डॉ सुजाता दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, लेखिका और स्तंभकार हैं। समाज, स्त्री-अधिकार, लैंगिक समानता, साहित्य और समकालीन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर उनकी लेखनी अपनी बेबाक दृष्टि और संवेदनशील विश्लेषण के लिए जानी जाती है
हम पिछले एक दशक में शिक्षा व्यवस्था को एक ऐसी व्यवस्था की तरह फेल होते देख रहे हैं जो जीवन को बेहतर बनाने की उम्मीद हर एक के भीतर जगा सके। अगर एक छात्र यूनिवर्सिटी में खड़े होकर वक़्त पर परीक्षा, वक़्त पर परिणाम और मनमानी फीस वृद्धि के लिए जवाबदेही नहीं मांग सकता, छोड़िए, वह साफ़ पानी तक नहीं मांग सकता तब क्या उम्मीद बची रह जाएगी उसके लिए?
09 Aug, 2026
17 Jul, 2026
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