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वीआईपी कूड़े के लिए 15 हज़ार का कूड़ेदान, बिहार सरकार का अनोखा चमत्कार

TCN Desk TCN Desk | 12 Aug, 2026 · 5 min read
वीआईपी कूड़े के लिए 15 हज़ार का कूड़ेदान, बिहार सरकार का अनोखा चमत्कार

1500 रुपये का एक डस्टबिन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के मंत्रालय में 15,000 रुपये में खरीदा जा रहा है।

पहले बिहार के विभिन्न नगर परिषदों में डस्टबिन और एलईडी स्क्रीन खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाले की खबर आ रही थी और अब बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय में भी डस्टबिन खरीद में घोटाले की खबर सामने आ रही है। ताजा मामला बिहार के स्वास्थ्य मंत्रालय में हुई डस्टबिन खरीद के घोटाले का है। 1200 से 1500 रुपये का एक डस्टबिन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के मंत्रालय में 15,000 रुपये में खरीदा जा रहा है।

बिहार में अभी पिछले तीन-चार महीनों से राज्य सरकार के कर्मचारियों, शिक्षकों को वेतन और पेंशन देने के लाले पड़ रहे थे और वहीं दूसरी तरफ मंत्री और अधिकारी लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने में लगे हुए हैं। बिहार के एक सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिंह और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य एक्स पोस्ट के जरिये ये आरोप लगाया है।


सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिह ने एक्स पोस्ट में कहा है कि,

मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि बिहार में इस स्तर का भ्रष्टाचार चल रहा है। कल मुझे जानकारी मिली कि स्वास्थ्य विभाग ने एक डस्टबिन 15,000 रुपये में खरीदा है! रिपोर्ट करने से पहले आप खुद पूछिए कि एक डस्टबिन और काली पन्नी की असली कीमत कितनी होती है! एक डस्टबिन की कीमत 1,240 रुपये है और पन्नी का एक बंडल 110 रुपये का है। मैं हैरान रह गया। विभाग ने पन्नी 95 रुपये प्रति पीस और एक ड्रम 15,460 रुपये में खरीदा! 360 करोड़ रुपये की खरीद की गई और इसका भुगतान दवा खरीद मद से किया गया! क्या यह समझदारी है? कहां 1,500 रुपये और कहां 15,000 रुपये? बताइए, बिहार के मेहनतकश लोगों की गाढ़ी कमाई को किस स्तर पर लूटा जा रहा है?

बिहार में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य भी सीएम सम्नाट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर डस्टबिन घोटाले का आरोप लगाया है।


उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा,

सम्राट सरकार का एक और झोल, डस्टबिन भी हुआ अनमोल। बिहार में डस्टबिन भी ‘वीवीआईपी’ हो गया। जिस डस्टबिन की कीमत 1500 रुपये बताई जा रही है, उसे 15,000 रुपये में खरीदा गया है। यानी कूड़ेदान छोटा, लेकिन बिल दस गुना बड़ा बना है।

रोहिणी आचार्य ने आगे सवाल करते हुए कहा कि,

सम्राट चौधरी और मंत्री मंगल पांडेय से बिहार की जनता पूछ रही है कि आखिर इस ‘महंगे कूड़ेदान’ का राज क्या है?" उन्होंने यह भी पूछा कि ये कूड़ा रखने का डिब्बा है या सरकारी खजाना खाली करने का नया जुगाड़?

रोहिणी ने पोस्ट में एक फोटो भी साझा की है। इसमें 5 तरह के डस्बिन दिखाए गए हैं। इस पर 'बिहार में डस्टबिन घोटाला' लिखा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से.

बिहार के सीवान, खगड़िया, सहरसा और सुपौल नगर परिषदों में डस्टबिन और एलईडी खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाले की खबर भी सामने आ रही थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नगर परिषद सिवान में एलईडी और और हाईमास्क लाइट की खरीद में तीन करोड़ 87 लाख रुपये के घोटाले के मामले में निगरानी जांच से उबरा भी नहीं कि डस्टबिन की खरीद में करीब छह करोड़ 90 लाख रुपये का एक और घोटाला सामने आ गया।

इसकी जांच जिलाधिकारी महेंद्र कुमार ने पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को सौंपी गई है। इसके साथ ही राजेंद्र उद्यान के सुंदरीकरण में भी कुछ घपला सामने आया है। इसकी भी जांच शुरू हुई है। पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर संबंधित फाइलों को उपलब्ध कराने के लिए कहा है। हालांकि नगर परिषद के पूर्व पार्षद इंतेखाब अहमद ने इस घोटाले की जांच के लिए निगरानी विभाग के सचिव को भी पत्र भेजा है। पत्र के अनुसार 240 लीटर के टूह्वीलर ¨सटेक्स डस्टबिन की खरीद के लिए गत वर्ष 13 फरवरी को अखबारों में निविदा का प्रकाशन कराया गया। नियम विरुद्ध 10 दिन के बजाए सात दिन में ही निविदा डाल दी गई। इसी दिन आनन-फानन में साधारण बैठक के दौरान किसी दूसरे प्रस्ताव के साथ इसे भी घुसा दिया गया। जबकि इसके लिए अलग एजेंडा होना चाहिए था।

खरीद से पहले न तो संख्या तय की गई और न ही कहां-कहां स्थापित किए जाएंगे, इसकी ही सूची बनी। प्रशासनिक स्वीकृति भी नहीं प्राप्त की गई। गत वर्ष 22 फरवरी को ठेकेदार के सामने निविदा खोल दी गई। आश्चर्य की बात यह है कि निविदा खोलते समय कोई भी टेक्नीकल अफसर नहीं था। सशक्त समिति के सामने ही निविदा खुली और रुक-रुक कर नौ करोड़ 35 लाख रुपये के डस्टबिन की खरीद कर ली गई। जबकि इस निविदा को जिला क्रय समिति के समक्ष खोलना चाहिए था।

खगड़िया जिले के नगर पंचायत मानसी में स्टील डस्टबिन की खरीद के नाम पर 25 से 30 लाख रुपए का घोटाला हुआ है। यह आरोप वार्ड 7 के पार्षद और छात्र नेता अमृतराज ने लगाया है। उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग की राशि का दुरुपयोग किया गया है। नगर पंचायत में स्टील डस्टबिन की कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। फिर भी पदाधिकारी, संवेदक और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से यह खरीद की गई। अमृतराज ने कहा कि चुनाव के समय वोट खरीदे जाते हैं। जनता को अब आंख खोलकर देखना चाहिए कि उनके वोट का क्या नतीजा निकलता है। उन्होंने बताया कि इस घोटाले की शिकायत जिलाधिकारी और उप-विकास आयुक्त से की गई है। आवेदन भी दिया गया है। लेकिन अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई है।