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मोदी सरकार के पसंदीदा अधिकारी रिटायर क्यों नहीं होते?

Ashok Kumar Pandey Ashok Kumar Pandey | 10 Aug, 2026 · 4 min read
मोदी सरकार के पसंदीदा अधिकारी रिटायर क्यों नहीं होते?

ED के निदेशक को एक और एक्सटेंशन का क्या मतलब है?

केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के निदेशक राहुल नवीन को एक साल का एक्सटेंशन दे दिया है। वह 13 अगस्त 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करने वाले थे, लेकिन अब 13 अगस्त 2027 तक ED निदेशक बने रहेंगे।




वैसे तो अधिकारियों के कार्यकाल का एक्सटेंशन पहले भी होता रहा है लेकिन मोदी सरकार में यह अपवाद की जगह नियम बनता चला गया है, खासतौर पर महत्त्वपूर्ण पदों पर लगातार अपने प्रिय अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा है।

  1. इसके पहले इस पद पर संजय कुमार मिश्र का कार्यकाल भी लगातार बढ़ता रहा। नवंबर, 2018 में संजय कुमार मिश्र को निदेशक बनाया गया था और वह नवंबर 2023 तक इस पद पर बने रहे। सरकार उनका कार्यकाल और बढ़ाने के लिए जुलाई, 2023 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सिर्फ़ अगस्त, 2023 का समय दिया था।
  2. अभी हाल में केंद्र सरकार ने कैबिनेट सेक्रेटरी टीवी सोमनाथन और होम सेक्रेटरी गोविंद मोहन का कार्यकाल एक-एक साल बढ़ाया था। सोमनाथन का कार्यकाल दो वर्षों का था लेकिन अब वह अगस्त 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे, जबकि गोविंद मोहन का कार्यकाल तो अगस्त 2025 में ही खत्म हो गया था लेकिन उन्हें एक के बाद एक, दो एक्सटेंशन दिए जा चुके हैं।
  3. होम सेक्रेटरी अजय कुमार भल्ला (2019-2024) और कैबिनेट सेक्रेटरी पी के सिन्हा का का कार्यकाल भी इसी तरह एक-एक साल तक अधिकतम संभव सीमा तक बढ़ाया जाता रहा था।
  4. ऐसे ही आई पी एस तपन कुमार डेका को इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक पद पर पहले 2024 में एक साल और फिर मई 2025 में दो साल का एक्सटेंशन देकर इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड स्थापित कर दिया गया। अब वह कम से कम मई 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे। इस पद पर अधिकतम समय सीमा 2005 में दो वर्षों की तय की गई थी लेकिन डेका कम से कम 5 वर्षों तक इस पद पर बने रहेंगे। उनके पहले अरविन्द कुमार भी इस पद पर दो वर्षों से ज़्यादा समय तक बने रहे।


इस मामले में एक रोचक कहानी देश के सबसे पॉवरफुल नौकरशाह प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल की है। 1972 बैच के गुजरात कैडर के आई ए एस अधिकारी प्रमोद कुमार मिश्र 2001 से 2004 के बीच में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब उनके मुख्य सचिव बने। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी उन्हें दिल्ली ले लाए और रिटायर होने के बाद भी 11 सितंबर 2019 को उन्हें प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया। 2024 में अजित डोवाल और पी के मिश्रा को पाँच साल का एक्सटेंशन दे दिया गया। इस जोड़ी को देश की सबसे ताक़तवर जोड़ी बताया जाता है।


उदाहरण तो और भी हैं लेकिन सवाल यह है कि आखिर नए लोगों को नियुक्त करने की जगह इतने महत्त्वपूर्ण पदों पर लगातार कार्यकाल क्यों बढ़ाया जाता है? क्या नौकरशाही में योग्य लोगों की कमी है? अगर मिश्रा-डोवाल की जोड़ी को देखें तो मिश्रा 78 वर्ष के हो चुके हैं और 81 साल के डोवाल दुनिया के सबसे अधिक उम्र के NSA हैं। क्या इनकी उम्र इनकी कार्यक्षमता को प्रभावित नहीं करती होगी? या फिर नरेंद्र मोदी और अमित शाह दूसरे अधिकारियों पर भरोसा नहीं कर पाते?

ई डी का मामला अगर देखें तो पिछले वर्षों में उस पर सरकार के हितों के अनुरूप काम करने का लगातार आरोप लगा है। विपक्ष के नेताओं को घेरे में लेने से लेकर जेल भेजने तक में ई डी की बड़ी भूमिका रही है। कई बार विपक्ष के नेताओं के दल-बदल करके भाजपा में आने में भी ईडी के रोल पर बात हुई है। ज़ाहिर है कि ऐसे में ईडी के निदेशक का पद सरकार के लिए महत्त्वपूर्ण हो ही जाता है।

लोकतंत्र में परिवर्तन बेहद मूलभूत आवश्यकता है। पाँच साल पर चुनाव सत्ता परिवर्तन सरकार बदलने के लिए है तो उच्चतम पदों पर फिक्स कार्यकाल अधिकारियों को बदलते रहने के लिए। कोई एक जगह जब बहुत लंबे समय तक रह जाता है तो स्वाभाविक रूप से उसके भीतर तानाशाही प्रवृत्तियां पैदा होंगी ही। इसी को रोकने के लिए संविधान में व्यवस्थाएं की गई थीं।


लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार में जिस तरह से प्रिय अधिकारियों को लगातार एक्सटेंशन दिया जाता है वह यह साफ़ करता है कि सरकार इस परिवर्तन की जगह अपने पसंदीदा अधिकारियों को लगातार पद पर बनाए रखना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश अगर न आया होता तो शायद नवंबर, 2018 में ईडी के निदेशक बने संजय कुमार मिश्रा अब भी इस पद पर बने रहते और जहाँ तक मिश्रा और डोवाल की जोड़ी का सवाल है। ऐसा लगता है कि मोदी उनके अलावा किसी और को प्रधान सचिव और एन एस ए बनाने की सोच ही नहीं पा रहे हैं।

वैसे वह यह भी कहाँ सोच पा रहे हैं कि एक दिन वह खुद भी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे।

Ashok Kumar Pandey

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Ashok Kumar Pandey is the Managing Editor of The Credible News.