिर भी CEC ज्ञानेश कुमार नहीं माने

दो चुनाव आयुक्तों ने Form 6 में किए गए बदलाव को “गैरकानूनी” और “अनधिकृत” बताया था।

चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव को “गैरकानूनी” और “अनधिकृत” बताया था। दोनों आयुक्तों ने कहा था कि इस बदलाव को केंद्र सरकार के पास भेजा जाना चाहिए और जब तक नियमों में संशोधन न हो, तब तक इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। हालांकि, उनके स्पष्ट विरोध के बावजूद यह बदलाव आयोग के पोर्टल पर बना रहा।

नए मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए Form 6 भरना होता है। SIR यानी Special Intensive Revision के तहत इस फॉर्म में एक नया सवाल जोड़ा गया।

इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से एक चुनना था:

  1. क्या उसका नाम 2000 के दशक की शुरुआत में हुई पिछली SIR के दौरान बनी मतदाता सूची में था?
  2. क्या उसके माता या पिता/दादा-दादी में से किसी का नाम उस मतदाता सूची में था?
  3. क्या न तो उसका और न ही उसके माता-पिता का नाम उस समय की मतदाता सूची में था?

The Indian Express की Investigative Reporter Ritika Chopra की जांच में सामने आए चुनाव आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह घोषणा दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद Form 6 में जोड़ी गई। दोनों आयुक्तों ने मई में कहा था कि ऐसा बदलाव Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना नहीं किया जा सकता। ये नियम केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग से परामर्श के बाद अधिसूचित किए थे।


16 मई को चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने SIR के तहत Form 6 में बदलाव के प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने कहा था कि SIR को Representation of the People Act, 1950 की धारा 21(3) के तहत “एक बार के उपाय और अपवाद” के रूप में कराया जा रहा है।

जोशी ने कहा था कि,

SIR के लिए बनाए गए फॉर्म इसी विशेष प्रक्रिया के लिए हैं और वे गैर-कानूनी यानी non-statutory हैं। वहीं Form 6 और Form 8 जैसे फॉर्म कानून के तहत निर्धारित हैं। इसलिए इनमें बदलाव Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि,

SIR के किसी आदेश या दिशा-निर्देश में एक वाक्य जोड़कर कानून के तहत निर्धारित Form 6 को नहीं बदला जा सकता।

जोशी ने सुझाव दिया था कि,

कानूनी रूप से उचित रास्ता यही होगा कि प्रस्ताव को नियमों में बदलाव के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि Form 6 और Form 8 में प्रस्तावित बदलावों का मसौदा तुरंत चुनाव आयोग के सामने रखा जाना चाहिए।

19 मई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी जोशी की राय से सहमति जताई थी।

12 जुलाई को The Indian Express ने चुनाव आयोग के ECINet पोर्टल पर Form 6 में जोड़े गए इस नए घोषणा-पत्र के बारे में पहली बार रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके बाद 13 अगस्त को संधू ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर और आईटी से जुड़े डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखा। इस पत्र की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को भी दी गई थी।

संधू ने 16 मई की जोशी की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि,

Form 6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसे संबंधित नियमों में बदलाव किए बिना नहीं बदला जा सकता।

उन्होंने लिखा कि,

दो चुनाव आयुक्तों की स्पष्ट राय के बावजूद पोर्टल पर Form 6 में किए गए “अनधिकृत/गैरकानूनी बदलाव” को हटाया नहीं गया और मूल फॉर्म को बहाल नहीं किया गया।

संधू ने कहा कि,

बदलाव को तुरंत हटाया जाना चाहिए, ताकि योग्य युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग बिना किसी परेशानी के कानून के मुताबिक अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकें। मत देने का अधिकार व्यक्ति की उम्र, नागरिकता और निवास जैसी कानूनी योग्यताओं पर निर्भर करता है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसके माता-पिता का नाम पिछली मतदाता सूची में था या नहीं।

ऐसे में Form 6 में SIR से जुड़ा यह सवाल खास तौर पर उन नए मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो गया, जिनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के बाद तैयार मतदाता सूची में नहीं था। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी 18 वर्षीय व्यक्ति के परिवार का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में नहीं था, तो वह पहले दो विकल्पों में से किसी को भी सही तरीके से नहीं चुन सकता था। वहीं, फॉर्म में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि तीसरा विकल्प चुनने पर आगे क्या होगा।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक नामों को ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाया जा चुका है।
Form 6 में बदलाव के लिए पहले से एक स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। 2021 में संसद ने Representation of the People Act, 1950 में संशोधन किया था। इसके तहत चुनाव आयोग को मतदाताओं से आधार नंबर लेने की अनुमति दी गई।

इसके बाद Form 6 में संबंधित बदलाव चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर नहीं किया था। 17 जून 2022 को कानून मंत्रालय के Legislative Department ने Registration of Electors Rules में जरूरी संशोधन और Form 6 में बदलाव की अधिसूचना जारी की थी। इसी कानूनी व्यवस्था के बीच इस साल SIR से जुड़ा Form 6 में बदलाव का प्रस्ताव चुनाव आयोग के सामने आया, जिस पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।