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नीट पेपरलीक पर बड़ा खुलासा, चौकीदार ही निकले चोर?

TCN Desk TCN Desk | 07 Aug, 2026 · 6 min read
नीट पेपरलीक पर बड़ा खुलासा, चौकीदार ही निकले चोर?

CBI ने अपनी जांच में कहा है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के विषय विशेषज्ञों ने ही गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच में निष्कर्ष निकाला है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के विषय विशेषज्ञों ने ही गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए और फिर बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए बड़ी रकम के बदले अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। NEET-UG 2026 पेपर लीक एक सुनियोजित और कई राज्यों में फैली आपराधिक साजिश का नतीजा था।

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत में दाखिल चार्जशीट में एजेंसी ने 13 आरोपियों के नाम शामिल किए हैं। इनमें NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों तक अवैध रूप से पहुंच बनाई और फिर उन्हें बिचौलियों के जरिए आगे पहुंचाया।

The Times Of India की एक रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में NTA के जिन तीन विषय विशेषज्ञों के नाम हैं, उनमें बॉटनी विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। CBI के मुताबिक, इन्होंने NEET-UG 2026 के गोपनीय प्रश्न लीक किए, जिन्हें बाद में कोचिंग संचालकों और दलालों के बीच प्रसारित किया गया और आखिरकार ये अभ्यर्थियों तक पहुंचे।


आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एजेंसी ने कहा कि,

जांच में एक स्पष्ट सप्लाई चेन का पता चला, जो NTA विशेषज्ञों को बिचौलियों और कोचिंग संचालकों से जोड़ती थी। आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए पैसे के बदले लीक हुए प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।

तीन NTA विशेषज्ञों के अलावा चार्जशीट में तेजस शाह, शिवराज मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के नाम शामिल हैं। CBI का आरोप है कि इनमें से हर व्यक्ति ने पेपर लीक कराने, अभ्यर्थियों के साथ तालमेल बैठाने या पैसों के लेन-देन में अलग-अलग भूमिका निभाई।

चार्जशीट के मुताबिक,

जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में NEET-UG 2026 के लीक प्रश्नों वाली PDF और इमेज फाइलें बरामद हुईं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि परीक्षा से कई दिन पहले इन फाइलों को Telegram, WhatsApp और अन्य मैसेजिंग ऐप के जरिए साझा किया गया था।

CBI का दावा है कि डिजिटल सबूतों की मदद से उस पूरे रास्ते का पता लगाया गया, जिसके जरिए लीक हुए प्रश्नपत्र कई राज्यों और आरोपियों के बीच पहुंचे।

एजेंसी का आरोप है कि मांगीलाल बिवाल को सह-आरोपी यश यादव से Telegram के जरिए लीक हुए प्रश्न मिले थे। इस व्यवस्था के तहत बिवाल ने कथित तौर पर अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की मूल मार्कशीट/प्रमाणपत्रों के साथ एक हस्ताक्षरित खाली चेक सुरक्षा के तौर पर यादव के एक सहयोगी को दिया था। चार्जशीट के मुताबिक, बाद में तलाशी के दौरान ये दस्तावेज बरामद किए गए। जांचकर्ताओं का आरोप है कि यश यादव को प्रश्नपत्र नासिक के आरोपी शुभम खैरनार से मिले थे। यादव के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कथित तौर पर एक ऐसे संपर्क के साथ चैट मिली, जिसका नाम फोन में "AP Broker" के रूप में सेव था। उसकी पहचान खैरनार के रूप में की गई। मोबाइल में लीक प्रश्नपत्र वाली PDF फाइलें भी मिलने का दावा किया गया है।

CBI का आरोप है कि,

खैरनार ने लीक प्रश्नपत्र के लिए धनंजय लोखंडे को 25 लाख रुपये दिए थे। पूछताछ के दौरान खैरनार ने कथित तौर पर इस वित्तीय लेन-देन की जानकारी दी। वहीं लोखंडे को कथित तौर पर मनीषा संजय वाघमारे से लीक प्रश्नपत्र मिले थे, जिन्होंने बिचौलियों के जरिए प्रश्नपत्रों की फिजिकल कॉपी पहुंचाने की व्यवस्था की थी। वाघमारे के घर की तलाशी के दौरान कथित तौर पर एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें "NEET 2026" नाम का एक WhatsApp ग्रुप मिला। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस ग्रुप का इस्तेमाल इस साजिश के सिलसिले में किया गया था।

एजेंसी का यह भी आरोप है कि वाघमारे NTA के केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद कुलकर्णी के संपर्क में थीं। कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र के मराठी से अंग्रेजी में अनुवाद पर काम किया था। CBI के मुताबिक, वाघमारे को बायोलॉजी और केमिस्ट्री के लीक प्रश्न उन छात्रों के जरिए मिले, जिनका परिचय उन्होंने मंधारे और कुलकर्णी से कराया था।

चार्जशीट में जांच के दौरान अभ्यर्थियों से दर्ज किए गए बयानों का भी जिक्र है। एक मामले में कथित तौर पर एक अभ्यर्थी और उसके पिता को 4 लाख रुपये में NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की पेशकश की गई थी। इसके साथ कोचिंग सहायता और NTA के एक विषय विशेषज्ञ द्वारा ऑफलाइन रिवीजन क्लास देने की भी पेशकश की गई थी। CBI के मुताबिक, ये बातचीत 2025 के आखिर से 2026 की शुरुआत के बीच हुई और व्यापक साजिश का हिस्सा थी।

The Print के अनुसार, CBI की जांच में सामने आया है कि सवालों और उनके जवाब के विकल्पों को छोटी-छोटी पर्चियों पर नोट करना या उन्हें याद करके काम से लौटने के बाद लिख लेना और NCERT की किताबों में संबंधित पैराग्राफ पर निशान लगाना, इसी व्यापक तरीके का इस्तेमाल उन तीन विषय विशेषज्ञों ने कथित तौर पर किया

एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि NTA मुख्यालय की पहली मंजिल पर स्थित गोपनीय अनुभाग में NEET-UG के सवालों के अनुवाद और पुनः अनुवाद के दौरान रफ काम करने के लिए कुलकर्णी को सादे कागज दिए गए थे। CBI का आरोप है कि कुलकर्णी ने इन्हीं कागजों का इस्तेमाल सभी 135 सवालों की संक्षिप्त सूची छोटी-छोटी पर्चियों के रूप में तैयार करने के लिए किया। उन्होंने जवाब के विकल्प भी नोट कर लिए थे।

चार्जशीट में कहा गया,

NTA के गोपनीय अनुभाग में प्रवेश या बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की जांच या तलाशी लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी। आसान सवालों को वह केवल याद रख सकते थे और दिन का काम खत्म होने के बाद होटल के कमरे में लौटकर उन्हें एक किताब में लिख सकते थे। आरोपी पीवी कुलकर्णी ने 31.03.2026 से 02.04.2026 तक, यानी तीन दिनों की अवधि में, सवालों के 3 सेटों का पुनः अनुवाद किया था, जिनमें कुल 135 सवाल थे।”

हवलदार के बारे में CBI ने दावा किया कि उन्हें अपने विषय भौतिकी के प्रश्न सेट नंबर दो के अनुवाद और सेट नंबर एक, दो और चार के पुनः अनुवाद की जिम्मेदारी दी गई थी। एजेंसी के अनुसार, जांच में कथित तौर पर सामने आया कि वह दिन का काम खत्म होने के बाद दिल्ली स्थित अपने होटल में लौटकर सवालों को संक्षेप में नोट कर लिया करती थीं। वनस्पति विज्ञान की विषय विशेषज्ञ मंधारे के बारे में एजेंसी ने पाया कि उन्हें सवालों का अंग्रेजी से मराठी में अनुवाद करने और प्राणी विज्ञान के सवालों का वापस अंग्रेजी में अनुवाद करने का काम सौंपा गया था। हवलदार की तरह ही मंधारे ने भी कथित तौर पर अपनी याददाश्त का इस्तेमाल किया और हर दिन का काम खत्म होने के बाद NCERT की किताबों में संबंधित पैराग्राफ पर निशान लगाया करती थीं।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने 09.03.2026 से 05.04.2026 के बीच NTA NEET UG 2026 परीक्षा के वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान से संबंधित अनुवाद और पुनः अनुवाद के काम में हिस्सा लिया था।” CBI ने आगे दावा किया कि ये गड़बड़ियां इसलिए पकड़ में नहीं आईं क्योंकि NTA अपने मुख्यालय की CCTV फुटेज की निगरानी नहीं करता था।