दिल्ली की भाजपा सरकार ने 700 करोड़ के मेडिकल घोटाले से जुड़ी फाइलों को जानबूझकर किया नष्ट: ACB
मामले के एक प्रमुख आरोपी राजीव रंगीला को 30 जून को एक जबरन वसूली के मामले में अग्रिम जमानत मिली थी। इसके कुछ दिनों बाद ही वह भारत से फरार हो गया।
दिल्ली की भाजपा सरकार में 700 करोड़ रुपये के मेडिकल खरीद घोटाले से जुड़ी फाइलों को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट को यह जानकारी दी है।
Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल खरीद घोटाले से जुड़ी इन महत्वपूर्ण फाइलों स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) और सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) द्वारा की गई खरीद से संबंधित रिकॉर्ड थे। जाहिर है मेडिकल उपकरण, दवाइयाँ और टीकों की खरीद में जो बड़े पैमाने पर सरकारी एजेंसी ने घोटाला किया है वो सामने आ जाता और दिल्ली की भाजपा सरकार अदालत में दोषी साबित हो जाती।
विपक्ष यानी आम आदमी पार्टी ने कोर्ट की इस टिप्पणी के हवाले से दिल्ली की भाजपा सरकार पर एसीबी की जांच के दौरान फाइलों को नष्ट किए जाने की घटना को आपराधिक कृत्य कहा है।
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने एक्स पोस्ट में कहा है कि,
क्या यह मज़ाक है कि विजिलेंस जांच चलने के दौरान दिल्ली सरकार से दर्जनों फाइलें निकाल ली जाएं और उन्हें नष्ट कर दिया जाए? घोटाले के मास्टरमाइंड “राजीव रंगीला” को भारत से भागने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह घोटाला सिर्फ दो सरकारी डॉक्टरों और एक अकाउंटेंट तक सीमित नहीं था। इस घोटाले का पैसा भाजपा के दो बड़े नेताओं तक पहुंचा, इसीलिए इस मामले में लीपापोती और पर्दा डालने का काम ऊपर से मैनेज किया जा रहा है।
बता दें कि CPA दिल्ली सरकार के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दवाइयां, टीके और चिकित्सा उपकरण खरीदने और उनकी आपूर्ति करने वाली प्रमुख एजेंसी है। जांच के मुताबिक,
एक्स-रे मशीनों, सी-आर्म मशीनों और लिनेन समेत विभिन्न वस्तुओं की निविदाओं से जुड़ी फाइलों में उन अधिकारियों का विवरण था, जिन्होंने टेंडर दस्तावेज तैयार किए और उसकी शर्तें तय की थीं। इन फाइलों में तकनीकी और वित्तीय रूप से निविदाओं का मूल्यांकन करने वाले अधिकारियों के नाम भी दर्ज थे।
पिछले सप्ताह ACB ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने इन फाइलों को जानबूझकर नष्ट किया और अपराधों से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को गायब कर दिया।
इस घोटाले में प्रमुख आरोपियों में पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल, CPA के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और CPA के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा शामिल हैं।
सोमवार को अदालत ने रंगा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं मंगलवार को विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने अग्रवाल को चिकित्सा आधार पर चार सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। अग्रवाल ने अंतरिम जमानत की मांग करते हुए हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की धड़कन तेज होने और रीढ़ की चोट समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया था।
न्यायाधीश प्रकाश ने मंगलवार को कहा कि आरोपी की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, मामले की मेरिट या उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता पर विचार किए बिना और पूरी तरह मानवीय आधार पर अदालत का मानना है कि आवेदक/आरोपी को चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।”
यह मामला सतर्कता विभाग की एक शिकायत से जुड़ा है, जिसे 2 जून को FIR में तब्दील किया गया था। आरोप है कि दवाइयों, सर्जिकल सामान और अस्पताल के उपकरणों के लिए आवंटित सरकारी धन के इस्तेमाल में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, टेंडरों में हेरफेर किया गया और सार्वजनिक धन की हेराफेरी की गई। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 18 जून को हुई थी।
मामले के एक प्रमुख आरोपी राजीव रंगीला को 30 जून को एक जबरन वसूली के मामले में अग्रिम जमानत मिली थी। इसके कुछ दिनों बाद ही वह भारत से फरार हो गया। दवा सप्लायर और फार्मास्यूटिकल कारोबारी रंगीला अभी भी फरार है, ACB ने अदालत को बताया। रंगा ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि रंगीला के लापता होने के कारण ACB जांच पूरी नहीं कर पा रही है और इस वजह से उसकी स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। उसने यह भी दावा किया कि उसने सभी फैसले अग्रवाल की मंजूरी के बाद ही लिए थे।
ACB के अनुसार,
आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत निविदाओं में आपसी मिलीभगत से प्रतिस्पर्धा सीमित करने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया और अवैध तरीकों से अपनी पसंद की “संस्थाओं” को टेंडर दिए।
एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि टेंडर में कारोबार, अनुभव और प्रदर्शन से जुड़ी पात्रता शर्तें जानबूझकर बहुत ऊंची रखी गईं, ताकि “दूसरे बोलीदाताओं को टेंडर में हिस्सा लेने से हतोत्साहित किया जा सके।”
ACB ने आगे आरोप लगाया कि सामान की आपूर्ति करने के बावजूद अन्य विक्रेताओं का भुगतान दो साल से अधिक समय तक रोके रखा गया। एजेंसी का यह भी दावा है कि,
DGHS या CPA को सप्लाई किए गए सामान से कोई संबंध नहीं रखने वाले व्यक्तियों के “सैकड़ों” बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई। ACB के मुताबिक, “इन खातों से करोड़ों रुपये या तो नकद निकाले गए या फिर सरकारी धन की हेराफेरी के लिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।