Gen Z आंदोलन के पाकिस्तान कनेक्शन का झूठ बेनकाब
पंजाब पुलिस ने कहा कि एडिटेड वीडियो के जरिए यह गलत धारणा बनाई गई कि प्रदर्शनकारियों का आतंकी मॉड्यूल से संबंध था।
एक बार फिर मोदी सरकार, भाजपा और संघ के समर्थकों के झूठे नैरेटिव का पोल खुल गया है। भाजपा के आईटी सेल की कारगुजारियां एक बार फिर उजागर हो गई है। वीडियो एडिट कर किसी को आतंकी बनाना, किसी को बदनाम करने में भाजपा आईटी सेल और संघ समर्थकों को महारथ हासिल है। पंजाब पुलिस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों और हाल ही में अमृतसर कमिश्नरेट द्वारा पकड़े गए पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल के बीच कोई संबंध नहीं है।
Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्टीकरण अमृतसर पुलिस कमिश्नर की 4 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के एडिट किए गए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद आया। आरोप है कि इन वीडियो के जरिए यह गलत धारणा बनाई गई कि प्रदर्शनकारियों का आतंकी मॉड्यूल से संबंध था।
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, मूल प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल इतना कहा गया था कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी जंतर-मंतर गए थे, उन्होंने इलाके की रेकी की थी और पेट्रोल बमों से प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। पुलिस ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि आरोपियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था या प्रदर्शनकारियों का इस आतंकी मॉड्यूल से कोई संबंध था।
पुलिस के अनुसार,
कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के एडिट किए गए वीडियो अपलोड किए। इनमें बैकग्राउंड विजुअल्स में बदलाव किया गया, मूल वीडियो के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से काटा गया और ऐसे कैप्शन जोड़े गए, जिनसे गिरफ्तार लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच संबंध होने की गलत कहानी पेश की गई।
पंजाब पुलिस ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऑडियो और उसमें दी गई तथ्यात्मक जानकारी नहीं बदली गई थी, लेकिन चुनिंदा एडिटिंग और वीडियो के साथ दिए गए विवरणों ने मूल संदर्भ को विकृत कर दिया। इससे दर्शक जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों की भूमिका को लेकर गलत निष्कर्ष निकाल सकते थे। एडिट किए गए इन वीडियो के प्रसार को गंभीर मामला बताते हुए पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है।
अपने ही मुल्क में अगर किसी को देशद्रोही कहा जाता है और उस पर आतंकी का लेबल लगाया जाता है तो यह कितना पीड़ादायक होता है। उत्तर प्रदेश की रहने वाली और जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल फरहा नाज ने दो दिन पहले कहा था कि , “हम जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, तभी इन पुलिसवालों ने हमें बेरहमी से पीटा। पुलिस ने हमारे नाम के आधार पर हमें अलग-अलग निशाना बनाया। उन्होंने सिर्फ इसलिए मुझे पीटा क्योंकि मैं मुस्लिम हूं और मेरा नाम फरहा नाज है।”
फरहा नाज ने कहा,
पहले उन्होंने मुझे पीटा, फिर बस में डाल दिया और तीन घंटे तक वहीं रखा। इसके बाद उन्होंने मेरा नाम पूछा। मैंने कहा ‘फरहा नाज’, तो उन्होंने कहा, ‘इनकी अलग सूची बनाई जाएगी क्योंकि ये देशद्रोही हैं।
उन्होंने आगे कहा, “मेरा कहना सिर्फ इतना है कि अगर आप इसी तरह करते रहेंगे, तब भी हम पीछे नहीं हटेंगे। हम हमेशा अपने अधिकारों और अपने देश के लिए खड़े रहेंगे।” एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी मुस्कान शर्मा ने कहा, “मेरा सिर्फ एक सवाल है- जब मैं शांतिपूर्वक चल रही थी तो पुलिस ने मुझे क्यों मारा? आरएएफ के अधिकारियों ने मुझ पर लाठीचार्ज क्यों किया?
और जब स्पष्ट नियम है कि जांघ से ऊपर नहीं मारा जा सकता और कोई पुरुष अधिकारी किसी महिला को नहीं मार सकता तो एक पुरुष आरएएफ अधिकारी ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर लाठी मारने की कोशिश क्यों की?
मुस्कान ने कहा,
दूसरी बात, चूंकि मैंने बताया कि मेरा नाम मुस्कान है, इसलिए मैं यह भी बताना चाहती हूं कि मेरा उपनाम शर्मा है। मैं यह इसलिए बता रही हूं क्योंकि आजकल हर कोई मान लेता है कि मैं मुस्लिम हूं और इसी वजह से मुझे और ज्यादा गालियां और दुर्व्यवहार झेलना पड़ रहा है।
यह मेरे बारे में कुछ नहीं बताता, लेकिन यह इस देश में इस समय बनाए जा रहे नैरेटिव के बारे में बहुत कुछ बताता है। अगर कोई सरकार के खिलाफ बोलता है तो वह जरूर मुस्लिम होगा। और जैसे ही आप किसी को मुस्लिम बता देते हैं, वह अपने-आप ‘देशद्रोही’ बन जाता है।
छात्रों को बदनाम करने के लिए ऐसा फ़ेक नैरेटिव चलाया गया, यहाँ तक कि आर एस एस के वरिष्ठ नेता अतुल लिमए ने छात्रों को एंटी-नेशनल कहा, तो भाजपा पूर्व सांसद रमेश विधूडी ने सांप्रदायिक बयान देते हुए पंचर जोड़ने जैसे घटिया टर्म का इस्तेमाल किया। कई बड़े मीडिया चैनल्स ने भी इस तरह की आधारहीन खबरों को हवा दी।
अब पंजाब पुलिस के इस बयान के बाद स्पष्ट हो गया है कि न केवल ये बयान निराधार थे, बल्कि एक खास मकसद से चलाए जा रहे थे।