एशिया का सबसे कम पसंद किए जाने वाला शेयर मार्केट बना भारत: BofA Poll
निवेशक अपने पोर्टफोलियो में भारतीय शेयरों को सामान्य या बेंचमार्क स्तर से भी कम हिस्सेदारी दे रहे हैं।
भारतीय शेयर मार्केट के लिए एक बुरी खबर है। बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्प (BofA) के नवीनतम फंड मैनेजर सर्वे में भारत ने एशिया के सबसे कम पसंद किए जाने वाले शेयर मार्केट का स्थान ले लिया है। इससे पहले यह स्थान इंडोनेशिया का था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार को लेकर निवेशकों में बढ़ती सतर्कता और चिंता को दिखाता है।
कमाल की बात ये है कि कुछ भारतीय उद्योगपतियों की कमाई जहां दिन दुनी रात चौगुनी हो रही है वहीं भारतीय शेयर मार्केट को लेकर निवेशकों का रुझान कम हो रहा है। निवेशक अभी भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने से हिचक रहे हैं। निवेशकों को डर सता रहा है कि कहीं उन्हें घाटा न हो जाए या फिर उनका निवेश डूब न जाए।
BofA के सर्वे में शामिल 32 प्रतिशत फंड मैनेजर भारतीय शेयरों पर नेट अंडरवेट थे। यानी ये निवेशक अपने पोर्टफोलियो में भारतीय शेयरों को सामान्य या बेंचमार्क स्तर से कम हिस्सेदारी दे रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार को लेकर निवेशकों की चिंता की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में स्पष्ट और मजबूत एक्सपोजर का अभाव है। इसके अलावा, कमजोर होती आर्थिक वृद्धि, सुधारों की कमी और शेयरों का ऊंचा वैल्यूएशन भी निवेशकों के नकारात्मक रुख की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। इसके विपरीत, इंडोनेशिया को लेकर निवेशकों का रुख बेहतर हुआ है। सर्वे में 27 प्रतिशत फंड मैनेजर इंडोनेशियाई बाजार पर नेट अंडरवेट थे, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत था। वहीं, ताइवान और जापान निवेशकों के सबसे पसंदीदा एशियाई बाजार बने हुए हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका के इस सर्वे में कुल 98 फंड मैनेजरों ने हिस्सा लिया, जो करीब 272 अरब डॉलर की संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। सर्वे के लिए जवाब 7 अगस्त से 13 अगस्त के बीच लिए गए थे। सर्वे के नतीजे ऐसे समय सामने आए हैं, जब भारतीय कंपनियों की कमाई का आउटलुक बेहतर होने के बावजूद पिछले दो हफ्तों में भारतीय शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि फंडामेंटल में सुधार के बावजूद निवेशक भारतीय बाजार को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
हालांकि, विदेशी निवेश के मोर्चे पर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक फंडों ने इस तिमाही में 4 अरब डॉलर से ज्यादा के भारतीय शेयर खरीदे हैं। क्षेत्रीय उभरते बाजारों में यह सबसे अधिक निवेश है। इससे पहले साल की पहली छमाही में भारतीय बाजार से रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी पूंजी निकाली गई थी।
कॉरपोरेट कमाई ने भी बाजार को कुछ सहारा दिया है। बेंचमार्क NSE Nifty 50 में शामिल कंपनियों का मुनाफा नवीनतम तीन महीने की अवधि में पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत बढ़ा। यह मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के 10 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान से भी काफी अधिक रहा। इससे पहले मई में भी BofA के सर्वे में भारतीय शेयर बाजार को एशिया का सबसे कम पसंद किया जाने वाला बाजार बताया गया था। उस समय अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भारत की बढ़ती ऊर्जा लागत ने आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं।
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के समाधान के फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देने के कारण तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़ रही हैं। इसका असर भारत को लेकर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ रहा है। Nifty 50 अपने मार्च के हालिया निचले स्तर से करीब 8 प्रतिशत ऊपर आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद इस साल अब तक इसमें करीब 8 प्रतिशत की गिरावट है। इस प्रदर्शन के साथ यह एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बाजार बना हुआ है।
अगर यही स्थिति बनी रहती है तो Nifty 50 की लगातार 10 वर्षों तक सालाना बढ़त दर्ज करने की ऐतिहासिक श्रृंखला भी टूट सकती है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया को लेकर निवेशकों की धारणा में सुधार के पीछे वहां के शेयर बाजार की मजबूत वापसी है। जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स जून के निचले स्तर से 20 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ चुका है। इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा को स्थिर करने के लिए उठाए गए कदम और MSCI द्वारा देश को फ्रंटियर-मार्केट का दर्जा दिए जाने की आशंका कम होने से भी बाजार को समर्थन मिला है।