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Gen-Z Connect Yatra से योगी सरकार टेंशन में, साइकिल से घूम-घूम कर किया जा रहा संवाद

Dr. Sudhanshu Vajpayee Dr. Sudhanshu Vajpayee | 1h ago · 8 min read
Gen-Z Connect Yatra से योगी सरकार टेंशन में, साइकिल से घूम-घूम कर किया जा रहा संवाद

40 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा से प्रदेश की योगी सरकार टेंशन में आ गई है।

उत्तर प्रदेश में पिछले कई महीनों से पूर्वांचल और अवध के कई जिलों में छात्र और युवा साइकिल यात्रा निकाल कर शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर शहर-शहर और गांव-गांव जाकर छात्र और युवाओं को एकजुट कर रहे हैं। इस यात्रा का नाम Gen Z Connect Yatra दिया गया है। 40 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा से प्रदेश की योगी सरकार टेंशन में आ गई है।

दिल्ली में जंतर मंतर के आंदोलन में पुलिसिया लाठी चार्ज के खिलाफ लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए, स्वाभाविक ही जिसका नेतृत्व इन्हीं युवाओं ने किया था। इसके बाद तय हुआ कि एक अंब्रेला फ्रंट के नीचे प्रदेश भर के छात्रों युवाओं को एकजुट किया जाए।

गौरतलब है कि 9 अगस्त (अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन दिवस) को लखनऊ में स्थापना सम्मलेन करते हुए 10 अगस्त को प्रेस कांफ्रेंस कर जस्टिस मोर्चा की घोषणा की गई जिसमें प्रदेश में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के अधिकार के लिए संघर्ष की प्रतिबद्धता दोहरायी गई और एक 10 डिमांड चार्टर जारी किया गया।

प्रदेश में इन मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करने के लिए 40 दिन की साइकिल यात्रा का ऐलान किया गया। जिसे Gen Z Connect Yatra का नाम दिया गया।

शिक्षा, रोजगार, भर्ती में पारदर्शिता और निजी स्कूलों की मनमानी जैसे सवालों को लेकर शुरू हुई यह साइकिल यात्रा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए छात्रों, युवाओं और आम लोगों से संवाद कर रही है। यात्रा का उद्देश्य इन सवालों को केवल कॉलेजों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं तक सीमित रखना नहीं, बल्कि प्रदेश के गाँवों, कस्बों और आम जनता के बीच ले जाना है।

यह यात्रा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए 20 अगस्त को चौरी-चौरा से शुरू हुई। Gen Z Connect Yatra अब तक अपने 33 दिन पूरे कर चुकी है।

यात्रा गोरखपुर, बनारस, इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों के साथ पूर्वांचल के 12 जिलों में छात्रों युवाओं से संवाद करते हुए प्रतापगढ़ (कुंडा) से अवध में प्रवेश कर रही है।

गोरखपुर

यात्रा की शुरुआत के मौके पर स्थानीय महिलाओं ने यात्रा कर रहे नौजवानों को टीका लगाकर शुभकामनाएं दीं। महिलाओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल हम युवाओं की नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य की भी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि हम सब इस संघर्ष को मंजिल तक पहुंचाएं और अपनी मांगों को लेकर जीत हासिल करके ही लौटें। यह स्वागत यात्रा के लिए एक भावुक और महत्वपूर्ण क्षण था।चौरी-चौरा से निकली साइकिलों के साथ सिर्फ यात्री नहीं थे, बल्कि उनके साथ उन परिवारों की उम्मीदें भी थीं जिनके बच्चे वर्षों से शिक्षा और रोजगार की बेहतर अवसरों का इंतजार कर रहे हैं।

बनारस

बनारस में NSUI के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी कांग्रेस पूर्वी प्रभारी वरुण चौधरी ने भी कचहरी पर यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाते हुए साइकिल चलाकर यात्रा में हिस्सा लिया और युवाओं के संघर्ष एवं उनके मुद्दों के प्रति समर्थन जताया।इसके बाद यात्रा दोपहर करीब 2 बजे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पहुँची।

यहाँ युवाओं की आवाज़ से घबराए प्रशासन ने विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए। एबीवीपी से जुड़े लोगों द्वारा यात्रा में शामिल युवाओं के साथ गालीगलौज मारने की धमकी दी गई। यात्री दल पर स्याही फेंकी गई, जिसके कारण विद्यापीठ में प्रस्तावित जनसभा नहीं हो सकी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही।

लेकिन थोड़ी ही आगे जाने पर भेलूपुर थाने पर यात्रा को BHU जाने से रोक दिया जाता है, कहा जाता है वहां जाने की परमीशन नहीं है जिससे छात्र वहीं सड़क पर साइकिल खड़ी कर धरना देने लगते हैं, 30-40 मिनट के संघर्ष के बाद पुलिस को अंततः जाने की परमीशन देनी पड़ती है।

BHU गेट पर पहुँचते ही BHU के छात्रों और प्रोफेसरों ने नारों के साथ Gen Z कनेक्ट यात्रा का स्वागत किया। युवाओं की आवाज़ और नारों से लंका गेट गूंज उठा।

गेट पर "Gen-z जनसभा" का आयोजन किया गया, जिसमें जंतर मंतर आंदोलन की नेत्री नेहा बोरा शामिल हुई और कहा कि बनारस जेन ज़ी एकता का गवाह बन रहा है जब Gen-Z Connect Yatra और Gen-Z Rising Campaign दोनों एक साथ युवाओ के मुद्दों पर एकजुटता की प्रतिबद्धता जता रही हैं।

इस दौरान देवरिया के युवा रजत सिंह ने भी Gen Z जनसभा को संबोधित किया। जस्टिस स्कूल की बदहाल स्थिति को सामने लाने के कारण रजत सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि FIR, पुलिस का दबाव और प्रशासनिक रोक युवाओं की आवाज़ को दबा नहीं सकते।

इलाहाबाद

यात्रा अपने 32वें दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय यूनियन हॉल से शुरू होकर करेलीगंज, यूनिवर्सिटी चौराहा, साइंस फैकल्टी, मनमोहन पार्क, कचहरी, बेली रोड, मम्फोर्डगंज और तेलियरगंज होते हुए यात्रा फाफामऊ पहुंची। इलाहाबाद में छात्रों ने इस यात्रा का गरमजोशी के साथ स्वागत किया। इलाहाबाद में साइकिल यात्रा पदयात्रा में तब्दील हो गई। यात्रा के सदस्यों ने अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में छात्रों से भी बातचीत की। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर परीक्षाएं और रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों को 2 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाले यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया।

यात्रा के दौरान पत्थर गिरजाघर पहुंचकर TGT-PGT भर्ती आंदोलन में भी यात्रा के सदस्य शामिल हुए। यहां 5 सितंबर से आमरण अनशन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और न सिर्फ उनकी मांगों को समर्थन किया बल्कि रात भर क्रान्तिकारी गीत गाते और नारे लगाते हुए उनके आंदोलन की हौसला अफजाई भी की , टीजीटी पीजीटी अभ्यर्थी भर्ती में पुरानी नियमावली लागू करने की मांग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में लाखों युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती लंबे समय से ठप है, UPSSSC की भर्तियाँ वर्षों से लंबित हैं और UPSI, लेखपाल, RO-ARO तथा असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं ने युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं सरकारी स्कूलों की उपेक्षा और निजी स्कूलों की मनमानी के चलते अच्छी शिक्षा के दरवाजे आम-गरीब छात्रों के लिए बंद हो रहे हैं। NTA और अन्य संस्थाओं के द्वारा शिक्षा - परीक्षा का केन्द्रीकरण भ्रष्टाचार का केन्द्रीकरण होता जा रहा है। NEP का पूरा प्रयोग सरकारी विश्वविद्यालयो को सेल्फ फाइनेंस और आत्म निर्भरता के नाम पर निजीकरण की राह पर ले जाने का प्रयास है।

साइकिल बना छात्रों से संवाद का माध्यम

यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका सीधा जनसंवाद है। साइकिल से गाँव-कस्बों तक पहुँचते हुए युवाओं से बातचीत की जा रही है। रास्ते में स्थानीय युवाओं, छात्रों और नागरिकों से मुलाकात कर शिक्षा, रोजगार और भर्ती व्यवस्था की समस्याओं को समझाने की कोशिश की जा रही है। यात्रा के मार्ग में आने वाले छात्रों और युवाओं से अपील की जा रही है कि वे कुछ कदम यात्रा के साथ चलें और अपने क्षेत्रों में इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

Gen-Z Connect Yatra के दौरान लगातार नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया जा। रहा है। इन सभाओं में यात्रियों द्वारा युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाया जा रहा है और 10 सूत्रीय मांगों के बारे में जानकारी दी जा रही है। यात्रा की कार्यशैली यह है कि किसी चौराहे या बाजार में यात्रा रुकती है, स्थानीय लोगों को पर्चे बांटे जाते हैं, उन्हें अपने अभियान के बारे में बताया जाता है, इसके बाद यात्री किसी नुक्कड़ पर खड़े होकर स्थानीय लोगों और युवाओं को संबोधित करते हैं।

स्कूल, अस्पताल और सड़कों का भी पोलखोल

यात्रा की शुरुआत शिक्षा और रोजगार के सवालों से हुई थी, लेकिन रास्ते में जनता से संवाद के दौरान सामने आए सवालों ने इसके दायरे को और व्यापक कर दिया गया। जनता के अनुरोध पर अब सरकारी स्कूल, अस्पताल, सड़क और दूसरी सार्वजनिक व्यवस्थाओं की स्थिति को भी यात्रा के दौरान दर्ज किया जा रहा है,

क्योंकि हमारे लिए शिक्षा और रोजगार का संकट एकांगी सवाल नहीं है, यह उस सिस्टम को ठीक करने का सवाल है जिसकी नागरिकों को बेहतर स्कूल, अस्पताल, सड़क और रोजगार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है।

यात्रा के दौरान विभिन्न गाँवों और कस्बों में सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक व्यवस्थाओं की स्थिति का लगातार सोशल ऑडिट किया जा रहा है। जहाँ व्यवस्था में गंभीर कमियां दिखाई देती हैं, उन्हें दर्ज किया जा रहा है और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के सामने रखा जा रहा है। इन सवालों को उठाने का उद्देश्य जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को सार्वजनिक सवाल बनाना और सरकार तथा प्रशासन को जवाबदेह बनाना है।

इस यात्रा का शायद सबसे खूबसूरत, सुखद और उत्साह बढ़ाने वाला पहलू जन सहयोग है। जब भाषण देकर नीचे उतरते हैं तो वहां खड़े लोग मिलने आते हैं तारीफ करते है, कोई कहता है-आप लोग बेहद जरूरी काम कर रहे हैं, कोई दुआ देता है कि आपकी लड़ाई और आपका संघर्ष अपनी मंजिल तक पहुंचे।

इन 32 दिनों में Gen Z Connect Yatra ने यही महसूस किया है कि शिक्षा और रोजगार के सवाल सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सवाल नहीं हैं। ये हर उस परिवार के सवाल हैं जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद करता है।

चौरी-चौरा से शुरू हुई यह यात्रा अभी जारी है। रास्ता लंबा है, मंजिल 2 अक्टूबर लखनऊ में युवाओं के सवालों के साथ जुटना है। चौरी-चौरा से काकोरी (लखनऊ) तक शिक्षा, रोजगार और न्याय की आवाज़ को बुलंद करने का यह सफर जारी है।
शिक्षा रोजगार पर महाआंदोलन की तैयारी के साथ ही इस चुनाव का मुद्दा शिक्षा रोजगार और स्वास्थ्य बने, इसी प्रतिबद्धता के साथ अभियान/ यात्राएँ आगे 75 जिलों में जारी रखने की मोर्चा की योजना है।
Dr. Sudhanshu Vajpayee

Dr. Sudhanshu Vajpayee

डॉ सुधांशु बाजपेई, जस्टिस मोर्चा के सदस्य हैं और Gen-Z Connect Yatra के माध्यम से शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के मुद्दे पर अभियान चला रहे हैं।