ईरान युद्ध से पीछे हटे ट्रंप, अमेरिका के पास हथियारों का स्टाक हुआ खत्म!
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हमले को अभी के लिए टाल दिया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हमले को तेज़ी से बढ़ाने की योजना को अभी के लिए टाल दिया है। लगातार 13 दिनों तक बमवारी करने के बाद अमेरिका के पास हथियारों का स्टॉक खत्म हो चुका है। अब अमेरिकी सेना पैट्रियट मिसाइलों का स्टॉक जुटायेगी और फिर से हमले होंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस ने यह रिपोर्ट प्रकाशित किया है। उपराष्ट्रपति वैन्स कह चुके हैं कि इससे पहले ईरान से सीज़फ़ायर तेल और हथियार का स्टॉक भरने के लिए ही किया गया था।
न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस के अनुसार, तमाम रिपोर्टों में यह कहा गया है कि ईरान से युद्ध और इजराइल को सप्लाई से अमेरिका के पास हथियार जिस तेजी से घटे हैं, उस अनुपात में उत्पादन नहीं हो पा रहा है। जब मैनुफ़ैक्चरिंग क्षमता में आम तौर पर कमी आती है, तो इसका असर हथियारों की सप्लाई पर भी होता है। ट्रंप को अब यह चिंता सताने लगी है कि युद्ध को और बढ़ाने से मिडिल ईस्ट में पेंटागन के पास मौजूद पैट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर और दूसरे एयर डिफेंस हथियारों का स्टॉक खतरनाक रूप से कम हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इंटरसेप्टर स्टॉक पर खतरा उन कई बातों में से एक है जिनकी वजह से बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू करना बहुत जोखिम भरा काम हो गया है। ट्रंप और उनके करीबी सहयोगी मिडिल ईस्ट में युद्ध के फैलने, ईरान के हमले के खतरे का सामना कर रहे खाड़ी के अहम सहयोगियों के दूर होने, वैश्विक आर्थिक संकट और ऊर्जा व शरणार्थी संकट के बढ़ने की संभावना को लेकर भी चिंतित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ टकराव को लेकर ट्रंप के रुख में यह नया बदलाव शुक्रवार को उनके शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों के साथ हुई बैठक के बाद आया। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस को ऑपरेशन से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए बताया कि मीटिंग में पेंटागन के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर और दूसरे एयर डिफेंस हथियारों की घटती संख्या पर ध्यान दिया गया। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पिछले शुक्रवार को जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए, जब एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी एयर डिफेंस को चकमा देकर निकल गई, जो ईरान की मिसाइलों और ड्रोन हमले को रोकने की कोशिश कर रहे थे।
बताया गया है कि हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पेंटागन ने ट्रंप को बताया कि पैट्रियट इंटरसेप्टर और दूसरे एयर डिफेंस हथियारों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। इसी बैठक के बाद ट्रंप ने बड़े पैमाने पर नए हमले की योजना फिलहाल रोकने का फैसला किया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन सिर्फ हथियारों की कमी को लेकर ही चिंतित नहीं है। उसे डर है कि अगर युद्ध और फैला, तो पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है, खाड़ी देशों के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है, दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है और शरणार्थियों की संख्या भी बढ़ सकती है।
इस बीच अमेरिकी सेना के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी ट्रंप को चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर दोबारा हमला करना संभव तो है, लेकिन इससे अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस इंटरसेप्टर खतरनाक स्तर तक कम हो जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब यह भी सोच रहा है कि होर्मुज को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित कैसे बनाया जाए। पिछले कुछ हफ्तों में बढ़े तनाव की वजह से गैस और ऊर्जा की कीमतों पर भी असर पड़ा है। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हाल के बड़े हमलों से ईरान पर उम्मीद के मुताबिक सैन्य दबाव नहीं बना और इससे ईरान बातचीत के लिए भी तैयार नहीं हुआ।
हालांकि ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी, लेकिन साथ ही कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला रखा जाएगा। ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार, जिनमें उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं, मानते हैं कि फिलहाल युद्ध बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना और बातचीत जारी रखना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरानी कारोबारी बाबेक ज़ंजानी के नेटवर्क से जुड़ी नौ कंपनियों और चार लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। वहीं अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का दावा है कि हाल के महीनों में चीन ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद में लगभग 40 प्रतिशत की कमी की है, जिससे ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर असर पड़ा है।