Gen Z ने मोदी के सोशल मीडिया गेम को पलट दिया
जेन जी (Gen Z) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी के दबदबे को पलट रही है।
पिछले 12 सालों से मोदी और उनकी पार्टी का सोशल मीडिया पर दबदबा रहा है। अब देश का जेन जी और युवा उन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रहे हैं। बारह साल पहले, मोदी सत्ता में आए और उन्होंने आम लोगों तक पहुँचने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने में कई नई पहल कीं। आज, जेन जी (Gen Z) सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर उनकी हिंदू-बहुसंख्यकवादी पार्टी और मोदी के दबदबे को पलट रही है और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर रही है जिन पर भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से निर्भर रही है।
यह अनायास नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने कैबिनेट के मंत्रियों को इंस्टाग्राम पर रील बनाने के लिए कह रहे हैं और जेन जी और युवाओं से कनेक्ट होने के लिए कह रहे हैं। मोदी इस खतरे को भांप चुके हैं कि देश का भविष्य उनके खिलाफ हैं, जेन जी के मन में उनके प्रति बहुत ज्यादा नाराजगी और गुस्सा है। अगर अभी इनसे नहीं संवाद करते हैं या फिर इनके गुस्से को शांत नहीं करते हैं तो यह टाइम बम की तरह फटेगा। यही कारण है कि पिछले 48 घंटे में पीएम मोदी दो बार इंस्टाग्राम पर आए, लाइव वीडियो बनाकर जेन जी से संवाद किया और अंतत: जेन जी और प्रदर्शनकारी छात्रों के सामने झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले ही लिया। यह लोकतंत्र की जीत है। जेन जी के जिद की जीत है और आप माने या न माने यह जेन जी की नई भाषा और शब्दावली की जीत है।

ऐसा नहीं है जेन जी की यह नई भाषा अभी की गढ़ी है। पहले ये मोबाइल डिवाइस में कैद थी, उनके वाट्सएप और इंस्टाग्राम संदेश में कैद थी, लेकिन 20 जुलाई के पुलिसिया दमन के बाद उनकी यह नई और डार्क ह्यूमर वाली भाषा जंतर-मंतर पर सार्वजनिक हुई और धीरे-धीरे देशभर में वायरल हो गई।
20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल अवंशिका कहती हैं
वह तेज़ी से भागती हुई भीड़ के बीच से गुज़रीं, जबकि उनके सिर के ठीक ऊपर आँसू गैस का गुबार था। उनकी आँखों में इतनी जलन हो रही थी कि उन्हें मुश्किल से कुछ दिख रहा था, फिर भी उन्होंने अपने फ़ोन पर उस अफरातफरी का वीडियो बनाया। "मैंने पुलिसवालों को निहत्थी लड़कियों और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे बच्चों की बेरहमी से पिटाई करते देखा।" वह उन छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल रही हैं जिनकी वजह से देश की राजधानी ठप हो गई थी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की माँग की जा रही थी। घर लौटने पर, 18 साल की अवंशिका ने उस अफरातफरी के वीडियो को मिलाकर एक रफ़ कट तैयार किया और इंस्टाग्राम पर कैप्शन लिखा, "आज हमने संसद की घंटी बजाई और भाग गए।"
20 जुलाई को परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ संसद तक निकाले गए मार्च ने देश की राजधानी को ठप कर दिया। हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने सत्ता के गलियारों तक जाने वाली मुख्य सड़कों पर कब्ज़ा कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सीधे निर्देशों पर काम कर रही पुलिस की कार्रवाई में 100 से ज़्यादा छात्र घायल हो गए। लेकिन तब से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पुलिस की ज्यादतियों के लगातार वीडियो से भर गया। हिलते-डुलते स्मार्टफोन फुटेज, हिप-हॉप गानों की धुन पर तेजी से एडिट किए गए वीडियो, और मीम्स व अपशब्दों की बाढ़।
अवंशिका ने कहा,
"सालों तक असहमति को अपराध की तरह देखने के बाद, अब इंटरनेट पर मोदी का विरोध करना 'कूल' माना जाता है।" इसके बाद उन्होंने नारे लगाने शुरू कर दिए- "अंकल मोदी, वापस जाओ, वापस जाओ।"
पेपर लीक मामले से सरकार के निपटने के तरीक़े के ख़िलाफ़ 20 जुलाई को हुए प्रदर्शनों के बाद, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के सभी आरोपों और कार्रवाई के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग की मीडिया रिपोर्टों को नकार दिया। लेकिन तब तक, विरोध कर रहे छात्रों द्वारा रिकॉर्ड किए गए सबूतों से सोशल मीडिया भर चुका था।
पिछले कुछ समय से, Gen Z और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शनकारी सीधे विरोध-प्रदर्शन वाली जगहों से मीम्स की बाढ़ ला रहे हैं। इनमें से कई ऐसे अंदरूनी मज़ाक हैं जिन्हें सिर्फ़ Gen Z ही पूरी तरह समझ सकता है, और बड़ी उम्र के लोगों के लिए इनके अनुवाद भी ऐसी भाषा में होते हैं जिसमें बहुत सारे स्लैंग (बोलचाल की खास भाषा) होते हैं। इनमें से कुछ डार्क ह्यूमर वाले होते हैं, कुछ बस बेअदब और बदतमीज़ होते हैं, और ये सभी शूट होने के कुछ ही मिनटों में अपलोड कर दिए जाते हैं। और यह बात उन अधिकारियों को उलझन में डाल देती है जो विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुराने तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। बच्चों पर लाठीचार्ज करना। इंटरनेट बंद करना। सड़कें ब्लॉक करना। प्रदर्शनकारियो और नेताओं को गिरफ़्तार करना। दशकों से यह तरीका काम करता रहा है। बस एक ही समस्या है? किसी ने इन Gen Z प्रदर्शनकारियों को यह नहीं बताया कि उन्हें डरना चाहिए। लेकिन इन्हें नहीं पता है कि Gen Z डरता नहीं है।
देश के विभिन्न शहरो में हज़ारों छात्र सड़कों पर उतरे हैं, और ऐसा लगता है जैसे कोई ऑनलाइन पार्टी असल दुनिया में आ गई हो। मीम्स हैं। अजीब तरह से एकदम सही साउंडट्रैक पर बनी रील्स हैं।
पटना से आई रील तो कमाल की है। प्रदर्शनकारी छात्र पुलिस से पूछ रहा है- टियर गैस का व्यवस्था नहीं है क्या... दूसरा छात्र बोलता है वाटर कैनन है। गर्मी है चलो नहाते हैं मजा आएगा। और फिर सभी प्रदर्शनकारी छात्र वाटर कैनन की बौछार में नहाते हुए डांस करने लगते हैं।
हममें से कई लोगों ने निर्भया, धारा 377 आंदोलन, JNU विरोध-प्रदर्शन, शाहीन बाग धरना, किसानों का विरोध-प्रदर्शन देखा है। वे गहरे गुस्से और डर पर आधारित सच्चे और गंभीर विरोध-प्रदर्शन थे। आज का विरोध-प्रदर्शन भी कम सच्चा और गंभीर नहीं है, लेकिन यह लगभग जोश भरी खुशी और बेबाकी के साथ सामने आता है। लाठीचार्ज में फँसे बच्चे समझ जाते हैं कि भागना बेकार है, इसलिए वे खड़े होकर राष्ट्रगान गाते हैं जब तक कि पुलिस को 'अटेंशन' की मुद्रा में खड़ा न होना पड़े। वे अपने दोस्तों को छुड़ाने के लिए पुलिस वैन के दरवाज़े खोल देते हैं। वे उन्हें ले जा रही वैन की खिड़कियों से रेंगकर बाहर निकल आते हैं। वे आराम से वैन को रोक देते हैं जब तक कि पुलिस को हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ना न पड़े। वे पुलिस से वॉटर कैनन चलाने के लिए कहते हैं क्योंकि "बहुत गर्मी है"।
Satish Verma
सतीश वर्मा पेशे से पत्रकार हैं। हिंदी की मुख्यधारा की पत्रकारिता में इन्हें 20 साल से ज्यादा का अनुभव है।