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उद्घाटन के 17 दिन बाद ही ढह गया देहरादून में बना नया पुल

TCN News Desk TCN News Desk | 2h ago
उद्घाटन के 17 दिन बाद ही ढह गया देहरादून में बना नया पुल

देहरादून के नंदा की चौकी पर बना नया पुल उद्घाटन के महज 17 दिन बाद ही ढह गया।

उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच देहरादून और आसपास के इलाकों में बुनियादी ढांचे की मजबूती पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। देहरादून के नंदा की चौकी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बना नया पुल उद्घाटन के महज 17 दिन बाद ही ढह गया। मंगलवार तड़के लगातार बारिश के कारण पुल की अप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे पुल सीधे देहरादून-पांवटा साहिब हाईवे से कट गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि पुल का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल अप्रोच रोड तक सीमित है।


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PTI के अनुसार, रातभर हुई तेज बारिश के चलते पुल के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और वहां गहरा गड्ढा बन गया। घटना के बाद हाईवे पर यातायात रोक दिया गया और वाहनों को झाझरा मार्ग से डायवर्ट किया गया। इससे देहरादून, विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के बीच आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि,

यह पुल 12 जुलाई को ट्रैफिक के लिए खोला गया था। इसकी मूल निर्माण समय-सीमा 30 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन काम में देरी के बाद इसे जुलाई में शुरू किया गया। यह नया पुल उसी स्थान पर बनाया गया था जहां पिछले साल सितंबर में पुराना पुल बारिश के दौरान बह गया था। उस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद जल्द से जल्द नया पुल तैयार करने का फैसला लिया गया था।

घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मामले की जांच के आदेश देते हुए कहा कि यदि निर्माण कार्य या गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को घटनास्थल का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए।

लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव पंकज कुमार पांडे ने बताया कि विभाग के मुख्य अभियंता को पूरे मामले की जांच कर तीन दिनों के भीतर सरकार को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती जांच में किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार सड़क को जल्द से जल्द दोबारा चालू करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार ने बताया कि टोंस नदी का जलस्तर अधिक होने के कारण मरम्मत कार्य में शुरुआती दिक्कत आई। प्रशासन नदी का बहाव कम होने का इंतजार कर रहा था ताकि सुरक्षित तरीके से मिट्टी भरकर सड़क को बहाल किया जा सके। वहीं, सिंचाई विभाग की टीमों को भी मौके पर तैनात किया गया ताकि नदी के बहाव को नियंत्रित कर आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि,

लगभग एक साल तक निर्माण कार्य चलने और 16 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पुल की अप्रोच रोड कुछ ही दिनों में धंस जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि इतनी बड़ी परियोजना में गुणवत्ता की निगरानी किसने की और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस मामले में संबंधित विभाग और मंत्री की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर तेजी से काम किया गया है। अधिकारियों के अनुसार अस्थायी मरम्मत के बाद ट्रैफिक दोबारा शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि पुल का स्ट्रक्चरल डिज़ाइन सुरक्षित है और प्राथमिकता सड़क को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोलने की थी। उन्होंने बताया कि मौसम अनुकूल रहने पर मार्ग पूरी तरह सामान्य कर दिया जाएगा।

इधर लगातार बारिश का असर चारधाम यात्रा पर भी देखने को मिला। मुनकटिया क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण केदारनाथ हाईवे कुछ समय के लिए बाधित हो गया। प्रशासन ने तुरंत भारी मशीनें लगाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया और मार्ग को सुरक्षित बनाने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह राजवार ने बताया कि,

लगातार बारिश के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर सड़क अचानक बंद हो सकती है, इसलिए यात्रियों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस, सेक्टर अधिकारी और बचाव दल लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका भी जा रहा है।

प्रशासन के अनुसार यात्रा कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे मौसम और सड़क की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर यात्रियों, स्थानीय दुकानदारों और यात्रा मार्ग पर मौजूद लोगों को लगातार लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से सतर्क किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।