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क्यों कोलकाता का एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स है विवाद में?

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 4 min read
क्यों कोलकाता का एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स है विवाद में?

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एकेडमी के टिकट काउंटर के रूप में इस्तेमाल होने वाले कमरे को भगवा रंग से रंग दिया।

भगवा से सफेद और फिर वापस भगवा। कोलकाता की एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स का एक कमरा सत्तारूढ़ बीजेपी और वामपंथ के बीच नए विवाद का केंद्र बन गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हराकर बीजेपी के सत्ता में आने के दो महीने बाद, 12 जुलाई को कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एकेडमी के टिकट काउंटर के रूप में इस्तेमाल होने वाले कमरे को भगवा रंग से रंग दिया। माना गया कि ऐसा नई सरकार के प्रति समर्थन दिखाने के लिए किया गया।

Indian Express की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका कई वामपंथी रुझान वाले बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने कड़ा विरोध किया। एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों में से एक है, जहां एक गैलरी के साथ कई बड़े कलाकारों की कलाकृतियां मौजूद हैं। इसके बाद प्रसिद्ध रंगमंच अभिनेता चंदन सेन के नेतृत्व में कुछ वामपंथी बुद्धिजीवियों ने बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से मुलाकात की। उन्होंने एकेडमी के टिकट काउंटर को भगवा रंग में रंगने का विरोध किया और उनसे इस संस्थान का राजनीतिकरण न होने देने की अपील की।

इस पर समिक भट्टाचार्य ने कहा,

जिन लोगों ने ऐसा किया है, उन्होंने गलती की है। रंग बदलने की राजनीति बीजेपी का उद्देश्य नहीं है। हर जगह हर चीज को रंगना बीजेपी के एजेंडे का हिस्सा नहीं है। आप उन लोगों की पहचान कीजिए, हम कार्रवाई करेंगे।

करीब एक महीने बाद, 11 अगस्त को वामपंथी कार्यकर्ताओं और रंगमंच कलाकारों का एक समूह एकेडमी पहुंचा और टिकट काउंटर वाले कमरे का रंग भगवा से बदलकर सफेद कर दिया। उनके साथ CPM नेता, पूर्व सांसद और वकील बिकाश भट्टाचार्य भी मौजूद थे। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों को भी वहां तैनात किया गया था। लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं का एक समूह पार्टी के शिबपुर विधायक रुद्रनील घोष के नेतृत्व में एकेडमी परिसर पहुंचा। फिल्म अभिनेता और निर्देशक रुद्रनील घोष की मौजूदगी में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने “जय श्री राम” और “वंदे मातरम” के नारों के बीच टिकट काउंटर वाले कमरे को दोबारा भगवा रंग में रंग दिया।

बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए घोष ने दावा किया,

आप यहां तस्वीर में देख सकते हैं कि इस टिकट काउंटर का मूल रंग भगवा था और उसके किनारे चॉकलेटी रंग के थे। हम केवल इसके पुराने रंग को वापस लाना चाहते हैं, जिसे पिछली TMC सरकार ने बदल दिया था। लेकिन कुछ वामपंथी लोग को बेवकूफ बनाने और यहां लाल झंडे लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पहले, यानी TMC शासन के दौरान, एकेडमी में हुए घटनाक्रम पर एक शब्द तक नहीं कहा। जब इसके प्रशासन ने गलत काम किए, तब इन कलाकारों ने कभी विरोध नहीं किया।

घोष ने यह भी आरोप लगाया कि वामपंथी बुद्धिजीवियों ने समिक भट्टाचार्य को गलत जानकारी दी थी।

उन्होंने कहा, “समिक बाबू ने राजनीति से मुक्ति का आह्वान किया था। हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं। अगर रंग फिर बदला गया, तो इसे दोबारा भगवा कर दिया जाएगा। जब भारत का पसंदीदा रंग भगवा है, तो आप भारत-विरोधी भाषा में क्यों बोल रहे हैं? उन्होंने समिक भट्टाचार्य को गुमराह किया। वह व्यस्त व्यक्ति हैं। किसी ने उन्हें नहीं बताया कि पहले यहां कौन-सा रंग था।”

वहीं समिक भट्टाचार्य ने कहा, “पहले कुछ लोगों ने वहां लाल झंडे लगाए। इसके बाद कुछ अन्य लोगों ने एकेडमी के कमरे को भगवा रंग से पेंट कर दिया। फिर कुछ बुद्धिजीवी मेरे पास आए। मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि एकेडमी में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी। इसके बावजूद CPM वहां क्यों गई, बिकाश भट्टाचार्य वहां क्यों गए? उन्होंने फिर रंग बदल दिया। स्वाभाविक रूप से, अगर कोई कार्रवाई होती है तो उसकी बराबर प्रतिक्रिया भी होगी। हम हर इमारत और स्थान को भगवा रंग में रंगने के खिलाफ हैं, क्योंकि भगवा त्याग का रंग है।”

रंगमंच अभिनेता चंदन सेन ने कहा कि,

टिकट काउंटर वाला कमरा कभी भी भगवा नहीं था और मूल रूप से उसका रंग टेराकोटा था।

उन्होंने कहा, “इस कमरे को भगवा रंग में रंगे जाने के बाद हमने राज्य सरकार, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के ट्रस्टी बोर्ड को पत्र लिखा था। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने हमें बुलाया। हमारे प्रतिनिधिमंडल ने उनके साथ बैठक की। उन्होंने 15 दिन का समय मांगा था। जब 15 दिन बाद भी उन्होंने कुछ नहीं किया, तो हमने खुद कुछ करने का फैसला किया और इसलिए इसे सफेद रंग में पेंट कर दिया गया।”

इस विवाद को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए वामपंथी फिल्म निर्माता कमलेश्वर मुखर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा,

बल प्रयोग के जरिए किसी राजनीतिक विचार या विचारधारा को स्थापित नहीं किया जा सकता।