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नाबालिग के साथ हुई घटना पर BJP विधायक का बेतुका बयान, कहा - मोरल पुलिसिंग सभ्य तरीके से करें

TCN Desk TCN Desk | 1h ago · 7 min read
नाबालिग के साथ हुई घटना पर BJP विधायक का बेतुका बयान, कहा - मोरल पुलिसिंग सभ्य तरीके से करें

बिहार की मंत्री और जमुई से बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है।

बिहार की मंत्री और जमुई से बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह के एक बेतुका बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि मोरल पुलिसिंग “थोड़े ज्यादा सभ्य और शालीन तरीके” से की जा सकती है। उन्होंने यह बात एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू के दौरान कही, जहां उन्होंने जमुई जिले में एक लड़के और लड़की के साथ हुई बदसलूकी की निंदा की।

बीजेपी नेता और पूर्व खेल निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने नाबालिगों के साथ किए गए व्यवहार पर नाराजगी जताई, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मोरल पुलिसिंग जताने का तरीका अधिक सम्मानजनक होना चाहिए।

श्रेयसी सिंह की यह टिप्पणी उस वीडियो के वायरल होने के बाद सामने आई, जिसमें कुछ लोग जमुई जिले में सड़क किनारे दो किशोरों को रोककर उनके साथ मारपीट और बदसलूकी करते नजर आए। इस वीडियो ने देशभर में आक्रोश पैदा किया है और मोरल पुलिसिंग तथा सार्वजनिक स्थानों पर युवाओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।


घटना की व्यापक निंदा के बीच श्रेयसी सिंह ने कहा कि,

लोगों को किसी व्यक्ति की जीवनशैली या उसके फैसलों को लेकर अपनी राय रखने का अधिकार हो सकता है, लेकिन असहमति जताने का तरीका सम्मानजनक होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप किसी के जीवन जीने के तरीके को लेकर अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया गया, वह बिल्कुल अस्वीकार्य है।”

इस घटना ने नाबालिगों की सुरक्षा, युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज में मोरल पुलिसिंग की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। जमुई की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि किसी के व्यक्तिगत फैसलों या जीवनशैली पर आपत्ति जताने के नाम पर कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

बता दें कि जमुई में दो नाबालिगों से बदसलूकी, यौन उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया है, जबकि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला वीडियो शेयर करने के आरोप में 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

पुलिस ने इस मामले में एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामला 19 सितंबर का है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की और उसका नाबालिग दोस्त दोपहिया वाहन से एक पर्यटन स्थल से लौट रहे थे। आरोप है कि रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें ‘मोरल पुलिसिंग’ के नाम पर रोक लिया। इसके बाद लड़की के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि उसके दोस्त के साथ मारपीट की गई।

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि वीडियो आरोपियों में से एक रामाशीष चौधरी ने बनाया था। वह फिलहाल फरार है।

जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि,

घटना के बाद दोनों पीड़ितों ने डर और आरोपियों की धमकी के कारण पुलिस में शिकायत नहीं की थी। हालांकि, रविवार को वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से दोनों पीड़ितों का पता लगाया।

इसके बाद POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई। पीड़ितों ने आरोपियों के नाम नहीं बताए थे, लेकिन पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एसपी विश्वजीत दयाल ने कहा,

जमुई जिले में दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और सख्त कार्रवाई शुरू की। हालांकि, सोशल मीडिया पर ऐसा वीडियो प्रसारित करना, जिससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होती है, POCSO एक्ट की धारा 23(4), IT एक्ट की संबंधित धाराओं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के तहत संज्ञेय अपराध है।

उन्होंने बताया कि इस मामले में साइबर पुलिस थाने में केस नंबर 45/26 दर्ज किया गया है। यह FIR ऐसे 120 सोशल मीडिया यूजर प्रोफाइल के धारकों के खिलाफ दर्ज की गई है, जिनसे वीडियो प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है।

एसपी ने लोगों से अपील की कि वे नाबालिग पीड़िता की निजता का सम्मान करें और घटना से जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर आगे शेयर या वायरल न करें।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इसकी अगुवाई अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) दीप्ति मोनाली कर रही हैं।

पुलिस का कहना है कि,

वीडियो आरोपियों में से ही किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड किया था और शुरुआती जांच में यह आशंका है कि घटना में शामिल किसी व्यक्ति ने ही इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। पुलिस पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। प्रशासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वायरल वीडियो को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

बता दें कि बिहार के जमुई से शनिवार शाम कोचिंग से लौट रहे नाबालिग लड़के और लड़की को रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया था। घटना शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

वीडियो में कुछ लोग दोनों किशोरों को घेरकर उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं। दोनों लगातार आरोपियों से उन्हें छोड़ने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं।

एक वीडियो में एक आरोपी लड़की के साथ बेहद आपत्तिजनक हरकत करता है और उसे जमीन से उठाकर ले जाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

घटना के एक अन्य वीडियो में लड़का आरोपियों से उसे और लड़की को छोड़ने की अपील करता नजर आता है। वह बताता है कि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते हैं और उनके परिवार को उनके बारे में जानकारी है।

इस पर एक आरोपी लड़के को थप्पड़ मारता है और कहता है, “अगर उन्हें पता है तो उन्हें बुलाओ।” इसके बाद समूह में मौजूद एक अन्य व्यक्ति की आवाज आती है, “परिवार को बुलाओ।”

लड़की भी आरोपियों से उन्हें छोड़ देने की लगातार अपील करती है। वह कहती सुनाई देती है, “कृपया हमें जाने दीजिए, हम यहां दोबारा कभी नहीं आएंगे।” वीडियो के आखिर में समूह के कुछ लोग दोनों को वहां से जाने के लिए कहते हैं।

पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट यानी बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गोली लगने की जानकारी सामने आई है, जबकि उसके अलावा तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

घटना पर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बेहद परेशान करने वाला” बताया।


उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी लड़की के शरीर, उसकी आवाजाही और उसकी पसंद पर नियंत्रण करने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी ने इसे पितृसत्तात्मक सोच से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता को सामान्य बनाए जाने पर भीड़ खुद को कानून समझने लगती है।

बिहार में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि किशोरी के साथ बदसलूकी करने वाला भगवा रंग का गमछा लपेटे हुआ था और सीएम सम्राट चौधरी उसे जातीय रंग से जोड़ रहे हैं।

उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते कहा कि,

जमुई कांड के वक्त जातीय सम्मेलन कर रहे सम्राट चौधरी ने रात में पुलिस अधिकारी को फ़ोन घुमाकर अपराधी के जाति के बारे में पूछा।
इस बीच, सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की टिप्पणी भी चर्चा में है। उन्होंने घटना को “छिटपुट और मामूली घटना” बताते हुए कहा कि सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर संवेदनशील है।

उमेश कुशवाहा ने 2005 से पहले के बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लोगों में घर से बाहर निकलने को लेकर डर का माहौल था। उन्होंने सवाल किया कि उस दौर में बिहार की स्थिति कैसी थी और क्या लोग अपने घरों से बाहर निकल सकते थे। उनकी इस टिप्पणी को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए हैं।